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रूस ने तोड़ा यूक्रेन की रक्षा दीवार, पोक्रोव्स्क पर कब्जा कर डोनबास के दरवाजे तक पहुंचा

रूस-यूक्रेन युद्ध में एक बड़ा मोड़ आता दिख रहा है। दो साल से जारी संघर्ष के बीच रूस ने आखिरकार यूक्रेन की “रक्षा दीवार” माने जाने वाले पोक्रोव्स्क (Pokrovsk) शहर पर लगभग कब्जा जमा लिया है। यह वही रणनीतिक शहर है जिसे डोनबास क्षेत्र का “दरवाजा” कहा जाता है।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने खुद स्वीकार किया है कि हालात बेहद नाजुक हो चुके हैं। उन्होंने कहा, “रूसी सेना ने पोक्रोव्स्क में भारी बढ़त बना ली है। हमारी सेना की संख्या उनके मुकाबले बहुत कम है। उन्होंने हमें संख्या और ताकत से घेर लिया है।”

जेलेंस्की के अनुसार, रूसी सैनिकों की संख्या यूक्रेनी सेना से आठ गुना ज्यादा है। सैटेलाइट तस्वीरों से यह भी स्पष्ट हुआ है कि 200 से अधिक रूसी सैनिक शहर के अंदर दाखिल हो चुके हैं। शहर के कई हिस्सों में अभी भीषण लड़ाई जारी है।

यूक्रेनी सेना के कैप्टन ह्रीगोयी शापोवाल ने बताया कि रूस ने पोक्रोव्स्क के आसपास भारी सैन्य जमावड़ा कर रखा है और बख्तरबंद गाड़ियों के जरिए पैदल सैनिकों को आगे बढ़ाया जा रहा है। ऐसे हालात में उन्हें रोकना बेहद मुश्किल हो गया है।

पोक्रोव्स्क, डोनबास क्षेत्र का सबसे अहम सप्लाई और ट्रांसपोर्ट हब है। यहीं से पूर्वी मोर्चे पर सैनिकों और हथियारों की सप्लाई होती है।
अगर रूस इस शहर पर पूर्ण कब्जा कर लेता है, तो वह पूरे डोनेत्सक क्षेत्र पर नियंत्रण के बेहद करीब पहुंच जाएगा।

इस शहर के गिरने का मतलब होगा कि कुरामाटोर्स्क, स्लोवियान्स्क, कोस्त्यांतिनिव्का और द्रुज़किव्का जैसे अन्य यूक्रेनी शहरों पर भी रूस का दबाव बढ़ जाएगा — जो अब तक यूक्रेन की “रक्षा की दीवार” बने हुए थे।

जेलेंस्की लगातार अमेरिका से एडवांस हथियारों और हवाई रक्षा प्रणाली की मांग कर रहे हैं। लेकिन ट्रंप प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
यूक्रेनी सूत्रों के अनुसार, कीव की कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं, लेकिन मौजूदा हालात में रूस की बढ़त को रोकना “लगभग असंभव” माना जा रहा है।

विश्लेषकों का कहना है कि अगर पोक्रोव्स्क पूरी तरह रूस के नियंत्रण में चला गया, तो डोनबास पर यूक्रेनी पकड़ कमजोर पड़ जाएगी
यह न सिर्फ युद्ध के भूगोल को बदलेगा बल्कि जेलेंस्की सरकार की रणनीतिक स्थिति को भी झटका देगा।

रूस ने अब तक का सबसे बड़ा सामरिक कदम उठाया है और डोनबास की ओर उसका रास्ता लगभग साफ हो गया है।
पोक्रोव्स्क की लड़ाई तय करेगी कि यह युद्ध किस दिशा में जाएगा — कीव की ओर या शांति वार्ता की ओर।

 

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