अमेरिका के पूर्व उपराष्ट्रपति डिक चेनी का 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके परिवार ने एक आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि उनका निधन निमोनिया और दिल से जुड़ी बीमारियों के कारण हुआ है। परिवार ने बताया कि अंतिम समय में उनकी पत्नी लिन चेनी, बेटियां लिज और मैरी, तथा परिवार के अन्य सदस्य उनके साथ मौजूद थे।चेनी का नाम अमेरिकी राजनीति में एक ऐसे नेता के रूप में दर्ज है, जिन्होंने दशकों तक सत्ता के केंद्र में रहकर फैसलों की दिशा तय की। उन्हें अमेरिकी इतिहास का सबसे शक्तिशाली उपराष्ट्रपति कहा जाता था। 2001 से 2009 तक वे राष्ट्रपति जॉर्ज W. Bush के कार्यकाल में उपराष्ट्रपति रहे और उस दौरान उन्होंने आतंकवाद विरोधी नीति से लेकर इराक युद्ध तक हर बड़ी रणनीति में निर्णायक भूमिका निभाई।

इराक युद्ध के सूत्रधार रहे डिक चेनी
11 सितंबर 2001 को जब अल- कायदा के आतंकियों ने न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन पर हमला किया, तब चेनी व्हाइट हाउस में थे। उन्होंने हमले के तुरंत बाद कहा था कि “अमेरिका आतंक के खिलाफ पूरी ताकत से जवाब देगा।”उनकी सलाह पर ही राष्ट्रपति Bush ने ‘प्री-एम्पटिव वॉर’ यानी पहले हमला करने की नीति अपनाई और 2003 में इराक पर आक्रमण किया गया।चेनी का दावा था कि इराक के पास “विनाशकारी हथियार” हैं और सद्दाम हुसैन का अल-कायदा से संबंध है। लेकिन बाद में जांच में यह साबित हुआ कि ऐसे कोई हथियार मौजूद नहीं थे। इसके बावजूद चेनी ने अपने फैसलों का बचाव किया और कहा कि उन्होंने उसी समय उपलब्ध जानकारी पर भरोसा किया था।
कठोर नीतियों और विवादों में घिरे रहे
चेनी को अमेरिका में युद्ध और सुरक्षा नीतियों के ‘आर्किटेक्ट’ के रूप में जाना जाता है। उन्होंने हिरासत में आतंकवादियों से पूछताछ के दौरान कठोर तरीकों का समर्थन किया।

5 बार आया दिल का दौरा
डिक चेनी लगभग पूरी जिंदगी दिल की बीमारियों से जूझते रहे।उन्हें 1978 से 2010 के बीच पांच बार हार्ट अटैक आया। पहली बार वे मात्र 37 वर्ष के थे। 2010 में आखिरी अटैक के बाद उनका 2012 में हृदय प्रत्यारोपण किया गया।2001 से वे अपनी हृदय गति को नियंत्रित करने के लिए एक मशीन पहनते थे, जिसे उन्होंने “विज्ञान का चमत्कार” कहा था।डॉक्टरों ने उन्हें एक ‘जीवित मिसाल’ बताया था, क्योंकि इतने हार्ट अटैक झेलने के बाद बहुत कम मरीज लंबे समय तक जीवित रह पाते हैं।
राजनीतिक जीवन का शिखर
2000 में जब जॉर्ज W. Bush राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बने, तो उन्होंने चेनी को उपराष्ट्रपति पद का साथी चुना।चेनी ने न सिर्फ घरेलू नीति बल्कि अंतरराष्ट्रीय फैसलों पर भी प्रभाव डाला। कई विशेषज्ञों ने कहा कि “बुश प्रशासन में असली ताकत चेनी के हाथ में थी।”
ट्रम्प के खिलाफ
अपने राजनीतिक जीवन के अंतिम वर्षों में चेनी अपने ही रिपब्लिकन पार्टी से अलग-थलग पड़ गए।उन्होंने खुले तौर पर डोनाल्ड ट्रम्प का विरोध किया और 6 जनवरी 2021 के कैपिटॉल हिंसा के बाद उन्हें “अमेरिका के इतिहास का सबसे बड़ा खतरा” कहा।2024 के राष्ट्रपति चुनाव में चेनी ने घोषणा की थी कि वे डेमोक्रेटिक उम्मीदवार और मौजूदा उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को वोट देंगे।उन्होंने कहा था- “देश और संविधान की रक्षा, पार्टी से ऊपर है।”










