अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई शांति योजना का मसौदा सामने आया है, जिसमें यूक्रेन को अपनी कुछ जमीन रूस को सौंपने और नाटो में शामिल न होने की शर्त रखी गई है। इस मसौदे में रूस को डोनबास क्षेत्र पर पूरा नियंत्रण देने और यूक्रेन के पुनर्निर्माण के लिए 100 अरब डॉलर देने का प्रस्ताव शामिल है।
- यूक्रेन को जमीन सौंपनी होगी
मसौदे के अनुसार, यूक्रेन को अपने पूर्वी हिस्से के डोनबास क्षेत्र का पूरा नियंत्रण रूस को देना होगा। यह क्षेत्र अभी भी 14% हिस्से तक यूक्रेन के पास है, लेकिन योजना के अनुसार यह भी रूस को दिया जाएगा। - नाटो में शामिल नहीं हो पाएगा यूक्रेन
योजना में यूक्रेन को नाटो में शामिल न होने और भविष्य में नाटो विस्तार पर रोक लगाने का सुझाव दिया गया है। यह रूस के लिए बड़ी रणनीतिक जीत मानी जा रही है। - रूस की संपत्ति से पुनर्निर्माण
मसौदे में यह भी कहा गया है कि रूस की करीब 100 अरब डॉलर की जब्त संपत्ति से यूक्रेन का पुनर्निर्माण किया जाएगा। - रूस पर प्रतिबंधों में ढील
प्रस्ताव में रूस पर लगे कई प्रतिबंध हटाने और उसे जी-8 समूह में शामिल करने का भी सुझाव दिया गया है। - युद्ध रोकने का वादा
रूस को भविष्य में कोई हमला न करने का वादा करना होगा।
कीव और यूरोप में बढ़ी हलचल
यूरोपीय देशों ने इस प्रस्ताव पर अपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह योजना रूस की आक्रामकता को बढ़ावा दे सकती है और पुतिन को मजबूत करेगी।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वे जमीन सौंपने वाले प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेंगे।
मसौदे की शुरुआत ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेलेंस्की के करीबी सलाहकार रुस्तेम उमेरोव के बीच बातचीत से हुई। उमेरोव ने मसौदे के ज्यादातर हिस्सों पर सहमति दी।
गुरुवार को अमेरिकी सेना के सचिव डैन ड्रिस्कॉल कीव पहुंचे और उन्होंने जेलेंस्की के साथ मसौदे पर चर्चा की।
जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर लिखा:
“यूक्रेन और अमेरिका की टीमें युद्ध खत्म करने की योजना के प्रावधानों पर काम करेंगी। हम रचनात्मक और तेजी से आगे बढ़ने को तैयार हैं।”
डोनाल्ड ट्रंप की यह शांति योजना यूक्रेन युद्ध को खत्म करने का प्रयास है, लेकिन इसमें कई विवादास्पद शर्तें हैं। रूस को जमीन देने और नाटो में शामिल न होने की मांग से यूक्रेन और यूरोप में हलचल बढ़ गई है। जेलेंस्की और उनके सहयोगी इस मसौदे को लेकर सावधान और सतर्क हैं। अब देखना यह है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव और अमेरिकी प्रस्ताव के बीच यूक्रेन की नीति कैसी रहती है।










