पाकिस्तान का लाहौर शहर को दुनिया के दूसरे सबसे प्रदूषित शहर के रूप में दर्ज किया गया, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। शहर में धुंध और प्रदूषण की स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि आम लोगों के लिए बाहर सांस लेना मुश्किल हो गया है। इस कड़ी में स्वास्थ्य विशेषज्ञों और अधिकारियों ने लोगों को सावधानी बरतने की चेतावनी दी है।पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के कई अन्य शहरों में भी वायु गुणवत्ता अत्यंत खराब बनी हुई है। लाहौर में वायु गुणवत्ता का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के स्वच्छ शहर मानक से 80 गुना अधिक हो गया था।

प्रदूषण के कारण
हर सर्दियों में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में वायु प्रदूषण की स्थिति गंभीर हो जाती है। सर्दियों में कम तापमान और फॉग – ठंडी हवा और धुंध के कारण प्रदूषक तत्व वातावरण में फंस जाते हैं।शहर में पुराने और डीज़ल आधारित वाहनों का धुआँ वायु को जहरीला बनाता है।खेतों में फसल के अवशेष जलाने से भारी मात्रा में प्रदूषक कण हवा में मिलते हैं।बिजली उत्पादन, ताप ईंधन और अन्य औद्योगिक गतिविधियाँ वायु प्रदूषण में योगदान करती हैं।
स्वास्थ्य पर प्रभाव
वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। लोगों को सांस लेने में कठिनाई और अस्थमा जैसी समस्याएँ,हृदय रोग और फेफड़ों से संबंधित बीमारियाँ,छोटे बच्चों और बुज़ुर्गों में स्वास्थ्य जोखिम बढ़ना और आँखों और गले में जलन, सिरदर्द और त्वचा पर असर होता है।

पाकिस्तान सरकार ने नागरिकों को जहरीली हवा से बचाने के लिए कई कदम उठाए हैं।स्कूल और शैक्षणिक संस्थानों को अस्थायी रूप से बंद किया गया।बाजारों, भोजनालयों और अन्य व्यवसायों के समय में पाबंदी लगाई गई।अधिकारियों ने लोगों को बाहर कम निकलने की चेतावनी दी।लाहौर और पाकिस्तान के अन्य शहरों में बढ़ता वायु प्रदूषण एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का संकेत है। इसके लिए न केवल सरकारी उपायों बल्कि नागरिकों की सतर्कता भी जरूरी है।










