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Hormuz में 20 हजार नाविक फंसे सीजफायर के बाद भी भोजन पानी की कमी खतरा बरकरार

होर्मुज में 20 हजार नाविकों की जान खतरे में… बिना अनाज, बिना तेल समुद्र में फंसे, सहायता की कर रहे हैं अपील सीजफायर के बावजूद होर्मुज स्ट्रेट में फंसे 2,000 जहाजों के नाविकों की कठिनाई कम नहीं हुई है. उनकी जान अब भी जोखिम में है। मिडिल ईस्ट में लगभग 40 दिनों तक चले भयंकर युद्ध के बाद अमेरिका और ईरान सीजफायर पर सहमत हो गए। सीजफायर की शर्तों में होर्मुज जलसंधि को खोले जाने की बात भी शामिल है। सीजफायर के बावजूद, होर्मुज स्ट्रेट में फंसे 20 हजार से अधिक नाविकों की ज़िंदगी अब भी संकट में है. खाड़ी क्षेत्र में वर्तमान में लगभग 2000 कार्गो जहाज फंसे हुए हैं। हालात इतने बुरे हैं कि नाविकों के पास भोजन और पीने का पानी भी समाप्त होता जा रहा है. यहां स्थिति केवल संसाधनों की कमी तक नहीं है, बल्कि मौत का डर इतना बढ़ गया है कि जहाजों के कैप्टन किसी हाल में अपने जहाज को आगे बढ़ाने के लिए तैयार नहीं हैं। समंदर के बीच रुके हुए इन हजारों जहाजों का क्या हाल है? आइए विचार करें।

सीजफायर के बाद भी खाद्य-जल की गंभीर कमी

युद्ध की शुरुआत के बाद से ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था। यहां धीरे-धीरे 2 हजार से अधिक जहाज फंस गए हैं। महिनों से फंसे इन जहाजों पर खाना और पीने का साफ पानी तेजी से कम हो रहा है। हालांकि सीजफायर का निर्णय ले लिया गया है, लेकिन नाविकों की समस्याएं अभी भी खत्म नहीं हुई हैं. इन जहाजों से आए इमरजेंसी संदेशों में नाविक राशन की कमी जैसी कठिनाइयों का जिक्र कर रहे हैं। जमीनी स्थिति यह है कि युद्ध के दौरान बंदरगाहों से कोई भी सप्लाई बोट इन जहाजों तक मदद सामग्री नहीं पहुंचा पा रही है, जिसके कारण 20,000 लोग समुद्र में डूबने को विवश हैं।

सीजफायर के बाद जहाज क्यों नहीं निकल रहे हैं

आप यह भी विचार कर सकते हैं कि जब युद्धविराम हो चुका है, तो ये नौकाएं यहां से क्यों नहीं जा रही हैं? वास्तव में ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर बहुत ही संवेदनशील है। दोनों तरफ से हमले जारी हैं. ईरानी मीडिया का कहना है कि होर्मुज को फिर से बंद किया गया है। इस स्थिति में होर्मुज वर्तमान में इन नाविकों के लिए एक प्रकार का मौत का क्षेत्र बन गया है। जहाजों के कप्तान और क्रू मेंबर्स अपनी जान के प्रति इतनी चिंता में हैं कि उन्होंने आगे बढ़ने से स्पष्ट रूप से मना कर दिया है। क्रू का मानना है कि समुद्र में किसी भी समय मिसाइल या ड्रोन आक्रमण हो सकता है। कैप्टनों ने अपनी कंपनियों को स्पष्ट रूप से बता दिया है कि वे अपनी और अपने क्रू की जान को खतरे में डालकर इस जोखिम भरे जलमार्ग को पार करने का जोखिम नहीं लेंगे।

बीमा कंपनियों ने किया हाथ उठाना

होर्मुज में मौजूदा हालात की गंभीरता को बीमा कंपनियों के व्यवहार से स्पष्ट किया जा सकता है। सीजफायर के बावजूद कोई भी समुद्री बीमा कंपनी इन जहाजों और उन पर लदे अरबों डॉलर के सामान की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं है। बीमा कंपनियों ने वर्तमान परिस्थितियों को अत्यधिक जोखिमपूर्ण बताते हुए कवरेज प्रदान करने से मना कर दिया है. बीमा सुरक्षा के बिना कोई भी वाणिज्यिक जहाज होर्मुज से नहीं जा सकता।

जहाज के मालिकों में छाया हुआ डर

बीमा कंपनियों के साथ-साथ जहाज कंपनियों के मालिक भी भय के वातावरण में जीवन बिता रहे हैं। उन्हें वर्तमान सीजफायर या शांति वार्ताओं पर अभी तक विश्वास नहीं हो रहा है. मालिकों के लिए सबसे बड़ा चिंता यह है कि यदि वे सीजफायर पर निर्भर होकर अपने जहाजों को खाड़ी के भीतर भेजते हैं और अचानक युद्ध फिर से शुरू हो जाता है, तो उनके जहाज और क्रू हमेशा के लिए फंस जाएंगे। एक जहाज के क्षति का अर्थ है करोड़ों-अरबों का नुकसान, जिसे सहन करने की क्षमता किसी भी शिपिंग कंपनी में नहीं है।

सीजफायर के मामले में सभी भ्रमित हैं

ईरान और अमेरिका के बीच हुए संघर्ष विराम के बारे में सबके मन में उलझन है। ईरान ने जिन 10 शर्तों पर सीजफायर किया, उनमें से एक शर्त लेबनान पर आक्रमण न करना भी शामिल थी. लेकिन सीजफायर के बाद इजरायल ने लेबनान में हमलों को और बढ़ा दिया. अमेरिका और इजरायल ने कहा कि लेबनान का मुद्दा पृष्ठभूमि में नहीं आया था। ईरान बार-बार यह दावा कर रहा है कि अमेरिका और इजरायल सीजफायर का पालन नहीं कर रहे हैं। ईरानी उप विदेश मंत्री ने यहां तक ऐलान किया कि आने वाले कुछ घंटे बहुत महत्वपूर्ण हैं।

यह स्थिति कितनी देर तक कायम रहेगी

होर्मुज में स्थिति फिलहाल ठीक होती हुई नहीं दिखाई दे रही है। अगले हफ्ते इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति की बातचीत होगी। इस शांति वार्ता में अमेरिकी उपाध्यक्ष जेडी वेंस उपस्थित रहेंगे। उम्मीद है कि इस संघर्ष का कुछ हल शांति वार्ता में मिल सकेगा। लेकिन इसके बाद भी होर्मुज में समस्या खत्म नहीं होगी। होर्मुज में इस समय जहाजों का गंभीर ट्रैफिक जाम स्थित है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तंग मार्ग से इस बैकलॉग को समाप्त होने में कई महीने लग सकते हैं। युद्ध के बाद ईरान यहां अपनी नियंत्रण क्षमता को और विस्तृत कर सकता है। युद्ध में हुए नुकसानों की रिकवरी के लिए वह जहाजों से भारी टोल लेने की योजना बना रहा है।

 

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