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AI पर भारत-फ्रांस की बड़ी रणनीति: अमेरिका-चीन पर निर्भर नहीं रहेंगे — मैक्रों

फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर एक बड़ा और अहम बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत, फ्रांस और पूरा यूरोप नहीं चाहते कि वे एआई के लिए सिर्फ अमेरिका या चीन के मॉडल पर निर्भर रहें। उनका साफ कहना है कि अब समय आ गया है कि देश अपनी तकनीक, अपनी सोच और अपनी रणनीति के साथ आगे बढ़ें।

मैक्रों ने कहा कि आज की तेजी से बदलती दुनिया में तकनीकी आत्मनिर्भरता बहुत जरूरी हो गई है। एआई अब सिर्फ तकनीक नहीं रही, बल्कि इसका असर अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग जैसे बड़े क्षेत्रों पर पड़ रहा है। ऐसे में किसी एक देश या कंपनी पर पूरी तरह निर्भर रहना भविष्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

उन्होंने कहा कि फिलहाल एआई की दौड़ में अमेरिका और चीन सबसे आगे हैं। वहां बड़ी टेक कंपनियां, भारी निवेश और मजबूत रिसर्च सिस्टम मौजूद हैं। लेकिन भारत और फ्रांस के पास भी जबरदस्त प्रतिभा, युवा शक्ति और तकनीकी क्षमता है, जिससे वे इस क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।

मैक्रों ने साफ कहा —
“भारत, फ्रांस और यूरोप में एक जैसी सोच है कि हम अमेरिका या चीन के किसी एक मॉडल पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहते। हमें एक संतुलित, सुरक्षित और स्वतंत्र एआई मॉडल चाहिए।”

AI में आत्मनिर्भर बनने का रोडमैप

मैक्रों ने एआई में आत्मनिर्भर बनने के लिए तीन बड़े कदम बताए:

1️ मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर
उन्होंने कहा कि देशों को अपने डेटा सेंटर, सुपरकंप्यूटर और क्लाउड सिस्टम को मजबूत करना होगा, ताकि तकनीकी नियंत्रण अपने हाथ में रहे।

2️ टैलेंट डेवलपमेंट
देशों को अपने यहां इंजीनियर, वैज्ञानिक, रिसर्चर और एआई विशेषज्ञ तैयार करने होंगे। भारत की युवा आबादी और आईटी सेक्टर इस दिशा में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

3️ भारी निवेश
एआई के विकास के लिए स्टार्टअप्स, रिसर्च और नई तकनीकों में बड़ा निवेश जरूरी है। भारत, फ्रांस और यूरोप मिलकर एक मजबूत एआई इकोसिस्टम तैयार कर सकते हैं।

मैक्रों ने यह भी स्वीकार किया कि भारत और फ्रांस अभी अमेरिका और चीन से पीछे हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि “हम रेस में हैं और सही रणनीति से इस अंतर को कम कर सकते हैं।”

भारत और फ्रांस पहले से ही रक्षा, अंतरिक्ष और तकनीक के क्षेत्र में साथ काम कर रहे हैं। अब AI इस साझेदारी का नया और सबसे अहम स्तंभ बन सकता है।
संयुक्त रिसर्च, स्टूडेंट एक्सचेंज, स्टार्टअप सहयोग और साझा टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म के जरिए दोनों देश एक मजबूत और लोकतांत्रिक एआई मॉडल तैयार कर सकते हैं।

मैक्रों का संदेश बिल्कुल साफ है —
भविष्य में असली ताकत वही देश होंगे, जो तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर होंगे।भारत, फ्रांस और यूरोप अगर मिलकर स्वतंत्र, सुरक्षित और पारदर्शी एआई मॉडल बनाते हैं, तो वे दुनिया को एक नया विकल्प दे सकते हैं।

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