अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा टकराव अब खुली लड़ाई में बदल गया है। 28 फरवरी से अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर बड़े हवाई हमले किए, जिन्हें “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” कहा गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि यह अभियान करीब चार से पांच सप्ताह तक चल सकता है।
इस अभियान का मकसद ईरान के मिसाइल उद्योग को नष्ट करना है। अमेरिकी पेंटागन ने कहा कि अमेरिका के पास मध्यम और उच्च श्रेणी के हथियार पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं और इनसे युद्ध लंबे समय तक प्रभावी ढंग से लड़ा जा सकता है।
युद्ध में अब तक की कार्रवाई
- अमेरिका ने ईरान में 1,250 से अधिक ठिकानों पर हमला किया।
- 11 ईरानी जहाज नष्ट किए गए।
- ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर भी सामने आई।
- ईरानी रेड क्रिसेंट के अनुसार 787 लोग मारे गए

अमेरिका का खर्च
- ब्राउन यूनिवर्सिटी के अनुसार, 2023 से अब तक अमेरिका ने इजरायल और मध्य पूर्व में करीब 31 से 34 अरब डॉलर खर्च किए।
- केवल पहले 24 घंटों में 779 मिलियन डॉलर का खर्च हुआ।
- अमेरिकी नौसैनिक जहाजों और लड़ाकू विमानों की तैनाती पर 630 मिलियन डॉलर खर्च।
- कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के संचालन पर 6.5 मिलियन डॉलर प्रतिदिन का खर्च।
अमेरिका के हथियार और सुरक्षा
इस अभियान में अमेरिका 20 से ज्यादा हथियार प्रणालियों का इस्तेमाल कर रहा है, जैसे:
- बी-2 स्टील्थ बॉम्बर
- एफ-35 लड़ाकू विमान
- टॉमहॉक क्रूज मिसाइल
- पैट्रियट मिसाइल सिस्टम
युद्ध में अमेरिका की ताकत और चुनौतियां
- अमेरिका का विशाल रक्षा बजट (1 ट्रिलियन डॉलर) युद्ध की वित्तीय लागत सहन कर सकता है।
- लेकिन इंटरसेप्टर मिसाइलों और अन्य हथियारों का सीमित भंडार बड़ी चुनौती है।
- लंबी लड़ाई अमेरिकी सैन्य सप्लाई चेन और हथियार निर्माण पर असर डाल सकती है।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को बढ़ा दिया है। अमेरिका के पास वित्तीय ताकत है, लेकिन हथियारों की सीमित संख्या और निर्माण की जटिलता एक रणनीतिक चिंता बनी हुई है









