आज की सबसे बड़ी खबर मिडिल ईस्ट से आ रही है। इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक शेयर बाजारों पर साफ दिखाई दे रहा है। इस कारण निवेशकों में डर है और दुनिया के कई प्रमुख बाजारों में भारी गिरावट आई है।
भारतीय शेयर बाजार पर असर
बुधवार को शुरुआती कारोबार में निफ्टी 50 करीब 517 अंक टूटकर 24,344 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं सेंसेक्स लगभग 1,700 अंक गिरकर 78,596 पर कारोबार करता नजर आया। बाजार में डर का संकेत देने वाला इंडिया VIX भी बढ़ा है।विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में हालात लगातार तनावपूर्ण हैं। इजरायल द्वारा हमले और ईरान की ओर से खाड़ी देशों के ऊर्जा ढांचे और टैंकरों को निशाना बनाने की खबरों ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है।
ग्लोबल मार्केट की स्थिति
अमेरिका का प्रमुख इंडेक्स S&P 500 दो प्रतिशत से अधिक गिर गया, जो पिछले दो महीनों का निचला स्तर है। यूरोप और एशिया के शेयर बाजारों में भी गिरावट देखने को मिली।

इस बार निवेशक कैसे प्रतिक्रिया दे रहे हैं?
आमतौर पर संकट के समय निवेशक शेयर बेचकर सुरक्षित निवेश जैसे सोना और बॉन्ड खरीदते हैं। लेकिन इस बार स्थिति अलग है।
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शेयर गिर रहे हैं
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सोना गिर रहा है
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बॉन्ड मार्केट पर भी दबाव है
विशेषज्ञों का कहना है कि अब निवेशक सीधे नकदी और अमेरिकी डॉलर की ओर जा रहे हैं।
सोना, जो पहले चार हफ्ते के उच्चतम स्तर पर था, करीब 4 प्रतिशत गिर गया। इसका मतलब है कि पारंपरिक सुरक्षित निवेश भी इस “शॉक फेज” में काम नहीं कर रहे हैं।अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तेल सप्लाई बाधित होती है या युद्ध लंबा खिंचता है, तो इसका असर सिर्फ शेयर बाजार पर नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।
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तेल महंगा होगा → महंगाई बढ़ेगी
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ब्याज दरें ऊंची हो सकती हैं
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कंपनियों की कमाई प्रभावित होगी → बाजार पर दबाव बढ़ेगा
कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि डॉलर की तेजी लंबे समय तक नहीं टिकेगी। इतिहास में देखा गया है कि युद्ध की शुरुआत में डर ज्यादा होता है, लेकिन लंबी लड़ाई में आर्थिक दबाव डॉलर पर भी असर डाल सकता है। वर्तमान में निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए। बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकते हैं। पश्चिम एशिया में स्थिति कैसे बदलती है, यह सीधे वैश्विक निवेश और आर्थिक स्थिरता पर असर डालेगा।