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“चंडीगढ़ और पंजाब में नशे के रहस्यमयी मामलों और ‘जॉम्बी ड्रग’ की चर्चा”

Chandigarh और आसपास के क्षेत्रों में हाल ही में सामने आए कुछ वीडियो ने लोगों को चौंका दिया है। इन वीडियो में अलग-अलग स्थानों पर कुछ युवक एक ही स्थिति में लंबे समय तक बिना किसी हलचल के बैठे या खड़े दिखाई दे रहे हैं। सबसे हालिया मामला चंडीगढ़ का बताया जा रहा है, जहां एक युवक लगभग एक घंटे तक सड़क किनारे एक ही मुद्रा में बैठा रहा। उसकी हालत ऐसी थी कि वह न तो प्रतिक्रिया दे रहा था और न ही अपने शरीर को हिला पा रहा था। स्थानीय लोगों के अनुसार, युवक का सिर झुका हुआ था और उसके हाथ में एक बीड़ी थी, लेकिन वह उसे जला या पी भी नहीं पाया। आसपास के लोगों ने जब उससे बात करने या उसे हिलाने की कोशिश की, तो कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं मिली। इस असामान्य व्यवहार को देखकर लोगों में डर और हैरानी दोनों देखी गई। कुछ लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। घटना की सूचना मिलने पर चंडीगढ़ पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। पुलिस के अनुसार, युवक की पहचान की जा रही है और उसके परिवार या पते का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। शुरुआती जांच में पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं यह किसी प्रकार के नशे या मादक पदार्थ के प्रभाव का मामला तो नहीं है।

पहले वीडियो में डिलीवरी व्यक्ति नजर आया

चंडीगढ़ में हाल के दिनों में सामने आए कुछ वीडियो ने शहर में चिंता और चर्चा दोनों को बढ़ा दिया है। इन घटनाओं में लोग अचानक असामान्य अवस्था में लंबे समय तक बिना किसी हलचल के खड़े या बैठे नजर आ रहे हैं। ऐसा ही एक पहला मामला 25 मार्च को सेक्टर 33B से सामने आया था, जिसने इस पूरे विषय को सुर्खियों में ला दिया। उस घटना में एक ब्लिंकिट डिलीवरी बॉय को सड़क पर लगभग ढाई घंटे तक एक ही स्थान पर स्थिर अवस्था में खड़ा देखा गया। वीडियो में वह व्यक्ति पूरी तरह निष्क्रिय दिखाई दे रहा था, मानो वह किसी बेहोशी या गहरे मानसिक प्रभाव में हो। आसपास मौजूद लोगों ने भी जब उसे देखा तो वे हैरान रह गए, क्योंकि उसकी स्थिति सामान्य नहीं लग रही थी।

दूसरे वीडियो में युवक सड़क किनारे खड़ा नजर आया।

चंडीगढ़ में सामने आ रहे रहस्यमयी मामलों की कड़ी में दूसरा वीडियो सारंगपुर क्षेत्र से सामने आया, जिसने लोगों को फिर से हैरानी और चिंता में डाल दिया है। इस वीडियो में एक युवक फुटपाथ पर सड़क किनारे खड़ा दिखाई देता है, जिसकी स्थिति सामान्य नहीं लग रही थी। युवक अपने पैरों को मोड़कर अजीब तरीके से खड़ा था और काफी देर तक उसी अवस्था में बना रहा। उसके आसपास लगभग 10 से 15 लोग मौजूद थे, जिनमें कुछ लोग बैठकर उसे देख रहे थे और कुछ राहगीर वहां से गुजर रहे थे। बावजूद इसके युवक के शरीर में कोई स्पष्ट हलचल नहीं देखी गई।वीडियो में साफ दिखाई देता है कि युवक की आंखें बंद थीं और उसका मुंह खुला हुआ था। उसके एक हाथ में बीड़ी भी थी, लेकिन वह न तो उसे पी रहा था और न ही किसी प्रकार की प्रतिक्रिया दे रहा था। उसकी यह स्थिति देखकर आसपास मौजूद लोग भी भ्रमित और चिंतित नजर आए।

पंजाब से भी 3 क्लिप सामने आई हैं।

12 अप्रैल को लुधियाना से सामने आए एक वीडियो ने सोशल मीडिया पर काफी हलचल मचा दी। इस वीडियो में एक युवक और युवती सड़क पर बेहद असामान्य और नशे की हालत में दिखाई देते हैं। दोनों की स्थिति देखकर साफ लगता है कि वे अपने शरीर पर किसी तरह का नियंत्रण नहीं रख पा रहे थे। वीडियो में युवक सिर झुकाए हुए खड़ा नजर आता है और उसकी हालत बेहद कमजोर और निष्क्रिय लगती है। वह न तो ठीक से खड़ा हो पा रहा था और न ही किसी प्रतिक्रिया में शामिल हो रहा था। उसके आसपास की गतिविधियों से वह पूरी तरह अनजान जैसा प्रतीत हो रहा था। वहीं, युवती भी नशे की हालत में झूमती हुई दिखाई देती है और बार-बार अपना चेहरा छुपाने की कोशिश कर रही है। उसकी हरकतों से यह साफ झलक रहा था कि वह मानसिक और शारीरिक रूप से स्थिर स्थिति में नहीं थी। कई बार वह युवक को संभालने की कोशिश करती है, लेकिन खुद भी संतुलन बनाए रखने में असमर्थ नजर आती है।

एक हफ्ते पहले जारी हुए वीडियो में क्या नजर आ रहा है

अप्रैल महीने में लुधियाना बस स्टैंड के सामने से सामने आया एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसने लोगों को एक बार फिर युवाओं में बढ़ते नशे को लेकर सोचने पर मजबूर कर दिया। यह घटना शहर के एक व्यस्त इलाके की है, जहां दिनभर लोगों की आवाजाही बनी रहती है। वीडियो में एक युवक और युवती सड़क किनारे बेहद असामान्य हालत में दिखाई देते हैं। युवती ने हरे रंग का टॉप और काले रंग की पैंट पहन रखी थी, जबकि युवक ने ग्रे रंग के कपड़े पहने हुए थे। दोनों की हालत देखकर साफ प्रतीत हो रहा था कि वे किसी नशे के प्रभाव में हैं। युवक पूरी तरह असंतुलित अवस्था में सड़क पर सिर झुकाकर खड़ा था। उसके शरीर में स्थिरता नहीं थी और वह सामान्य रूप से खड़ा भी नहीं हो पा रहा था। उसकी हालत देखकर ऐसा लग रहा था कि वह आसपास की स्थिति से पूरी तरह अनजान है।

22 अप्रैल को जालंधर का एक वीडियो सामने आया है कल यानी

22 अप्रैल को जालंधर के सिटी रेलवे स्टेशन पर एक ऐसा मामला सामने आया जिसने यात्रियों और स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया। स्टेशन जैसे व्यस्त सार्वजनिक स्थान पर एक युवक लंबे समय तक एक ही जगह पर खड़ा दिखाई दिया, जिसकी स्थिति सामान्य नहीं लग रही थी।  युवक काफी देर तक बिना किसी हलचल के वहीं खड़ा रहा। उसका शरीर पूरी तरह से नियंत्रण में नहीं दिख रहा था और वह आसपास की गतिविधियों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहा था। स्टेशन पर मौजूद लोग उसे देखकर रुक-रुक कर उसकी हालत के बारे में पूछने लगे, लेकिन वह किसी भी सवाल का जवाब नहीं दे रहा था। कई यात्रियों ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद वह थका हुआ है या किसी का इंतजार कर रहा है, लेकिन जब काफी देर तक उसकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ, तो लोगों को चिंता होने लगी। कुछ लोगों ने उसकी मदद करने की कोशिश भी की, लेकिन वह किसी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं दे रहा था।

जानिए, ‘जॉम्बी ड्रग’ क्या है, जिसके साथ इन घटनाओं को जोड़ा जा रहा है

जाइलेजीन (Xylazine) एक ऐसी दवा है जिसे मुख्य रूप से पशु चिकित्सा में उपयोग किया जाता है। इसका उद्देश्य जानवरों को शांत करना, दर्द को कम करना और उन्हें हल्की बेहोशी जैसी स्थिति में लाना होता है, ताकि ऑपरेशन या इलाज के दौरान उन्हें अधिक तकलीफ न हो। यह दवा सामान्य रूप से इंसानों के लिए नहीं बनाई गई है और इसका मानव शरीर पर उपयोग सुरक्षित नहीं माना जाता। जाइलेजीन को अक्सर पशु चिकित्सा में एक सेडेटिव (Sedative) के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। यह जानवरों के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है, जिससे उनकी गतिविधियां धीमी हो जाती हैं और वे शांत अवस्था में आ जाते हैं। इसी विशेषता के कारण इसे नियंत्रित परिस्थितियों में केवल पशुओं के इलाज तक सीमित रखा गया है। हाल के वर्षों में एक गंभीर समस्या सामने आई है, जिसमें इस दवा का अवैध रूप से अन्य नशीले पदार्थों के साथ दुरुपयोग किया जा रहा है। जब जाइलेजीन को अफीम आधारित दवाओं जैसे फेंटानिल, हेरोइन या कोकेन के साथ मिलाया जाता है, तो यह मिश्रण अत्यंत खतरनाक प्रभाव पैदा करता है। इस संयोजन को आमतौर पर “Tranq” या “Zombie Drug” के नाम से जाना जाता है।

नशे के लिए जाइलेजीन को फेंटानिल या हेरोइन के साथ मिलाने के कारण दो मुख्य बातें हैं..

अवैध नशीले पदार्थों के बाजार में हाल के वर्षों में एक नया और बेहद खतरनाक रुझान सामने आया है, जिसमें जाइलेजीन (Xylazine) जैसे पशु चिकित्सा में उपयोग होने वाले पदार्थ का दुरुपयोग तेजी से बढ़ा है। यह दवा, जो मूल रूप से जानवरों को शांत करने और दर्द कम करने के लिए बनाई गई थी, अब अवैध ड्रग्स के साथ मिलाकर इस्तेमाल की जा रही है। हेरोइन जैसे पारंपरिक नशीले पदार्थों की तुलना में जाइलेजीन काफी सस्ता है। अवैध बाजारों में इसकी कीमत लगभग 500 से 1000 रुपए प्रति किलो तक बताई जाती है, जो इसे ड्रग तस्करों के लिए एक आकर्षक विकल्प बना देता है। इसकी कम लागत के कारण इसे अन्य महंगे ड्रग्स में मिलाकर मुनाफा बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। अमेरिका की ड्रग एन्फोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (DEA) की रिपोर्ट के अनुसार, हाल के समय में फेंटानिल और हेरोइन जैसे ओपिऑइड ड्रग्स में जाइलेजीन की मिलावट बढ़ी है। इसका मुख्य कारण यह है कि यह न केवल ड्रग की मात्रा को बढ़ाता है, बल्कि इसके प्रभाव को भी लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करता है।

इसका असर लंबे समय तक बना रहता है।

1959 में दर्द का इलाज करने के लिए विकसित हुआ फेंटानिल, अब हेरोइन से अधिक कीमत में बिकता है। लेकिन इसकी अत्यधिक नशीली प्रकृति के कारण, हेरोइन के बजाय फेंटानिल का उपयोग बढ़ने लगा है। इसमें अन्य नशीले पदार्थ मिलाकर इसकी मात्रा बढ़ाई जाती है, जिससे तस्करों का लाभ भी अधिक हो जाता है। अमेरिका की पेसिफिक नॉर्थवेस्ट नेशनल लैबोरेट्री की रिपोर्ट के अनुसार, ‘अमेरिका में 1 किलो हेरोइन लगभग 6,000 डॉलर में खरीदी जा सकती है और इसे लगभग 80,000 डॉलर में बेचा जा सकता है। इसके विपरीत, अगर 6,000 डॉलर का फेंटानिल खरीदा जाए, तो इसके तीव्र प्रभाव के कारण इसे अवैध रूप से लगभग 16 लाख डॉलर में बेचा जा सकता है। फेंटानिल का नशा सीमित समय के लिए रहता है, इसलिए इसमें सस्ता जाइलेजीन मिलाने की प्रथा बढ़ी है, जिसका प्रभाव अधिक समय तक रहता है। DEA के अनुसार, फेंटानिल में जाइलेजीन मिलाकर नशे के प्रभाव और अवधि को बढ़ाया जाता है। ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन की मैगजीन BMJ जर्नल्स के अनुसार, ‘फिलाडेल्फिया, अमेरिका में नशे के आदी लोगों पर एक अध्ययन में पाया गया कि फेंटानिल में जाइलेजीन की मिश्रण से ऐसा अनुभव होता है, जैसे आप पूर्व के हेरोइन का सेवन कर रहे हों, जो लंबे समय तक नशा बनाए रखती है। जाइलेजीन के नशे में वही नॉड स्टेट, जिसका अर्थ है सिर झुकाकर सोने की स्थिति, उत्पन्न होती है, जैसी कि पहले हेरोइन के सेवन से होती थी। रिपोर्टों के अनुसार, ‘जॉम्बी ड्रग’ का इस्तेमाल करने वाले अधिकतर लोगों को इस बात का एहसास नहीं होता कि वे मिलावटी ड्रग का सेवन कर रहे हैं।

क्या ‘जॉम्बी ड्रग’ के प्रभाव से व्यक्ति मूर्ति में बदल जाता है?

‘जॉम्बी ड्रग’ में शामिल जाइलेजीन इंसान के मस्तिष्क और तंत्रिकाओं में पाए जाने वाले अल्फा-2 नाम के रिसेप्टर को सक्रिय कर देता है। ये रिसेप्टर हमारे शरीर के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर कार्य करके नॉरपाइनफ्रीन नामक एक न्यूरोट्रांसमिटर के रिसाव को कम कर देता ह नॉरपिनेफ्रीन का कार्य हमें सतर्क, सचेत या चौकस बनाए रखना होता है। जब जाइलेजीन के कारण अल्फा-2 रिसेप्टर सक्रिय होता है, तो नॉरपिनेफ्रीन निष्क्रिय हो जाता है। इससे दो प्रकार के प्रभाव होते हैं… दिमाग की गतिविधि घट जाती है। मस्तिष्क एक प्रकार से ठंडा हो जाता है और व्यक्ति जिस स्थिति में है, वहां तेज थकावट और नींद का अनुभव करने लगता है। उसे यह नहीं पता चलता कि आस-पास क्या हो रहा है। शरीर की मांसपेशियां ढीली हो जाती हैं। बहुत थकावट महसूस होती है। हिलने-डुलने की शक्ति घटने लगती है। व्यक्ति एक ही स्थिति में कई घंटों तक रहता है, क्योंकि मांसपेशियों को दिमाग से किसी क्रिया का संकेत नहीं मिलता। जाइलेजीन के साथ मिलकर इस्तेमाल किया गया फेंटानिल या अन्य कोई दवा इस प्रभाव को और बढ़ाता है।

क्या पहले भी ‘जॉम्बी ड्रग’ से जुड़े मामले देखे गए हैं?

भारत में अभी तक इंसानों में जाइलेजीन के उपयोग की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिका में इसका संक्रमण सबसे अधिक है। 2000 के दशक की शुरुआत में प्यूर्टो रिको के आमदनी करने वाले व्यक्तियों ने इसका उपयोग करना शुरू किया था। उस समय इसे घोड़ों को बेहोश करने वाली दवाई के रूप में जाना जाता था। 2006 में अमेरिका के फिलाडेल्फिया में जाइलेजीन से 7 लोगों की मृत्यु की पुष्टि हुई। 2014 में बड़े पैमाने पर हेरोइन जैसे नशीले पदार्थों में इसकी मिलावट शुरू हुई। अप्रैल 2023 में बाइडन प्रशासन ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते खतरे के रूप में बताया। 2022 में यूक्रेन में भी इससे एक व्यक्ति की मृत्यु हुई। 2024 में ब्रिटेन की सरकार ने इसे ‘नियंत्रित पदार्थ’ की सूची में शामिल किया है। फिलाडेल्फिया में इसका प्रयोग सबसे अधिक होता है। यहाँ ड्रग ओवरडोज से होने वाली सभी मौतों में 31% मौतें इसकी वजह से होती हैं। वर्तमान में इसका उपयोग अमेरिका के अन्य हिस्सों में भी बढ़ने लगा है।

देश में यह ‘जॉम्बी ड्रग’ कैसे पहुंची, सबसे अधिक उपयोग किस क्षेत्र में हो रहा है

भारत में जाइलेजीन के अवैध उपयोग के संदर्भ में कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। सरकार के सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन, यानि CDSCO, के नियमों के अनुसार, जाइलेजीन का उपयोग केवल पशुओं के उपचार के लिए ही किया जा सकता है AIIMS का राष्ट्रीय ड्रग निर्भरता उपचार केंद्र यानी NDDTC और केंद्रीय सरकार का सामाजिक न्याय मंत्रालय नशे की रोकथाम के लिए प्रयासरत हैं। NDDTC के 2019 के सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में लगभग 5.7 करोड़ लोग अफीम आधारित हेरोइन जैसे नशों का सेवन करते हैं। वहीं करीब 4 करोड़ लोग अन्य प्रकार के नशे का उपयोग करते हैं। 2024 में DEA की एक रिपोर्ट के अनुसार, ‘अब मेडोटोमिडाइन नामक एक नई दवा जाइलेजीन की जगह ले रही है। यह जाइलेजीन की तुलना में 300 गुना ज्यादा नशीली है। चीन इन दोनों दवाओं का सबसे बड़ा निर्यातक है, जबकि भारत इस मामले में दूसरा सबसे बड़ा एक्सपोर्टर है। भारत के पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तर-पूर्व के क्षेत्रों में अवैध दवाइयों की तस्करी अत्यधिक है। NCRB के 2021 के आंकड़ों के अनुसार, अवैध दवाइयों के उपयोग से संबंधित NDPS एक्ट के तहत उत्तर प्रदेश में 10,432 मामले सबसे अधिक दर्ज हुए थे। इसके बाद महाराष्ट्र और पंजाब का स्थान है। हालांकि, प्रति 10 लाख की जनसंख्या पर दवाइयों से जुड़े अपराधों के मामले में पंजाब पहले स्थान पर है। यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑफ ड्रग्स एंड क्राइम, जिसे UNODC कहते हैं, की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर अवैध ड्रग ट्रैफिकिंग के लिए दो क्षेत्र प्रसिद्ध हैं। पहला- अफगानिस्तान, ईरान और पाकिस्तान, और दूसरा- म्यांमार, थाईलैंड और लाओस। इन दोनों क्षेत्रों से दुनिया को अधिकांश अफीम आधारित और अन्य प्रकार के नशीले पदार्थों की आपूर्ति होती है। 2021 तक अफगानिस्तान अफीम का सबसे प्रमुख उत्पादक देश था। वर्तमान में म्यांमार सबसे अधिक अफीम उगाता है। UNODC का कहना है कि इन दोनों क्षेत्रों के मध्य स्थित होने के कारण साउथ एशिया, विशेषकर भारत, ड्रग्स के अवैध उपभोग से सबसे अधिक प्रभावित है।

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