दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए धमाके की जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों को पता चला है कि ब्लास्ट को अंजाम देने के लिए जो मोबाइल फोन और सिम कार्ड इस्तेमाल किए गए, उनमें से कई नेपाल और उत्तर प्रदेश के कानपुर से खरीदे गए थे।
नेपाल से खरीदे गए पुराने मोबाइल
जांच में सामने आया है कि फिदायीन हमलावर डॉ. उमर ने नेपाल से 6 पुराने मोबाइल फोन खरीदे थे। इन मोबाइलों को एक्टिव रखने और संपर्क साधने के लिए कुल 17 सिम कार्ड जुटाए गए।
कानपुर के व्यक्ति के नाम पर 6 सिम कार्ड
जांच के दौरान यह भी पता चला है कि 17 में से 6 सिम कार्ड कानपुर के बेकनगंज इलाके के एक व्यक्ति के नाम पर रजिस्टर मिले। एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि ये सिम उसके नाम पर कैसे एक्टिव हुए और इसमें किसी नेटवर्क की भूमिका है या नहीं।
हमले से पहले किनसे बात कर रहा था उमर?
जांच एजेंसियों के अनुसार, धमाके से करीब एक घंटे पहले तक डॉ. उमर लगातार संपर्क में था—
- डॉ. परवेज
- डॉ. मोहम्मद आरिफ
- डॉ. फारूक अहमद डार
इनमें से डॉ. परवेज, फरीदाबाद के अल-फलाह विश्वविद्यालय से गिरफ्तार किए गए डॉ. शाहीन सईद का भाई है। परवेज पहले लखनऊ के इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर था।
‘शू-बम’ के इस्तेमाल की आशंका
जांच एजेंसियों को शक है कि उमर ने धमाके के लिए ‘शू-बम’ (जूते में छिपा बम) का इस्तेमाल किया। इसी तकनीक से कई अंतरराष्ट्रीय आतंकी घटनाएँ पहले भी की जा चुकी हैं।
धमाके में अब तक 14 मौतें
10 नवंबर को हुए इस बम धमाके में अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है और 20 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं। एनआईए और दिल्ली पुलिस की विशेष टीमें लगातार इस मामले की गहराई से जांच कर रही हैं।
