पराली जलाने पर सरकार के प्रतिबंध और प्रशासनिक सख्ती के बावजूद भी किसान रुक नहीं रहे हैं।धान की कटाई के सीजन के साथ ही पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। बुधवार को इस सीजन का सबसे बड़ा उछाल देखने को मिला, जब राज्यभर में एक ही दिन में 283 नए मामले दर्ज किए गए, जो अब तक के सबसे अधिक हैं और इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। 15 सितंबर से 29 अक्टूबर तक पराली जलाने के कुल 1,216 मामले सामने आए हैं।पिछले साल 2024 में इसी दिन 219 मामले दर्ज हुए थे, यानी इस बार पंजाब ने पिछले साल का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है।

सरकार हुई सख्त 402 नोडल अफसरों को नोटिस
लगातार बढ़ती घटनाओं के बीच पंजाब सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने 402 नोडल अफसरों को नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके इलाकों में आगजनी की घटनाएं क्यों नहीं रोकी जा सकीं। इन अफसरों को 2 हफ्तों में जवाब देना होगा, अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।सरकार का कहना है कि यह लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी क्योंकि इससे न केवल पंजाब बल्कि दिल्ली- NCR समेत पूरे उत्तरी भारत की हवा जहरीली हो रही है।
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा केस सीएम मान के जिले संगरूर से आए हैं जहां 79 से अधिक मामले सामने आए हैं। प्रशासन ने किसानों पर सख्त कार्रवाई की। प्रशासन ने कुल 331 FIR दर्ज की और 443 मामलों में करीब 23 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है।पर्यावरण विभाग ने बताया कि 14.8 लाख रुपए की वसूली पहले ही की जा चुकी है। साथ ही 405 रेड एंट्रियां की गई हैं ताकि भविष्य में ऐसे मामलों पर तत्काल एक्शन लिया जा सके।
जालंधर और खन्ना का AQI 236 पहुंचा
पराली जलाने से पंजाब की हवा तेजी से प्रदूषित हो रही है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक बुधवार को जालंधर और खन्ना का AQI 236 दर्ज किया गया, जो “खराब” श्रेणी में आता है।इसके अलावा पटियाला (179), मंडी गोबिंदगढ़ (196), लुधियाना (133) और रूपनगर (121) का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) येलो जोन में रहा। विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले हफ्तों में हालात और बिगड़ सकते हैं अगर पराली जलाने की रफ्तार नहीं थमी।

पराली का धुआं दिल्ली- NCR तक पहुंचा
दिल्ली और NCR में वायु गुणवत्ता गिरने के लिए अक्सर पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने को जिम्मेदार ठहराया जाता है। हर साल यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बनता है। इस बार भी पंजाब से उठने वाला धुआं राष्ट्रीय राजधानी की हवा को जहरीला बना रहा है।दिल्ली में वायु गुणवत्ता “बहुत खराब” श्रेणी में दर्ज की जा रही है, जबकि पंजाब में स्थानीय आबादी भी खांसी, सांस की तकलीफ और आंखों में जलन जैसी समस्याओं से जूझ रही है।
सरकार की अपील
पंजाब सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे पराली को जलाने की बजाय इसके वैकल्पिक उपयोग के तरीके अपनाएं।सरकार ने मशीनरी सब्सिडी, बायो-डीकंपोजर, और पराली प्रबंधन केंद्रों की सुविधा का दावा किया है, लेकिन जमीन पर इन योजनाओं का असर सीमित दिख रहा है।










