शनिवार की शाम को लुधियाना के कोचर मार्केट इलाके में एक खौफनाक हादसा होते बाल-बाल बच गया। संगरूर से खेल प्रतियोगिता में भाग लेने आए 55 स्कूली खिलाड़ी एक निजी बस में सवार थे । लेकिन कोचर मार्केट में पहुंचकर उनकी बस हाईटेंशन तारों से टकरा गई। हादसे के समय बस में जोरदार चिंगारियां उठने लगीं और बच्चों में हड़कंप मच गया।

कैसे हुआ हादसा?
बताया जा रहा है कि बस कोचर मार्केट इलाके में जैसे ही पहुँची, वहां लटक रहे हाईटेंशन तारों में बस के ऊपर लगे एंगल फंस गए। टकराने के बाद तारों में चिंगारियां उठने लगीं। बस में सवार बच्चों ने तुरंत शोर मचाया, जिससे आसपास के लोग घरों से बाहर निकल आए।प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जैसे ही तार टूटे और चिंगारी जमीन पर गिरी, आसपास के अन्य तारों में भी चिंगारियां उठ गईं। यह देख लोग तुरंत बस को रोकवाने में जुट गए। गनीमत रही कि किसी भी बच्चे को करंट नहीं लगा।
स्थानीय लोगों की मदद से बच्चों को सुरक्षित निकाला गया
हादसे के समय इलाके के लोग फुर्ती दिखाते हुए बस के शीशे तोड़कर बच्चों को बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया । लोगों ने कहा कि यह किसी चमत्कार से कम नहीं था कि बच्चों को कोई नुकसान नहीं हुआ। बस के ड्राइवर ने भी बताया कि अंधेरा होने और सड़क किनारे स्ट्रीट लाइट बंद होने के कारण उसने तारे दिखाई नहीं दी।बिजली विभाग की लापरवाही के कारण बस में उलझने के बाद तारें टूट गई।जिससे पूरे इलाके की बिजली स्पलाई बंद हो गई।

बिजली विभाग की प्रतिक्रिया
हादसे के बाद बिजली निगम की टीम मौके पर पहुंची और लाइन बंद कर मरम्मत का काम शुरू किया। प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं, लेकिन कोचर मार्केट और आसपास के इलाके में बिजली अभी तक पूरी तरह बहाल नहीं हुई। लोगों ने बताया कि बिजली की हाई वोल्टेज की तारें नीचे लटक रही हैं।जिसके ऊपर प्रशासन कोई ध्यान नही दे रहा है।जिसके चलते यह हादसा हुआ है। यह घटना पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन के मॉडल टाउन डिविजन की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करती है। स्थानीय व्यवसायी ने बताया कि उन्होंने पहले भी अधिकारियों को तारों की सुरक्षा के लिए शिकायत दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।उन्होंने कहा, “अगर करंट चालू होता तो यह हादसा जानलेवा साबित हो सकता था। विभाग की लापरवाही की वजह से पहले भी इलाके में कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन उच्च अधिकारियों और एक्शन अधिकारी तरसेम लाल बैंस पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।”
इस घटना ने एक बार फिर पंजाब में बिजली विभाग की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह हादसा साबित करता है कि कभी-कभी विभागीय लापरवाही और मामूली सुरक्षा उल्लंघन भी खतरनाक परिणाम दे सकते हैं।










