मोहाली के प्रसिद्ध महेंद्र चौधरी जूलॉजिकल पार्क, यानी छतबीड़ चिड़ियाघर में मंगलवार सुबह एक भयानक हादसा हुआ। पार्क में पर्यटकों को लाने-ले जाने वाली इलेक्ट्रॉनिक ई-रिक्शाओं में चार्जिंग के दौरान अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और लगभग 20 से 25 ई-रिक्शा आग की चपेट में आकर पूरी तरह जलकर राख हो गए।यह सभी ई-रिक्शा चार्जिंग स्टेशन पर खड़े थे और इनमें चार्जिंग प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान अचानक कुछ गाड़ियों से धुआँ उठने लगा। कुछ ही मिनटों में यह धुआँ तेज़ आग में बदल गया और वहां खड़ी अधिकांश गाड़ियों को अपनी चपेट में ले लिया।चिड़ियाघर के कर्मचारियों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया। कुछ गाड़ियों को तुरंत वहां से हटाने का प्रयास किया गया, लेकिन आग तेजी से फैल गई। कर्मचारियों ने तुरंत बिजली आपूर्ति बंद करवाई और फायर बिग्रेड को इसकी सूचना दी।

दमकल और बचाव कार्य
सूचना मिलते ही डेराबस्सी और जीरकपुर से दो फायर टेंडर मौके पर भेजे गए। आग बुझाने के दौरान दमकलकर्मियों को गाड़ियों में होने वाले छोटे-छोटे विस्फोटों और इलेक्ट्रिक वाहनों की विशेष सुरक्षा खतरों का सामना करना पड़ा। बावजूद इसके दमकलकर्मियों और चिड़ियाघर स्टाफ ने हिम्मत और सूझबूझ के साथ करीब 30 मिनट की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया।इस घटना के चलते किसी के हताहत होने की कोई सूचना नही है।
आग के कारण और नुकसान
अभी तक आग लगने के वास्तविक कारण का पता नहीं चल पाया है। प्रारंभिक जांच के अनुसार यह हादसा शॉर्ट सर्किट के कारण हुआ है। पुलिस की टीम इस मामले की पूरी जांच कर रही है।चिड़ियाघर प्रबंधन ने घटना के तुरंत बाद नुकसान का आंकलन करना शुरू कर दिया है। अनुमानित तौर पर करीब 20 से 25 इलेक्ट्रिक ई-रिक्शा पूरी तरह जल चुके हैं। इन गाड़ियों का मुख्य उपयोग पार्क में पर्यटकों को लाने-ले जाने के लिए किया जाता था। इस वजह से आग लगने के बाद आने वाले कुछ दिनों में पर्यटकों को पार्क में आवाजाही के दौरान असुविधा हो सकती है।

पहले भी हुआ था हादसा
इस साल फरवरी में भी छतबीड़ चिड़ियाघर में एक हादसा हुआ था। उस दौरान टूरिस्टों को ले जाने वाली गाड़ी अचानक पलट गई थी, जिसमें छह लोग घायल हुए थे। हालांकि, उस हादसे में किसी की मौत नहीं हुई थी।लेकिन लोगों को चोटे जरूर लगी थी। ऐसे हादसे पार्क की सुरक्षा और इलेक्ट्रिक वाहन प्रबंधन पर सवाल खड़ा करती हैं।










