शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल शनिवार शाम पंजाब विश्वविद्यालय (PU) का दौरा करने पहुंचे। उन्होने विश्वविद्यालय में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के समर्थन में खड़े होने का ऐलान किया। बादल ने कहा कि यह आंदोलन केवल राजनीतिक मुद्दों से जुड़ा नहीं है बल्कि यह सीधे तौर पर “पंजाब के अधिकारों का सवाल” है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह शिअद, कांग्रेस या आम आदमी पार्टी का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे पंजाब का हित है।विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा लंबित सीनेट चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा को लेकर छात्र पिछले कईं हफ्तों से आंदोलन में जुटे हुए हैं। PU बचाओ मोर्चा के छात्रों से बातचीत करते हुए बादल ने कहा, “यह मामला विश्वविद्यालय की सीमाओं तक सीमित नहीं है। यदि पंजाब अपने संस्थानों की रक्षा नहीं करेगा, तो कोई और यह नहीं करेगा।”पंजाब विश्वविद्यालय ने 18.19 और 20 नवंबर को होने वाली परीक्षाओं को स्थगित कर दिया है। पंजाब यूनिवरसिटी बचाओ मोर्चा ने 18 और 19 नवंबर को विश्वविद्यालय का एडमिन ब्लाक बंद करने का ऐलान किया है।

शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिह बादल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विश्वविद्यालयों और भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों को कमजोर करके पंजाब पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, “आप विश्वविद्यालय को कमजोर करते हैं और आप राज्य को कमजोर करते हैं। यह सिलसिला लगातार जारी है।”उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे अपने आपसी मतभेदों को दरकिनार कर सीनेट की बहाली और समय पर चुनाव कराने के लिए एकजुट मंच पर आएं। साथ ही उन्होंने कहा कि वह उपराष्ट्रपति से मिलकर चुनावों के लिए निश्चित समय-सीमा तय करने का अनुरोध करेंगे। बादल ने स्पष्ट किया, “सात से दस दिनों के भीतर हमें स्पष्टता प्रदान करें। अगर कोई प्रगति नहीं होती है, तो मैं वापस आकर छात्रों के साथ बैठूँगा। और अगर छात्र इस लड़ाई का नेतृत्व करते हैं, तो शिअद उनके साथ खड़ा रहेगा।”

सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि पंजाब विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं है, बल्कि यह राज्य का प्रतीक और पंजाबियों के लिए भावनात्मक मुद्दा है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में उन्होंने चार साल पढ़ाई की है और किसी भी केंद्रीकरण के कदम का विरोध करना उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी महत्वपूर्ण है।उन्होंने चेतावनी दी कि यह प्रयास केवल पंजाब विश्वविद्यालय पर कब्ज़ा करने का पहला कदम है और इसके बाद चंडीगढ़ के प्रशासनिक चरित्र को बदलने की कोशिशें जारी रहेंगी। उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि चंडीगढ़ के लिए अलग भर्ती नीति तैयार की जा रही है। 1966 में राज्य पुनर्गठन के समय, पंजाब और हरियाणा से 60:40 के अनुपात में अधिकारियों की नियुक्ति तय की गई थी, लेकिन अब अन्य केंद्र शासित प्रदेशों की तर्ज पर चंडीगढ़ के लिए अलग कैडर बनाने की तैयारी की जा रही है।बादल ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैं यहां किसी राजनीतिक व्यक्ति के रूप में नहीं आया हूँ। यह मेरे लिए भावनात्मक मुद्दा है। पंजाब विश्वविद्यालय से लगभग 200 कॉलेज जुड़े हैं। इसे बचाने के लिए मैं हर संभव प्रयास करूँगा।”









