ईरान के दो प्रमुख शहरों तेहरान और मशहद में विश्वविद्यालय परिसरों में लगातार दूसरे दिन सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही छात्रों की सक्रियता बढ़ी है। छात्र समूहों और मानवाधिकार संगठनों के अनुसार कम से कम सात विश्वविद्यालयों में छात्रों ने एकत्र होकर नारेबाजी की और जनवरी में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी।रविवार को कई छात्रों ने काले कपड़े पहनकर मौन प्रदर्शन किया। तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ आर्ट और ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी सहित कई संस्थानों में छात्रों की भीड़ देखी गई। प्रदर्शन के दौरान राजनीतिक सुधार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जवाबदेही की मांग को लेकर नारे लगाए गए।
जनवरी के प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि
जनवरी में हुए देशव्यापी प्रदर्शनों को सुरक्षा बलों ने सख्ती से दबा दिया था। अधिकार समूहों का दावा है कि हजारों लोग मारे गए और लगभग 40 हजार लोगों को गिरफ्तार किया गया। हालांकि, ईरानी सरकार ने कहा था कि 3 हजार से अधिक लोगों की मौत हुई और इसके लिए उसने विदेशी ताकतों को जिम्मेदार ठहराया। उस दौरान प्रदर्शनकारियों ने देश के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई के शासन के खिलाफ भी आवाज उठाई थी।

हालिया प्रदर्शनों पर सरकार की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सरकारी मीडिया ने परिसरों में तनाव की पुष्टि की है। तेहरान विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने छात्रों को उग्र नारे और हिंसक गतिविधियों से दूर रहने की चेतावनी दी है। विश्वविद्यालय परिसरों के बाहर और भीतर सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।
अमेरिका से बढ़ते तनाव के बीच प्रदर्शन
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। ओमान की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच वार्ता का अगला दौर स्विट्जरलैंड में होने की संभावना है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि कूटनीतिक समाधान संभव है, लेकिन ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन के अधिकार से पीछे नहीं हटेगा।
विश्लेषकों का मानना है कि विश्वविद्यालयों में उठ रही आवाजें देश में व्यापक असंतोष का संकेत हो सकती हैं। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं की दिशा, दोनों ही ईरान की राजनीतिक स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं। फिलहाल, तेहरान और मशहद के विश्वविद्यालय परिसर एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गए हैं।