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वेरका लस्सी महंगी हुई: अब 800ML की जगह 900ML, कीमत ₹5 बढ़ी

 दिवाली के बाद दूध उत्पादों की कीमतों में एक बार फिर हलचल देखने को मिली है। पंजाब राज्य सहकारी दूध संघ (MILKFED) के ब्रांड वेरका (Verka) ने अपनी लोकप्रिय लस्सी के दामों में बढ़ोतरी की है। कंपनी ने 800ML वाले पैकेट की कीमत ₹30 से बढ़ाकर ₹35 कर दी है। साथ ही, पैकिंग में भी बदलाव किया गया है—अब उपभोक्ताओं को 800ML की जगह 900ML की लस्सी मिलेगी।

 दाम में ₹5 की बढ़ोतरी

दिवाली के बाद लागू हुई नई दरों के अनुसार, वेरका की लस्सी अब पहले से ₹5 महंगी हो गई है। पहले जहाँ 800ML का पैक ₹30 में उपलब्ध था, अब वही लस्सी ₹35 में मिलेगी। कंपनी का दावा है कि कीमत बढ़ने के बावजूद उपभोक्ताओं को अब 100ML अधिक लस्सी मिल रही है, जिससे गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार हुआ है।वेरका ने अपनी लस्सी की नई पैकिंग भी लॉन्च की है, जो दिवाली के बाद से बाजार में उपलब्ध है। नई पैकिंग को अधिक आकर्षक और पर्यावरण के अनुकूल बताया जा रहा है। कंपनी का कहना है कि उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पैकेट का आकार और डिज़ाइन दोनों बदले गए हैं।गौरतलब है कि हाल ही में पंजाब के मुख्यमंत्री ने दूध और दूध उत्पादों की कीमतें कम करने की घोषणा की थी। लेकिन वेरका द्वारा लस्सी की कीमत में की गई यह बढ़ोतरी सरकार की उस घोषणा के विपरीत मानी जा रही है। इस वजह से सोशल मीडिया पर उपभोक्ताओं की नाराजगी भी देखने को मिल रही है।वेरका के सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय उत्पादन और परिवहन लागत में बढ़ोतरी के कारण लिया गया है। दूध और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों का असर अब लस्सी के उत्पादन पर भी पड़ा है। कंपनी का कहना है कि उपभोक्ताओं को मात्रा में वृद्धि दी जा रही है ताकि उन्हें मूल्य के अनुसार बेहतर उत्पाद मिल सके।

वेरका लस्सी पंजाब और चंडीगढ़ के सबसे लोकप्रिय डेयरी उत्पादों में से एक है। दाम बढ़ने की खबर पर उपभोक्ताओं की मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। कुछ लोग कहते हैं कि कीमत में बढ़ोतरी के बावजूद 100ML अधिक मात्रा एक अच्छा कदम है, जबकि अन्य का मानना है कि सरकार को दूध उत्पादों की कीमतों पर सख्त निगरानी रखनी चाहिए।वेरका लस्सी की नई कीमतें और पैकिंग अब पंजाब और चंडीगढ़ के बाजारों में लागू हो चुकी हैं। कंपनी ने कीमत में ₹5 की बढ़ोतरी की है, लेकिन इसके साथ ही पैकिंग को 800ML से बढ़ाकर 900ML किया गया है। उपभोक्ता अब देखेंगे कि क्या यह “मात्रा के साथ मूल्य” वाला संतुलन उनके लिए फायदेमंद साबित होता है या नहीं।

 

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