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देश में तीन मौसमी SYSTEM सक्रिय, अगले 3-4 दिन भारी बारिश और आंधी का अलर्ट. CYCLONE MONTHA के चलते आंध्र प्रदेश में स्कूल बंद

देश में 15 अक्टूबर को मानसून विदा हो गया था, लेकिन मौसम के मिजाज ने अचानक ही बदलना शुरू कर दिया।मौसम विभाग के मुताबिक, फिलहाल देश में तीन मौसमी सिस्टम एक साथ सक्रिय हैं, जिनका असर अगले 3-4 दिन तक 15 राज्यों में देखा जाएगा। इन सिस्टम के चलते मध्य प्रदेश, गुजरात, दक्षिण भारत के कई हिस्सों और उत्तरी हिमालयी राज्यों में तेज बारिश, हवाओं और बर्फबारी का खतरा बना हुआ है।पिछले 24 घंटों में देश के लगभग 90% हिस्सों में बादलों ने घेर रखा है। कई जगह हल्की बारिश हुई तो कुछ राज्यों में तेज बारिश ने लोगों की दिनचर्या प्रभावित की। मध्य प्रदेश, गुजरात और दक्षिण भारत के राज्यों में इसका असर सबसे ज्यादा देखने को मिला। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम विक्षोभ (Western Disturbance) के एक्टिव होने से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी बारिश हो सकती है। इसके साथ ही नवंबर के पहले हफ्ते में पहाड़ों पर बर्फबारी की संभावना है।

अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में सक्रिय सिस्टम

अरब सागर में बने मौसमी सिस्टम के कारण गुजरात के कई जिलों में भारी बारिश दर्ज की गई। अमरेली जिले के राजुला में सोमवार सुबह 6 से 8 बजे के बीच दो घंटे में 6 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। वहीं, दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव वाले क्षेत्र (डीप डिप्रेशन) की गति धीमी होने के बावजूद यह धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है। मौसम विभाग का अनुमान है कि यह ‘चक्रवात मोन्था’ में बदल सकता है। वर्तमान में इसका केंद्र विशाखापट्टनम से 830 किलोमीटर पूर्व में स्थित है।

तीन मौसमी सिस्टम एक साथ एक्टिव

पूर्वी तट का तूफान मोन्था:
तूफान मोन्था मंगलवार रात तक आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम और कलिंगपट्टनम के बीच काकीनाड़ा के तट से टकराने की संभावना है। अनुमान है कि इस दौरान हवा की गति 100 से 110 किमी प्रति घंटा तक पहुंचेगी। आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है।

पूर्व मध्य अरब सागर का डीप डिप्रेशन:
रविवार को यह सिस्टम डीप डिप्रेशन में तब्दील हो गया। हालांकि, यह गुजरात की ओर बढ़ने की बजाय तट से दूर मुड़ रहा है। अगले 24 घंटों के दौरान गुजरात के कुछ जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है।

पश्चिमी विक्षोभ:
उत्तरी हिमालय के पहाड़ी राज्यों में सोमवार रात से सक्रिय होने वाला पश्चिमी विक्षोभ तराई क्षेत्रों में भारी बारिश और बर्फबारी का कारण बनेगा। इसके प्रभाव से नवंबर के पहले हफ्ते में तापमान 3-4 डिग्री तक गिर सकता है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान से लेकर दिल्ली तक इसका असर महसूस होगा।

ओडिशा और आंध्र प्रदेश पर तूफान का असर

ओडिशा सरकार ने तटीय जिलों में लोगों की सुरक्षा के लिए बचाव एवं राहत टीमों को सक्रिय कर दिया है। 24 ODRAF, 5 NDRF और 99 फायर सर्विस टीमों के 5,000 कर्मचारी तैनात किए गए हैं। मछुआरों को समुद्र से दूर रहने की चेतावनी दी गई है। प्रभावित जिलों के स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र 30 अक्टूबर तक बंद रहेंगे। अनुमान है कि तूफान 28 अक्टूबर की शाम या रात को काकीनाड़ा तट से टकराएगा।

राजस्थान में बारिश और सर्दी का प्रभाव

बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बने सिस्टम के प्रभाव से राजस्थान में भी मौसम का मिजाज बदल गया है। कोटा, उदयपुर और सवाई माधोपुर में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने 19 जिलों में बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।जयपुर समेत कई शहरों में रात का तापमान औसत से 4-5 डिग्री अधिक रहा। जयपुर में पारा 23.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ, जबकि सामान्य औसत 19-20 डिग्री के आसपास है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में तेज हवाओं और बारिश के कारण दिन और रात का तापमान 3-4 डिग्री और गिर सकता है। इसके चलते कड़ाके की सर्दी महसूस होगी।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि तीनों मौसमी सिस्टम का एक साथ सक्रिय होना असामान्य है और इससे देश के विभिन्न हिस्सों में अगले 3-4 दिन मौसम की स्थिति अस्थिर बनी रहेगी। लोगों को बारिश, तूफान और ठंड के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

 

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