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TMC विधायक दिलीप मंडल हिरासत में, बंगाल में सियासी हलचल

West Bengal की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक Dilip Mondal को पुलिस ने हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई ओडिशा के पुरी स्थित एक होटल से की गई, जिसके बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। दिलीप मंडल दक्षिण 24 परगना जिले की बिष्णुपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं और उन्हें मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के करीबी नेताओं में गिना जाता है। उनकी गिरफ्तारी ने सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर भी चर्चा को जन्म दे दिया है। यह कार्रवाई एक विशेष इनपुट के आधार पर की गई और इसके बाद उन्हें पुरी के होटल से हिरासत में लिया गया। बताया जा रहा है कि उन्हें आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए ट्रांजिट रिमांड पर कोलकाता लाया जा रहा है। इस पूरे मामले में पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की भूमिका भी सामने आई है, जिसने कार्रवाई को अंजाम दिया। अधिकारियों का कहना है कि जांच प्रक्रिया के तहत आगे की पूछताछ की जाएगी। वहीं दूसरी ओर, इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। विपक्षी दलों का कहना है कि राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जबकि सत्तापक्ष इस कार्रवाई को नियमों के तहत बताया जा रहा है। राजनीतिक हलकों में इस गिरफ्तारी को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई नेताओं का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में और भी बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है। दक्षिण 24 परगना जिले में भी इस घटना को लेकर चर्चा तेज है, जहां से दिलीप मंडल विधायक हैं। स्थानीय स्तर पर उनके समर्थकों में भी चिंता का माहौल देखा जा रहा है। पुलिस हिरासत के बाद उनसे कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर पूछताछ की जा सकती है, जिससे मामले की परतें और खुल सकती हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि Mamata Banerjee सरकार और पुलिस इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं और जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।

वायरल हुआ था वीडियो

हाल ही में सोशल मीडिया पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक Dilip Mondal का एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। हालांकि इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है। वायरल वीडियो में आरोप लगाया जा रहा है कि दिलीप मंडल एक अन्य राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं और समर्थकों को कथित तौर पर धमकी देते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद यह मामला काफी चर्चा में आ गया है। इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर उनके खिलाफ पुलिस थाने में शिकायत भी दर्ज कराई गई थी। शिकायत में वीडियो के आधार पर कार्रवाई की मांग की गई है और मामले की जांच की बात कही गई है। वहीं दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर अभी तक विधायक या उनकी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक और विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में इस वीडियो को लेकर अलग-अलग दावे और चर्चाएं जारी हैं। पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद मामले की प्रारंभिक जांच की जा रही है। यदि वीडियो और आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो आगे नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

पुलिस ने शुरू की थी जांच

धमकी देने के आरोपों के आधार पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक Dilip Mondal के खिलाफ पुलिस ने गैर-जमानती धाराओं में मामला दर्ज कर लिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियों ने शुरुआती चरण से ही सक्रियता बढ़ा दी थी और कई स्तरों पर कार्रवाई शुरू की गई थी। इसी जांच के तहत 14 मई को पुलिस की एक टीम विधायक के आवास पर पहुंची थी। लेकिन उस समय दिलीप मंडल अपने घर पर मौजूद नहीं मिले। पुलिस के पहुंचने की सूचना पहले ही मिल जाने के कारण उनके वहां से चले जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद से ही विधायक के फरार होने की स्थिति बनी रही और पुलिस लगातार उनके संभावित ठिकानों पर दबिश देती रही। कई जगहों पर छापेमारी के बावजूद उनका कोई स्पष्ट सुराग नहीं मिल पा रहा था, जिससे जांच टीम की चुनौती और बढ़ गई थी। कुछ दिनों पहले पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को एक अहम सूचना मिली कि दिलीप मंडल ओडिशा के पुरी स्थित एक होटल में छिपे हो सकते हैं। इस इनपुट के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की योजना बनाई। सूचना की पुष्टि के बाद एसटीएफ और डायमंड हार्बर पुलिस की संयुक्त टीम ने होटल में छापेमारी की। वहां मौजूद संदिग्ध व्यक्ति की पहचान दिलीप मंडल के रूप में होने के बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

बेटे समेत 5 को गिरफ्तार कर चुकी पुलिस

17 मई को पश्चिम बंगाल पुलिस ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए विधायक Dilip Mondal के बेटे अर्घ्य मंडल सहित कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई। डायमंड हार्बर जिला पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, अर्घ्य मंडल को हथियारों के साथ पकड़ा गया था। पुलिस का दावा है कि वह इलाके में तनाव और अशांति फैलाने की गतिविधियों में शामिल था। पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की संयुक्त टीम ने इस कार्रवाई के लिए पहले से योजना बनाई थी। इसके तहत संदिग्धों की तलाश में व्यापक स्तर पर अभियान चलाया गया और कई संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई। इस संयुक्त ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने अर्घ्य मंडल समेत अन्य चार लोगों को बंगाल की खाड़ी के पास स्थित बक्खाली-फ्रेजरगंज इलाके से गिरफ्तार किया। बताया जा रहा है कि ये सभी लोग पुलिस की निगरानी में थे और उनकी गतिविधियों पर लंबे समय से नजर रखी जा रही थी। गिरफ्तारी के बाद सभी आरोपियों को आगे की पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया के लिए हिरासत में लिया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और अन्य संभावित कड़ियों की भी तलाश की जा रही है।

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