Sonam Wangchuk ने लोकसभा में एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पारित होने पर संतोष जताया है। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं में पारदर्शिता और व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, उन्होंने सरकार से अपील की कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार का दायरा केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं रहना चाहिए। वांगचुक ने कहा कि देश की शिक्षा प्रणाली में व्यापक स्तर पर सुधार की जरूरत है। उनके मुताबिक, परीक्षा प्रक्रिया को बेहतर बनाने के साथ-साथ छात्रों के बीच व्यवस्था और सरकार को लेकर भरोसा भी मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे होने वाले सुधारों में विद्यार्थियों की समस्याओं को भी प्राथमिकता दी जाएगी। नीट पेपर लीक के मुद्दे को लेकर वांगचुक ने दिल्ली में लंबे समय तक आंदोलन किया था। उन्होंने 26 दिनों तक अनशन किया और इस दौरान परीक्षा व्यवस्था में सुधार समेत छात्रों से जुड़े कई मुद्दे उठाए। बाद में सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से मिले आश्वासनों के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया था। अब विधेयक के लोकसभा से पारित होने के बाद वांगचुक ने सरकार को उस लिखित समझौते की भी याद दिलाई है, जिसके तहत प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने की बात कही गई थी। उन्होंने अपील की कि सरकार अपने आश्वासन पर कायम रहे और छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की दिशा में कदम उठाए। वांगचुक का कहना है कि छात्रों के बीच भरोसा बहाल करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि युवा देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनके मन में व्यवस्था को लेकर विश्वास कायम होना चाहिए। इसी उद्देश्य से उन्होंने सरकार से आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की अपील की। वहीं, दिल्ली से लद्दाख लौटते समय सोनम वांगचुक ने दिल्ली-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस में सफर किया। यात्रा के दौरान उन्होंने भारतीय रेलवे की सुविधाओं और इंजीनियरिंग उपलब्धियों की सराहना की। चिनाब ब्रिज को देखकर उन्होंने इसे देश के लिए गर्व का विषय बताया। एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक में परीक्षा से जुड़े अनुचित साधनों पर रोक लगाने के लिए सख्त प्रावधान किए गए हैं। सरकार की ओर से परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। विधेयक में दोषियों के खिलाफ कड़ी सजा और आर्थिक दंड का प्रावधान किए जाने की बात कही गई है। वांगचुक ने संसद में हुई चर्चा और विधेयक के पारित होने को सकारात्मक कदम बताया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि असली बदलाव तभी दिखाई देगा जब नए नियमों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा और परीक्षा व्यवस्था में लगातार सुधार किए जाएंगे। अब उनकी नजर सरकार की ओर से किए गए अन्य आश्वासनों पर भी है। छात्रों से जुड़े मामलों को वापस लेने और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की दिशा में आगे की कार्रवाई को लेकर आने वाले समय में सरकार के कदम महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की अपील
सोनम वांगचुक ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर संसद में विधेयक लाए जाने का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी समस्याओं पर रोक लगाने के लिए उठाए जा रहे कदम जरूरी हैं और इससे छात्रों के बीच परीक्षा प्रणाली को लेकर भरोसा मजबूत करने में मदद मिल सकती है। वांगचुक ने केंद्र सरकार से आंदोलन के दौरान किए गए लिखित समझौते को लागू करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने को लेकर जो आश्वासन दिया गया था, सरकार को उस पर कायम रहना चाहिए। उन्होंने अपने संदेश में छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की भी मांग उठाई। वांगचुक के मुताबिक, युवाओं के बीच व्यवस्था को लेकर विश्वास बहाल करना जरूरी है। उनका कहना है कि छात्रों को अपनी पढ़ाई और भविष्य पर ध्यान देने का अवसर मिलना चाहिए। सोनम वांगचुक ने कहा कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों का समाधान केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के साथ-साथ शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की दिशा में भी लगातार काम किया जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लेगी और पहले दिए गए आश्वासनों को पूरा करेगी। वांगचुक का कहना है कि छात्रों और सरकार के बीच भरोसा मजबूत होने से शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक माहौल तैयार किया जा सकता है। वांगचुक ने यह भी कहा कि देश की युवा पीढ़ी राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में छात्रों की समस्याओं और उनकी मांगों पर संवाद के जरिए समाधान निकालना जरूरी है, ताकि वे बिना किसी चिंता के अपनी शिक्षा और भविष्य पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

वंदे भारत और चिनाब ब्रिज देखकर महसूस हुआ गर्व
दिल्ली में आंदोलन के बाद लद्दाख लौट रहे सोनम वांगचुक ने दिल्ली-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस में सफर किया। इस यात्रा के दौरान उन्होंने ट्रेन की सुविधाओं और सफर के अनुभव को लेकर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। वांगचुक ने यात्रा के दौरान भारतीय रेलवे की उपलब्धियों की भी सराहना की। सफर के दौरान चिनाब ब्रिज का नजारा देखकर सोनम वांगचुक काफी प्रभावित नजर आए। दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल के रूप में पहचान रखने वाला यह पुल इंजीनियरिंग और निर्माण क्षमता का एक बड़ा उदाहरण माना जाता है। उन्होंने पुल को देखकर भारतीय इंजीनियरिंग की उपलब्धि की प्रशंसा की। वांगचुक ने कहा कि चिनाब ब्रिज को देखकर उन्हें गर्व महसूस हुआ। उन्होंने भारतीय रेलवे के इंजीनियरों और इससे जुड़े लोगों की मेहनत की सराहना करते हुए इसे देश की तकनीकी क्षमता का शानदार उदाहरण बताया। उनके मुताबिक, ऐसी उपलब्धियां देश के लिए गौरव का विषय हैं। दिल्ली-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस के शुरू होने से रेल यात्रा के क्षेत्र में भी एक नई कड़ी जुड़ी है। यह सेवा दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के बीच यात्रियों के सफर को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वांगचुक ने इसी ट्रेन से यात्रा करते हुए रास्ते में आने वाले प्राकृतिक और तकनीकी दोनों पहलुओं को करीब से देखा। सोनम वांगचुक की इस यात्रा का अनुभव ऐसे समय सामने आया है, जब वह दिल्ली में शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन के बाद लद्दाख लौट रहे हैं। यात्रा के दौरान चिनाब ब्रिज की प्रशंसा करते हुए उनका संदेश देश की इंजीनियरिंग उपलब्धियों और तकनीकी प्रगति की ओर भी ध्यान खींचता है।
10 साल की सजा और ₹10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान
लोकसभा में ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026’ पारित होने के बाद सोनम वांगचुक ने इसे परीक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कानून जरूरी है, ताकि विद्यार्थियों को निष्पक्ष माहौल मिल सके। प्रस्तावित कानून में परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों और पेपर लीक के मामलों में सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। इसके तहत दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान बताया गया है। मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों की व्यवस्था का भी प्रस्ताव रखा गया है। सोनम वांगचुक ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि संसद में परीक्षा सुधार से जुड़ा विधेयक लाया जाना स्वागत योग्य है। हालांकि, उन्होंने सरकार से यह भी अपील की कि आंदोलन के दौरान बातचीत के बाद दिए गए अन्य आश्वासनों को भी लागू किया जाए। उनके मुताबिक, छात्रों के बीच भरोसा कायम करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। वांगचुक ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ शिक्षा के पूरे क्षेत्र में सुधार की जरूरत है। उन्होंने स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और युवाओं के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों पर भी ध्यान देने की बात कही। उन्होंने उम्मीद जताई कि नए कानून के जरिए परीक्षा प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी बनाया जा सकेगा। साथ ही, उन्होंने जोर दिया कि कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ ऐसी व्यवस्था तैयार करनी होगी, जिसमें विद्यार्थियों को अपनी मेहनत के आधार पर आगे बढ़ने का समान अवसर मिले। यह विधेयक लोकसभा से पारित हो चुका है और इसे राज्यसभा में पेश किया जाना बाकी है। राज्यसभा में इसकी आगे की प्रक्रिया के बाद ही इसके अगले चरण की तस्वीर साफ होगी। वहीं, वांगचुक के बयान के बाद परीक्षा सुधार के साथ शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव और छात्रों से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी चर्चा तेज होने की उम्मीद है।
नीट पेपर लीक के मुद्दे को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के दौरान सोनम वांगचुक ने छात्रों की मांगों के समर्थन में लंबा अनशन किया था। आंदोलन के बीच सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत हुई, जिसके बाद मिले आश्वासनों के आधार पर वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया था। अब लद्दाख लौटते समय सोनम वांगचुक ने अपने आंदोलन और आगे की उम्मीदों को लेकर बात रखी है। उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ-साथ सरकार को छात्रों और युवाओं से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी गंभीरता से काम करना चाहिए। उनके मुताबिक, शिक्षा व्यवस्था में भरोसा कायम करना जरूरी है। वांगचुक ने सरकार से आंदोलन के दौरान दिए गए लिखित आश्वासनों को लागू करने की अपील की है। उनका कहना है कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों पर भी सरकार को सकारात्मक रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों के बीच विश्वास बहाल करने से उन्हें अपनी पढ़ाई और भविष्य पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा देना जरूरी है। वांगचुक के मुताबिक, छात्रों और युवाओं को लेकर सरकार की ओर से सकारात्मक कदम उठाए जाने से देश में भरोसे का माहौल मजबूत हो सकता है और युवा अपनी क्षमता का इस्तेमाल राष्ट्र निर्माण में कर सकेंगे। दिल्ली से लद्दाख लौटने के दौरान वांगचुक ने दिल्ली-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस में भी यात्रा की। सफर के दौरान उन्होंने चिनाब ब्रिज को देखा और भारतीय रेलवे की इंजीनियरिंग उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने चिनाब ब्रिज को देश की तकनीकी क्षमता और मेहनत का उदाहरण बताते हुए इसे गर्व का विषय बताया। वहीं, एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक के लोकसभा से पारित होने के बाद परीक्षा सुधार को लेकर चर्चा आगे बढ़ी है। अब इसकी संसदीय प्रक्रिया के अगले चरण पर नजर है। साथ ही, सोनम वांगचुक की अपील के बाद आंदोलन के दौरान दिए गए आश्वासनों और प्रदर्शनकारी छात्रों से जुड़े मामलों को लेकर भी सरकार के अगले कदम महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।










