Kanpur स्थित नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट (एनएसआई) में बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। आरोप है कि संस्थान परिसर में सैकड़ों पेड़ों को बिना उचित अनुमति के काट दिया गया, जिसके बाद वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। वन विभाग की शिकायत पर संस्थान की निदेशक समेत कई अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में पेड़ों की कटाई के पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। संस्थान को पहले सीमित संख्या में पेड़ों की कटाई की अनुमति मिली थी। लेकिन जांच के दौरान यह सामने आया कि परिसर में स्वीकृत संख्या से कहीं अधिक पेड़ काटे गए। इसी वजह से मामला वन संरक्षण नियमों के उल्लंघन से जुड़ा गंभीर विषय बन गया है। वन विभाग की टीम ने निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर कटे हुए पेड़ों के अवशेष, ठूंठ और अन्य निशान देखे। अधिकारियों का मानना है कि पेड़ों की कटाई एक लंबे समय से जारी थी और इसके लिए भारी मशीनों का भी इस्तेमाल किया गया हो सकता है। कटे हुए पेड़ों में कई महत्वपूर्ण प्रजातियां शामिल बताई जा रही हैं, जो पर्यावरण और हरित संतुलन के लिए अहम मानी जाती हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर पेड़ों की कटाई स्थानीय जैव विविधता और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। वन विभाग और पुलिस संयुक्त रूप से पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि पेड़ों की कटाई किसके निर्देश पर हुई और इसमें किन लोगों की भूमिका रही। जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
पूरे मामले को लेकर क्या बोले अधिकारी?
कानपुर के वन अधिकारी संजय कुमार पांडे ने कहा है कि हमें पेड़ काटने की शिकायत प्राप्त हुई थी। इन व्यक्तियों ने 2025 में नौ वृक्षों की कटाई के लिए अनुमति मांगी थी। जब हम जांच करने गए, तो पहले हमें प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। फिर से अधिकारियों के साथ निरीक्षण करने गए। जांच में 700 से अधिक वृक्षों के काटे जाने के प्रमाण मिले। हमने रिपोर्ट पेश कर दी है। हम भी अपनी तरफ से जांच कर रहे हैं। इस मामले में एसीपी आशुतोष कुमार के अनुसार, वन विभाग के अधिकारी संजय कुमार पांडे ने एक रिपोर्ट दायर की है, जिसमें नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट में वृक्षों के काटने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में रिपोर्ट कर के जांच की जा रही है। इस प्रकरण में संस्थान का दृष्टिकोण जानने के लिए टीम नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट गई, लेकिन उन्हें अंदर प्रवेश करने से रोक दिया गया। कानपुर में स्थित राष्ट्रीय शक्कर संस्थान (एनएसआई) में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई का मामला उजागर होने के बाद प्रशासनिक और पर्यावरणीय क्षेत्रों में हलचल मच गई है। आरोप है कि संस्थान के परिसर में सैकड़ों पेड़ों को बिना वैध अनुमति के काटा गया, जिसके बाद वन विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू की। वन विभाग की शिकायत के आधार पर कई जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मामले में संस्थान की निदेशक सहित कई कर्मचारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गहन जांच चल रही है और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
संस्थान ने पहले केवल एक सीमित संख्य में पेड़ों की कटाई की अनुमति मांगी थी। लेकिन जांच के दौरान यह पता चला कि परिसर में स्वीकृत संख्या से कहीं अधिक पेड़ काटे गए हैं। यही वजह है कि इसे गंभीर पर्यावरणीय उल्लंघन माना जा रहा है। वन विभाग को इस मामले की जानकारी कर्मचारियों और स्थानीय सूत्रों की शिकायतों के आधार पर मिली। शिकायत प्राप्त होने के बाद विभागीय टीम ने स्थल का निरीक्षण करने की योजना बनाई। प्रारंभिक जांच में कई ऐसे संकेत मिले जिससे बड़े पैमाने पर कटाई की संभावना बढ़ी। पहली बार निरीक्षण के लिए पहुंची टीम को परिसर में अंदर आने की अनुमति नहीं मिली। बाद में उच्च अधिकारियों की मौजूदगी में दोबारा निरीक्षण किया गया, जहां कटे हुए पेड़ों के अवशेष और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य प्राप्त हुए। इससे जांच को नई दिशा मिली। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि परिसर के विभिन्न हिस्सों में कई पेड़ों के ठूंठ मौजूद थे। विशेषज्ञों के अनुसार इनमें से कई पेड़ों की कटाई कई महीने पहले हुई थी। इसके अतिरिक्त कुछ स्थानों पर भारी मशीनों के प्रयोग के भी संकेत मिले हैं। कटाई में शामिल पेड़ों में कई महत्वपूर्ण और पर्यावरण की दृष्टि से फायदेमंद प्रजातियां बताई जा रही हैं। इन पेड़ों की संख्या और उम्र को लेकर पर्यावरण विशेषज्ञों ने चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि इस तरह के बड़े पैमाने पर हरित आवरण के नुकसान से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
वन विभाग अब यह जानने की कोशिश कर रहा है कि पेड़ों की कटाई किसके आदेश पर हुई और क्या सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था। इसके साथ ही लकड़ी के उपयोग और उसके परिवहन से जुड़े मुद्दों की जांच भी चल रही है। पुलिस और वन विभाग की संयुक्त जांच में दस्तावेजों, अनुमति पत्रों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की जा रही है। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन पाए जाने की स्थिति में संबंधित व्यक्तियों पर पर्यावरण संरक्षण कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई हो सकती है। यह मामला कानपुर में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। पर्यावरण संरक्षण से संबंधित संगठन भी घटनाक्रम पर ध्यान रखे हुए हैं। कई महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई गई है।