भारत की रक्षा क्षमता को और मजबूती देते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (LRGR-120) का पहला उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) में किया गया।परीक्षण के दौरान रॉकेट को उसकी पूरी 120 किलोमीटर की अधिकतम रेंज तक दागा गया। उड़ान के दौरान LRGR-120 ने सभी तय मैन्यूवर और तकनीकी प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक पूरी कीं और अंत में बेहद सटीकता के साथ लक्ष्य को भेदने में कामयाब रहा।
इन-सर्विस पिनाका लॉन्चर से हुआ परीक्षण
DRDO के अनुसार, LRGR-120 को भारतीय सेना में पहले से तैनात पिनाका लॉन्चर से लॉन्च किया गया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि एक ही लॉन्चर से पिनाका के विभिन्न रेंज वाले वेरिएंट को दागा जा सकता है, जो सिस्टम की बहुमुखी क्षमता को दर्शाता है।
DRDO अध्यक्ष ने देखा परीक्षण
रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने स्वयं इस परीक्षण को देखा और मिशन के सफल रहने पर सभी वैज्ञानिकों और टीमों को बधाई दी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया ‘गेम चेंजर’
रक्षा मंत्रालय ने अपने आधिकारिक X (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से जानकारी साझा करते हुए बताया कि
पिनाका LRGR-120 का पहला उड़ान परीक्षण पूरी तरह सफल रहा।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO और सभी स्टेकहोल्डर्स को बधाई देते हुए इस उपलब्धि को गेम चेंजर बताया। उन्होंने कहा कि लंबी दूरी के निर्देशित रॉकेट का सफल विकास भारतीय सशस्त्र बलों की मारक क्षमता और रणनीतिक ताकत को और बढ़ाएगा।
पिनाका रॉकेट सिस्टम: अब तक का सफर
कारगिल युद्ध के बाद पिनाका MBRL सिस्टम भारतीय सेना में शामिल किया गया।पिनाका Mk-I की मारक की शुरूआती क्षमता सिर्फ 40 किमी थी और बाद में इसकी रेंज बढ़ाकर 75–90 किमी तक की गई।आगामी पिनाका Mk-III (LRGR-120) 120 किमी की क्षमता रखता है।पूरी तरह स्वदेशी पिनाका रॉकेट सिस्टम ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का मजबूत उदाहरण है और भारतीय रक्षा उद्योग की बड़ी भागीदारी को दर्शाता है।
120 किलोमीटर मारक क्षमता वाले पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का सफल परीक्षण भारत की रक्षा तकनीक में एक बड़ी उपलब्धि है। उच्च सटीकता, आधुनिक गाइडेंस सिस्टम और स्वदेशी निर्माण के कारण यह भविष्य के युद्ध परिदृश्य में भारतीय सेना का एक महत्वपूर्ण और निर्णायक हथियार साबित होगा।










