डेरा सच्चा सौदा प्रमुख Gurmeet Ram Rahim Singh 40 दिन की पैरोल पूरी करने के बाद एक बार फिर हरियाणा के रोहतक स्थित Sunaria Jail लौट गए। रविवार शाम करीब पांच बजे कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच वह जेल परिसर पहुंचे…उन्हें 5 जनवरी 2026 को 40 दिन की पैरोल दी गई थी। वर्ष 2017 में दोषी ठहराए जाने के बाद यह 15वीं बार है जब उन्हें जेल से बाहर आने की अनुमति मिली।
सिरसा मुख्यालय में बिताया पूरा समय
इस बार की पैरोल अवधि के दौरान वह हरियाणा के सिरसा स्थित Dera Sacha Sauda मुख्यालय में ही रहे। पैरोल मंजूर होने के बाद 5 जनवरी को वह सीधे सिरसा पहुंचे और वहीं सीमित सार्वजनिक गतिविधियों में नजर आए।
सुरक्षा व्यवस्था इस दौरान कड़ी रखी गई थी। उनके जेल लौटने के साथ ही पैरोल और फर्लो को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।
किन मामलों में सजा काट रहे हैं?
Gurmeet Ram Rahim Singh 2017 से दो साध्वियों से दुष्कर्म और पत्रकार Ram Chander Chhatrapati की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
दोषी ठहराए जाने के बाद से वह नियमित रूप से जेल में हैं, हालांकि बीच-बीच में उन्हें पैरोल और फर्लो मिलती रही है।

चुनावी समय में भी मिलती रही राहत
पिछले कुछ वर्षों में कई मौकों पर उन्हें राहत मिली है:
अगस्त 2025 – 40 दिन की पैरोल
अप्रैल 2025 – 21 दिन की फर्लो
जनवरी 2025 – 30 दिन की पैरोल
फरवरी 2025 – दिल्ली चुनाव से पहले 30 दिन की राहत
1 अक्टूबर 2024 – हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले 20 दिन की पैरोल
अगस्त 2024 – 21 दिन की फर्लो
फरवरी 2022 – पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले तीन सप्ताह की फर्लो
इन तारीखों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा होती रही है, क्योंकि कई बार राहत ऐसे समय पर दी गई जब चुनावी माहौल था।
उठते रहे सवाल
बार-बार पैरोल और फर्लो दिए जाने को लेकर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि दुष्कर्म और हत्या जैसे गंभीर मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे व्यक्ति को इतनी बार राहत मिलना न्याय व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
वहीं समर्थकों का तर्क है कि पैरोल और फर्लो कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा हैं और नियमों के तहत ही दी जाती हैं। प्रशासन का भी कहना है कि सभी प्रक्रियाएं कानून के अनुसार पूरी की गई हैं।
डेरे का प्रभाव
Dera Sacha Sauda के हरियाणा, पंजाब और राजस्थान समेत कई राज्यों में बड़ी संख्या में अनुयायी हैं। हरियाणा के सिरसा, फतेहाबाद, कुरुक्षेत्र, कैथल और हिसार जैसे जिलों में संगठन की मजबूत पकड़ मानी जाती है।
जब भी Gurmeet Ram Rahim Singh को पैरोल मिलती है, बड़ी संख्या में अनुयायी सक्रिय हो जाते हैं और डेरे में हलचल बढ़ जाती है।
आगे क्या?
फिलहाल वह दोबारा जेल में हैं और अपनी सजा काट रहे हैं। लेकिन पैरोल और फर्लो को लेकर बहस जारी है। भविष्य में उन्हें फिर कब और कितनी अवधि के लिए राहत मिलेगी, यह प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
यह मामला न्याय, राजनीति और प्रशासनिक निर्णयों के बीच संतुलन को लेकर आगे भी चर्चा का विषय बना रहेगा।









