दक्षिण अफ्रीका में पहली बार आयोजित हो रहे G20 समिट में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंच गए हैं, जहां उनका स्वागत दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने किया। यह सम्मेलन इस बार गरीब और जलवायु-प्रभावित देशों के हितों पर केंद्रित है। हालांकि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की मौजूदगी के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं। सम्मेलन से पहले ही ट्रंप द्वारा दक्षिण अफ्रीकी सरकार पर “एंटी-व्हाइट नीति” के आरोप लगाए जाने के बाद अमेरिका के बहिष्कार ने माहौल को विवादित बना दिया है।
शिखर बैठक की शुरुआत में दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति ने कहा कि अफ्रीकी धरती पर इस आयोजन को होना ऐतिहासिक है और देश अपनी जिम्मेदारियां पूरी तरह निभाएगा। उन्होंने एकजुटता, समानता और सतत विकास को सम्मेलन की प्राथमिकता बताया। वहीं बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात की, जिसमें दोनों नेताओं ने आपसी सहयोग, व्यापार और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की।
इन मुद्दों पर होगी चर्चा
इस बार सम्मेलन में मुख्य रूप से ये विषय अहम हैं:
- गरीब और जलवायु-प्रभावित देशों के लिए सहायता
- विदेशी कर्ज में राहत
- हरित ऊर्जा और प्रौद्योगिकी सहयोग
- वैश्विक असमानता से निपटने के समाधान

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने भी दक्षिण अफ्रीका के रुख का समर्थन किया और कहा कि विकसित देशों को जलवायु संकट में संघर्ष कर रहे देशों की मदद करनी ही होगी।
फ्रांस ने ट्रंप की अनुपस्थिति पर जताया अफसोस
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि ट्रंप का सम्मेलन में शामिल न होना दुखद है, लेकिन इससे वैश्विक समस्याओं पर काम रुकना नहीं चाहिए। वर्तमान समय में नेताओं की एकजुटता बेहद ज़रूरी है।
घोषणापत्र पर सहमति सबसे बड़ी चुनौती
जी20 में निर्णय आमतौर पर सर्वसम्मति से लिए जाते हैं। लेकिन अमेरिका और दक्षिण अफ्रीका के बीच कूटनीतिक तनाव के कारण शिखर सम्मेलन का अंतिम संयुक्त घोषणापत्र बन पाना चुनौती है। दक्षिण अफ्रीका ने साफ कहा है कि वह दबाव में नहीं आएगा और घोषणा तभी जारी होगी जब सभी सदस्य देश सहमत होंगे।
अगले वर्ष अध्यक्षता अमेरिका के पास
सम्मेलन के अंत में जी20 की अगली अध्यक्षता दक्षिण अफ्रीका से अमेरिका को सौंपी जाएगी। लेकिन अमेरिका के पिछले रुख को देखते हुए आशंका है कि अगले वर्ष समूह की प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव आ सकता है। व्हाइट हाउस ने समारोह में सिर्फ एक दूतावास अधिकारी भेजने की घोषणा की है, जिसे दक्षिण अफ्रीका ने “अपमानजनक” बताया है।
अफ्रीका में हो रहा पहला G20 सम्मेलन राजनीतिक तनावों के बीच एक महत्वपूर्ण मोड़ बन गया है। अब सबकी नज़रें इस बात पर हैं कि क्या सदस्य देश मतभेदों के बावजूद एक संयुक्त घोषणापत्र पर समझौता कर पाएंगे या नहीं।
भारत का फोकस
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि भारत इस समिट में अपनी दृष्टि “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” (One Earth, One Family, One Future) के अनुरूप रखेगा।
वे इस शिखर सम्मेलन के सभी तीन सत्रों में हिस्सा लेंगे और भारत की प्राथमिकताएं प्रस्तुत करेंगे









