लाल किले के पास हुए भीषण कार ब्लास्ट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को बड़ी राहत देते हुए दिल्ली की माननीय पटियाला हाउस कोर्ट ने शनिवार को चार प्रमुख आरोपियों की हिरासत अवधि 10 दिन और बढ़ा दी। अदालत ने NIA की दलीलें सुनने के बाद माना कि मामले की गंभीरता, राष्ट्रीय सुरक्षा और इंटरस्टेट टेरर मॉड्यूल की गहन जांच के लिए एजेंसी को अतिरिक्त समय की आवश्यकता है।माननीय कोर्ट ने चार आरोपियों को दोबारा NIA कस्टडी में भेजा है।माननीय अदालत ने डॉ. मुजम्मिल शकील (पुलवामा, जम्मू-कश्मीर),डॉ. अदील अहमद राथेर (अनंतनाग, जम्मू-कश्मीर),डॉ. शाहीन सईद (लखनऊ),मुफ़्ती इरफान अहमद वागे (शोपियां, जम्मू-कश्मीर) की हिरासत को बढ़ाया गया है।ये सभी आरोपी आज सुबह कड़ी सुरक्षा के बीच माननीय पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किए गए, जहां मजिस्ट्रेट ने 10 दिन की अतिरिक्त NIA कस्टडी का आदेश दिया। आदेश के बाद चारों को सीधे NIA मुख्यालय ले जाया गया, जहाँ उनसे आगे की पूछताछ जारी रहेगी।

10 नवंबर की शाम 6:52 बजे लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास i20 कार में विस्फोट हुआ था। यह इलाका हमेशा भीड़भाड़ वाला रहता है और विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि कई शव और गाड़ियाँ क्षत-विक्षत हालत में बिखर गए।इस हमले में अब तक 13 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है औऱ दर्जनों लोग घायल हुए, जिनमें कई की हालत अभी भी नाजुक है।ब्लास्ट के बाद सुरक्षा एजेंसियों को हाई-अलर्ट मोड पर हैं।जांच के शुरुआती चरण में ही NIA को शक हुआ कि यह हमला किसी सामान्य रैडिकल मॉड्यूल का काम नहीं, बल्कि एक अत्यंत सोफिस्टिकेटेड ‘व्हाइट-कॉलर’ टेरर नेटवर्क द्वारा योजनाबद्ध था।
जांच के दौरान कई राज्यों में छापेमारी हुई और कुल सात लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इनमें आमिर राशिद अली ब्लास्ट में इस्तेमाल कार का मालिक,जसीर बिलाल वानी जिसने तकनीकी मदद की थी और सोयब जिसने आरोपी उमर को पनाह और लॉजिस्टिक सपोर्ट दिया था।NIA का दावा है कि गिरफ्तार किए गए कई आरोपी पढ़े-लिखे, सफेदपोश (white-collar) थे, जो सामान्य जीवन जीते हुए आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे थे।

सूत्रों के अनुसार, अल-फलाह विश्वविद्यालय से जुड़ी पूर्व डॉक्टर डॉ. शाहीन सईद ने NIA के सामने बड़ा खुलासा किया है। पूछताछ के दौरान शाहीन ने माना कि उसका मुख्य मिशन भारत में आतंक फैलाने के लिए एक नया मॉड्यूल तैयार करना था।वह फरीदाबाद से संचालित व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल का सक्रिय हिस्सा थी।मॉड्यूल का उद्देश्य युवा, पढ़े-लिखे प्रोफेशनल्स को ‘क्लीन इमेज’ के साथ आतंकवादी गतिविधियों में शामिल करना था।NIA ने शाहीन के बयान को मामले की जांच में एक महत्वपूर्ण ब्रेकथ्रू बताया है।जांच अधिकारियों ने बताया कि लाल किला ब्लास्ट एक इंटरस्टेट टेरर सिंडिकेट का हिस्सा था, जिसकी शाखाएँ जम्मू-कश्मीर,उत्तर प्रदेश व हरियाणा और दिल्ली में सक्रिय थीं।जांच में यह भी सामने आया कि कई गिरफ्तारियाँ धमाके से कुछ दिन पहले ही हो गई थीं। फिर भी, मॉड्यूल के बचा हुआ हिस्सा ब्लास्ट को अंजाम देने में सफल हो गया, जिससे एजेंसियों को फिर से सुराग जोड़ने पड़े।चारों आरोपियों की पेशी के दौरान माननीय पटियाला हाउस कोर्ट परिसर में दिल्ली पुलिस की विशेष इकाइयां,क्विक रिएक्शन टीमें (QRT) व CRPF जवान और स्नाइपर और डॉग स्क्वाड की टीमें तैनात की गई थे। अदालत के बाहर किसी भी तरह की भीड़ या मीडिया को इकट्ठा होने की अनुमति नहीं थी।










