जहरीले कफ सिरप कोल्ड्रिफ से बच्चों की मौत के मामले में पुलिस ने एक और बड़ा कदम उठाया है। रविवार को परासिया पुलिस ने सन फार्मा कंपनी के मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (MR) सतीश वर्मा को उसके घर से गिरफ्तार किया। आरोप है कि वर्मा ने डॉक्टरों को कमीशन देकर कंपनी की दवाइयां मरीजों को लिखवाने के लिए दबाव डाला।इस गिरफ्तारी से यह स्पष्ट हो गया है कि जांच सिर्फ कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि सप्लाई चैन, डॉक्टरों की कमीशन डीलिंग और वितरण नेटवर्क तक विस्तारित हो चुकी है।विशेष जांच टीम (SIT) अब पूरे कमीशन नेटवर्क की गहन जांच कर रही है। टीम यह पता लगाएगी कि किन डॉक्टरों को कमीशन दिया गया, दवाइयों की सप्लाई कैसे हुई, और कंपनी ने जहरीली दवाइयों को बाजार में कैसे पहुंचाया।पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच में कुछ प्रमुख निजी डॉक्टरों और मेडिकल एजेंसियों के नाम सामने आने की संभावना है। SIT हर कड़ी को जोड़ने में जुटी है और MR की गिरफ्तारी से अब जांच का दायरा और विस्तृत हो गया है।

पहले भी हुई हैं गिरफ्तारियां
इस मामले में पहले से ही चार बड़ी गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।डॉक्टर प्रवीण सोनी की 6 अक्टूबर मेडिकल स्टोर संचालक सौरभ जैन और राजेश सोनी को 14 अक्टूबर,कंपनी की केमिकल एनालिस्ट के. माहेश्वरी को 18 अक्टूबर और कंपनी के मालिक रंगनाथ को चेन्नई से गिरफ्तार किया था।अब MR सतीश वर्मा की गिरफ्तारी के बाद SIT को कमीशन नेटवर्क और सप्लाई चैन की पूरी जानकारी मिलने की उम्मीद है।जांच टीम ने वर्मा से यह पता लगाने की कोशिश की कि वह कंपनी की दवाइयों की मार्केटिंग कैसे करता था और किन-किन निजी डॉक्टरों को दवाएं लिखने के लिए संपर्क करता था।SIT यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि डॉक्टरों को कमीशन या किसी अन्य लाभ का लालच दिया गया था या नहीं। अधिकारी मानते हैं कि पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
कोल्ड्रिफ कफ सिरप में जहरीला केमिकल
कोल्ड्रिफ कफ सिरप खांसी और सर्दी-जुकाम में इस्तेमाल होने वाली दवा है। लेकिन जांच में पाया गया कि इसमें डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) नामक जहरीला केमिकल था। नियम के अनुसार इसकी मात्रा 0.1% से अधिक नहीं होनी चाहिए थी, लेकिन सिरप में यह 48.6% तक पाई गई।इस जहरीले सिरप के सेवन से छिंदवाड़ा और राजस्थान में अब तक 24 से ज्यादा मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है। डॉक्टरों के अनुसार, इन मौतों का मुख्य कारण किडनी फेल्योर था।

तमिलनाडु सरकार ने कंपनी के मालिक को गिरफ्तार कर आपराधिक मामला दर्ज किया।स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को किसी भी ब्रांड के कफ सिरप न दिया जाए।मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में खांसी के लिए प्राकृतिक उपचार जैसे भाप लेना और तरल पदार्थ देना अधिक सुरक्षित है।
MR सतीश वर्मा की गिरफ्तारी के बाद SIT को कंपनी और डॉक्टरों के बीच आर्थिक लेनदेन की फाइलें और मार्केटिंग दस्तावेज़ मिले हैं। जांच पूरी होने के बाद अगले चरण की गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की संभावना है।पुलिस का कहना है कि अब यह स्पष्ट होगा कि कमीशन की लालच में किन डॉक्टरों ने मरीजों को जहरीली दवाइयां लिखीं और किन चैनलों के माध्यम से ये दवाइयां बाजार में पहुंचीं।









