Confederation of Indian Industry (CII Summit 2026) में मिडिल ईस्ट संकट के बढ़ते असर पर उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों ने गंभीर चर्चा की। इस मौके पर Gautam Adani ने वैश्विक परिस्थितियों को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा कि आने वाले समय में दुनिया की असली ताकत ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल सुरक्षा पर निर्भर करेगी। गौतम अदाणी ने कहा कि मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वैश्विक सप्लाई चेन कितनी संवेदनशील है। तेल, गैस और लॉजिस्टिक्स से जुड़े बाजारों में अस्थिरता का सीधा असर विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है, और भारत को इससे सीख लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुकी है। भारत को पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा पर भी तेजी से निवेश बढ़ाना होगा, ताकि किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट का प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर कम से कम पड़े।
अदाणी ने अपने संबोधन में डिजिटल सुरक्षा को भी समान रूप से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में डेटा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर उतना ही महत्वपूर्ण है जितना तेल और गैस। साइबर सुरक्षा में किसी भी तरह की कमजोरी राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दशक में वे देश सबसे मजबूत होंगे जो ऊर्जा और डिजिटल दोनों क्षेत्रों में आत्मनिर्भर होंगे। भारत के पास यह अवसर है कि वह इन दोनों क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व हासिल करे, बशर्ते नीतियां सही दिशा में आगे बढ़ें। Confederation of Indian Industry सम्मेलन में मौजूद उद्योग विशेषज्ञों ने भी माना कि वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में भारत को अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करना होगा। खासकर ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करना देश की प्राथमिकता होनी चाहिए। गौतम अदाणी ने निवेशकों और उद्योगपतियों से अपील की कि वे लंबी अवधि की सोच के साथ परियोजनाओं में निवेश करें। उन्होंने कहा कि अल्पकालिक लाभ से अधिक महत्वपूर्ण स्थिर और टिकाऊ विकास है, जो देश को वैश्विक झटकों से सुरक्षित रख सकता है।
उन्होंने सरकार और निजी क्षेत्र के बीच साझेदारी को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, यदि नीति-निर्माण और उद्योग मिलकर काम करें तो ऊर्जा और डिजिटल क्षेत्र में भारत तेजी से आत्मनिर्भर बन सकता है। सम्मेलन के दौरान यह भी चर्चा हुई कि मिडिल ईस्ट संकट के कारण वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। इसका असर भारत जैसे आयातक देशों पर महंगाई और लॉजिस्टिक्स लागत के रूप में देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और डिजिटल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बड़ी संभावनाएं हैं। यदि इन क्षेत्रों में तेजी लाई जाए, तो भारत न केवल घरेलू जरूरतें पूरी कर सकता है, बल्कि वैश्विक बाजार में भी मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि मिडिल ईस्ट जैसे क्षेत्रों में तनाव और बुनियादी ढांचे पर हमले वैश्विक सप्लाई चेन को अस्थिर कर सकते हैं। ऐसे समय में देशों को अपनी ऊर्जा रणनीति और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाना होगा, ताकि किसी भी संकट का असर न्यूनतम हो। सम्मेलन में यह राय भी सामने आई कि आने वाले समय में वे ही देश वैश्विक नेतृत्व करेंगे जो ऊर्जा और तकनीक दोनों क्षेत्रों में मजबूत होंगे। अदाणी के बयान ने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य की अर्थव्यवस्था केवल विकास दर पर नहीं, बल्कि सुरक्षा और स्थिरता पर आधारित होगी।
उन्होंने भारत@100 विजन का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के पास अगले कुछ दशकों में दुनिया की प्रमुख आर्थिक शक्ति बनने का अवसर है। इसके लिए जरूरी है कि इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल टेक्नोलॉजी और ऊर्जा क्षेत्र में तेज गति से निवेश और नवाचार को बढ़ावा दिया जाए। गौतम अदाणी ने अपने विचारों में यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य की ग्रोथ स्ट्रैटेजी केवल पारंपरिक विकास मॉडल पर आधारित नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मजबूत और स्थायी विकास के लिए नई सोच और तकनीकी क्षमता को अपनाना होगा, ताकि देश दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता हासिल कर सके।
Confederation of Indian Industry के Annual Business Summit 2026 में Gautam Adani ने वैश्विक आर्थिक ढांचे में आए बड़े बदलावों पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि अब यह स्पष्ट हो चुका है कि “फ्लैट वर्ल्ड” की पुरानी धारणा पूरी तरह वास्तविक नहीं थी, क्योंकि आज की दुनिया तेजी से बदलकर अधिक “फ्रैक्चर्ड” यानी बंटी हुई व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। गौतम अदाणी ने अपने संबोधन में कहा कि अब सप्लाई चेन केवल आर्थिक दक्षता के आधार पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर डिजाइन की जा रही हैं। ऊर्जा क्षेत्र एक बार फिर वैश्विक रणनीतिक चर्चाओं के केंद्र में आ गया है, जहां देशों के लिए ऊर्जा स्वतंत्रता और सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है। उन्होंने आगे कहा कि सेमीकंडक्टर अब सिर्फ तकनीकी उत्पाद नहीं रहे, बल्कि रणनीतिक शक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। इसी तरह डेटा को भी अब एक राष्ट्रीय संसाधन के रूप में देखा जा रहा है, जबकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का विकास सुरक्षित और नियंत्रित डेटा सेंटर्स के भीतर तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिससे डिजिटल सुरक्षा और संप्रभुता की अहमियत और बढ़ गई है।