Jaipur में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता उस समय चर्चा का विषय बन गई, जब कार्यक्रम के दौरान बार-बार बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भाजपा प्रदेश मुख्यालय में मीडिया को संबोधित कर रहे थे, तभी अचानक हॉल की बिजली चली गई। इस अप्रत्याशित स्थिति ने कुछ देर के लिए कार्यक्रम की व्यवस्था को प्रभावित कर दिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बिजली गुल होने के बावजूद कार्यक्रम को बीच में नहीं रोका गया। अश्विनी वैष्णव ने कम रोशनी में ही अपना संबोधन जारी रखा और सरकार की योजनाओं तथा उपलब्धियों पर अपनी बात रखते रहे। उपस्थित कार्यकर्ताओं और नेताओं ने भी कार्यक्रम को सुचारु रूप से चलाने का प्रयास किया। बिजली कटौती के दौरान एक दिलचस्प दृश्य भी देखने को मिला। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने अपने मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर रोशनी की व्यवस्था की, जिससे मंच पर बैठे नेताओं को कुछ राहत मिल सके। यह दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। कार्यक्रम में मौजूद पत्रकारों और अन्य लोगों ने भी स्थिति के बावजूद पूरे संबोधन को ध्यानपूर्वक सुना। कुछ समय बाद बिजली आपूर्ति बहाल हुई, लेकिन तब तक प्रेस कॉन्फ्रेंस का बड़ा हिस्सा मोबाइल टॉर्च और सीमित रोशनी के बीच ही संपन्न हो चुका था। इस घटना के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। विपक्षी नेताओं ने इसे लेकर सरकार पर निशाना साधा, जबकि भाजपा नेताओं ने इसे तकनीकी समस्या बताते हुए सामान्य घटना करार दिया। फिलहाल, प्रेस कॉन्फ्रेंस से ज्यादा चर्चा उस दौरान हुई बिजली कटौती और मोबाइल टॉर्च की रोशनी में चले कार्यक्रम की हो रही है।
कांग्रेस ने कसा तीखा तंज
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुई बिजली कटौती को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इस घटना को सरकार की व्यवस्थाओं से जोड़ते हुए कई सवाल खड़े किए हैं। खासकर कांग्रेस ने इसे लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधने का मौका नहीं छोड़ा और घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य में व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति अब सार्वजनिक रूप से दिखाई देने लगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी उपलब्धियों का प्रचार तो कर रही है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर संतोषजनक जवाब देने में असफल साबित हो रही है। दूसरी ओर, कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोगों के अनुसार बिजली कई बार बाधित हुई, जिससे हॉल में अंधेरा और असुविधा की स्थिति बनी रही। इसके बावजूद केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपना संबोधन जारी रखा और निर्धारित एजेंडे के अनुसार मीडिया को जानकारी देते रहे। उन्होंने पत्रकारों के सवालों का जवाब भी दिया और कार्यक्रम को बीच में नहीं रोका गया। बिजली न होने की स्थिति में मंच पर मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मोबाइल फोन की टॉर्च का सहारा लिया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सहित कई लोग मोबाइल फ्लैशलाइट जलाकर बैठे दिखाई दिए। यह दृश्य कैमरों में कैद हो गया और बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा, जिस पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष इसे सरकार की कार्यप्रणाली से जोड़कर सवाल उठा रहा है, जबकि भाजपा की ओर से इसे तकनीकी समस्या बताया जा रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुई यह अप्रत्याशित बिजली कटौती अब प्रदेश की राजनीति में चर्चा का एक नया विषय बन गई है।

जयपुर में आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है। बिजली कटौती की घटना को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आ रहे हैं। जहां विपक्ष इसे सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाने का अवसर बता रहा है, वहीं भाजपा इसे एक सामान्य तकनीकी बाधा करार दे रही है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के बयान के बाद इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग ले लिया। कांग्रेस नेताओं ने इसे प्रशासनिक लापरवाही और व्यवस्थाओं की कमजोरी से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा। उनका कहना है कि इतने महत्वपूर्ण कार्यक्रम में ऐसी स्थिति उत्पन्न होना कई सवाल खड़े करता है। वहीं भाजपा नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बिजली बाधित होने की घटना पूरी तरह तकनीकी कारणों से हुई थी। पार्टी नेताओं का कहना है कि कार्यक्रम बिना किसी रुकावट के पूरा हुआ और केंद्रीय मंत्री ने सभी महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से अपनी बात रखी। उनके अनुसार एक अस्थायी तकनीकी समस्या को राजनीतिक मुद्दा बनाना उचित नहीं है। इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। मोबाइल टॉर्च की रोशनी में मंच पर बैठे नेताओं की तस्वीरों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। कई यूजर्स ने इस पर मजाकिया टिप्पणियां कीं, जबकि कुछ लोगों ने इसे व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। यह घटना जयपुर की राजनीतिक चर्चाओं का प्रमुख विषय बनी हुई है। आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और बयानबाजी जारी रहने की संभावना है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सरकारी कार्यक्रमों में बुनियादी व्यवस्थाओं और उनकी तैयारी को लेकर बहस छेड़ दी है।