शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में हाईवे निर्माण कार्यों में कथित लापरवाही को लेकर सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने अधीक्षण अभियंता से भी इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा है।
मामला तब उजागर हुआ जब सड़क निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोप लगे। न्यायालय ने इस पर कड़ी टिप्पणी की और सरकार को निर्देश दिया कि वे मामले की तुरंत जांच करें और कोर्ट में रिपोर्ट पेश करें।

हाईकोर्ट ने कहा कि सड़क निर्माण में लापरवाही किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है। यह केवल सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए खतरा नहीं है, बल्कि राज्य की इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है।
कोर्ट ने अधीक्षण अभियंता से पूछा कि किस प्रकार कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित की गई और कार्य में खामी के लिए क्या जिम्मेदारियां तय की गई हैं।अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी हाईवे निर्माण साइटों की समीक्षा करें और कोई भी कमी या मानक उल्लंघन पाए जाने पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करें।
इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे।
सड़क निर्माण में खामियों के असर
सड़क निर्माण में लापरवाही का सीधा असर यात्रियों और आम जनता की सुरक्षा पर पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि खराब निर्माण गुणवत्ता सड़क दुर्घटनाओं, यातायात में रुकावट और दीर्घकालिक आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है।हाईकोर्ट की कार्रवाई इस बात को दर्शाती है कि न्यायपालिका सार्वजनिक सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर गुणवत्ता के प्रति गंभीर है और प्रशासन से जवाबदेही की मांग कर रही है।हिमाचल हाईकोर्ट ने हाईवे निर्माण में लापरवाही को गंभीर मामला मानते हुए सरकार और अधीक्षण अभियंता से जवाब तलब किया है। अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार किस प्रकार सुधारात्मक कार्रवाई करती है और न्यायालय के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करती है।









