सोलन (हिमाचल प्रदेश) | खुब अनुसंधान निदेशालय (डीएमआर), सोलन ने जंगलों में पाई जाने वाली दुर्लभ गुच्छी मशरूम (Morchella) का बीज तैयार करने में सफलता हासिल कर ली है। अब औषधीय गुणों से भरपूर यह मशरूम केवल जंगलों में ही नहीं, बल्कि ग्रीन हाउस में भी उगाई जा सकेगी।
त्रि-राज्यीय ट्रायल
डीएमआर ने इस बीज को देश के तीन राज्यों जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के चयनित उत्पादकों को ट्रायल के तौर पर उपलब्ध कराया है। इन उत्पादकों के साथ एमओयू (MoU) भी किया गया है।
निदेशालय के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में किसानों ने ग्रीन हाउस में गुच्छी की खेती शुरू कर दी है। सफल ट्रायल के बाद उत्पादकों को बीज के साथ उगाने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
बीज और खेती में सफलता
डीएमआर ने वर्ष 2020 से 2024 के बीच ग्रीन हाउस में गुच्छी उगाने में सफलता प्राप्त की थी। पिछले वर्ष किए गए शोध में बंपर फसल मिली थी। इसके बाद आकार और बीज की गुणवत्ता सुधारने के लिए दोबारा शोध किया गया, जिसमें भी सफलता मिली। तैयार गुच्छी की गुणवत्ता प्राकृतिक गुच्छी के समान बताई जा रही है।
डॉ. अनिल कुमार, विशेषज्ञ डीएमआर के अनुसार, प्राकृतिक रूप से गुच्छी करीब 6,500 फीट से अधिक ऊंचाई वाले देवदार और कायल के जंगलों में उगती थी। पहले इसे खेतों में उगाना संभव नहीं था, क्योंकि बीज विकसित नहीं किया जा सका था। लेकिन अब निदेशालय ने इसे तैयार कर लिया है।
गुच्छी के स्वास्थ्य लाभ
गुच्छी में विटामिन D, C, K, आयरन, कॉपर, जिंक और फॉस्फोरस पाए जाते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, इसका सेवन हड्डियों को मजबूत बनाने, मानसिक तनाव कम करने, दिल की सेहत सुधारने और चोटों को जल्दी भरने में सहायक है।
डॉ. बृज लाल अत्री, प्रधान वैज्ञानिक एवं कार्यकारी निदेशक, डीएमआर, सोलन ने बताया:
“गुच्छी के बीज का शोध सफल रहा है। अब इसे ग्रीन हाउस में तैयार किया जा रहा है और कमरे में भी उगाने का शोध जारी है।”
डीएमआर का उद्देश्य है कि यह बीज देशभर में उत्पादकों तक पहुँचाया जाए और औषधीय मशरूम की खेती को बढ़ावा मिले। इससे न केवल किसानों को आर्थिक लाभ होगा, बल्कि स्वास्थ्य और औषधीय उद्योग को भी फायदा मिलेगा।










