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सुप्रीम कोर्ट से अनुराग ठाकुर को बड़ी राहत, बीसीसीआई के कामकाज में फिर से ले सकेंगे हिस्सा

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से जुड़े एक पुराने और अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने जनवरी 2017 में दिए गए अपने आदेश में संशोधन करते हुए बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को बड़ी राहत दी है। अब अनुराग ठाकुर बीसीसीआई के कामकाज और उससे जुड़े मामलों में हिस्सा ले सकेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अनुराग ठाकुर पर लगाए गए प्रतिबंध को अब जारी रखने की जरूरत नहीं है। अदालत ने अनुपातिकता के सिद्धांत (Doctrine of Proportionality) को लागू करते हुए कहा कि समय बीतने के साथ परिस्थितियां बदल चुकी हैं और पहले लगाया गया प्रतिबंध अब उचित नहीं माना जा सकता।

 

जनवरी 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई में सुधारों को लेकर सख्त रुख अपनाया था। उस समय बीसीसीआई के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के को पद से हटा दिया गया था। वजह थी लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू न करना। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को बीसीसीआई के कामकाज से पूरी तरह दूर रहने यानी ‘सीज एंड डिसिस्ट’ का आदेश दिया थासुप्रीम कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि अनुराग ठाकुर ने उस समय अदालत के समक्ष बिना किसी शर्त के माफी मांगी थी। अदालत ने माना कि उनका आचरण बाद के वर्षों में ऐसा नहीं रहा जिससे यह साबित हो कि प्रतिबंध को आगे भी जारी रखा जाए। इसी आधार पर कोर्ट ने पुराने आदेश में संशोधन किया और उन्हें बीसीसीआई से जुड़े मामलों में भाग लेने की अनुमति दे दी।

अनुराग ठाकुर को 22 मई 2016 को बीसीसीआई का अध्यक्ष चुना गया था। यह चुनाव पूर्व अध्यक्ष जगमोहन डालमिया के निधन के बाद हुआ था और ठाकुर निर्विरोध चुने गए थे। वह बीसीसीआई के सबसे युवा अध्यक्षों में से एक रहे हैं।
बीसीसीआई अध्यक्ष बनने से पहले वह मार्च 2015 से मई 2016 तक बोर्ड के सचिव और 2011 में संयुक्त सचिव भी रह चुके हैं। इसके अलावा वह हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ (एचपीसीए) के अध्यक्ष भी रहे हैं।

बीसीसीआई में सुधार के लिए गठित लोढ़ा समिति ने एक राज्य–एक वोट, 70 साल की उम्र सीमा, कार्यकाल के बीच तीन साल का ब्रेक और प्रशासन में पारदर्शिता जैसे कई अहम सुझाव दिए थे। जुलाई 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने लोढ़ा समिति की अधिकांश सिफारिशों को स्वीकार कर लिया था और बीसीसीआई को इन्हें लागू करने के लिए चार से छह महीने का समय दिया गया था।

हालांकि, बीसीसीआई ने बार-बार इन सिफारिशों को लागू करने में देरी की। अक्टूबर 2016 में बीसीसीआई की आम सभा की विशेष बैठक में लोढ़ा समिति की कई अहम सिफारिशों को खारिज कर दिया गया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया और चेतावनी दी कि अगर सुधार नहीं किए गए तो अदालत अपने आदेश से सुधार लागू करेगी।

दिसंबर 2016 में तत्कालीन चीफ जस्टिस टी.एस. ठाकुर ने सुनवाई के दौरान अनुराग ठाकुर के खिलाफ सख्त टिप्पणियां की थीं। कोर्ट ने यह भी कहा था कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि अदालत को गुमराह करने की कोशिश की गई है। इसके बाद कई सुनवाइयों के बाद जनवरी 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर और अजय शिर्के को उनके पदों से हटा दिया था।

करीब नौ साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने आदेश पर दोबारा विचार करते हुए फरवरी 2026 में उसमें संशोधन किया है। कोर्ट ने साफ किया कि अनुराग ठाकुर पर बीसीसीआई से जुड़े मामलों में भागीदारी पर लगी रोक अब खत्म की जाती है। इस फैसले को उनके लिए बड़ी कानूनी और राजनीतिक राहत माना जा रहा है।

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