हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में ऐतिहासिक लोअर बाजार का नाम बदलकर लोअर माल किए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। नगर निगम शिमला ने इस पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। सामने आया है कि ये साइन बोर्ड लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा लगाए गए थे, लेकिन इसके लिए नगर निगम की अनुमति नहीं ली गई थी। इस पर अब निगम ने विभाग से स्पष्टीकरण मांगा है।
कैसे शुरू हुआ विवाद
हाल ही में लोक निर्माण विभाग ने शिमला के सीटीओ और शेर-ए-पंजाब चौक के पास लगे साइन बोर्डों पर ‘लोअर बाजार’ की जगह ‘लोअर माल’ लिख दिया। यह बदलाव सामने आने के बाद ही विवाद शुरू हो गया। नगर निगम का कहना है कि शहर की सीमाओं में किसी भी बोर्ड या साइन लगाने के लिए निगम से पूर्व अनुमति अनिवार्य है, जबकि इस मामले में ऐसा नहीं किया गया।
ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा है लोअर बाजार
ब्रिटिश काल के समय रिज को ‘अपर बाजार’ कहा जाता था, जिसे बाद में ‘द रिज’ नाम दिया गया। इसके ठीक नीचे का इलाका भारतीय व्यापारियों के लिए विकसित किया गया था, जो आज ‘लोअर बाजार’ के नाम से जाना जाता है। यह इलाका आज भी शिमला का सबसे व्यस्त और लोकप्रिय बाजार माना जाता है।
यहां सर्दियों के कपड़ों से लेकर घरेलू सामान तक सब कुछ किफायती दामों पर उपलब्ध होता है। स्थानीय लोग इसे “शिमला का दिल” बताते हैं, जहां शहरवासियों के साथ आसपास के ग्रामीण इलाके के लोग भी खरीदारी करने आते हैं।
स्थानीय लोगों और दुकानदारों की राय
कई दुकानदारों ने कहा कि “लोअर बाजार ही असली शिमला की पहचान है। अगर इसका नाम ‘लोअर माल’ रखा जाता है तो इससे कोई विशेष नुकसान नहीं होगा।” उनका कहना है कि कुछ लोग इसे राजनीतिक मुद्दा बना रहे हैं, जबकि यह एक सामान्य बदलाव है।
वहीं, कुछ नागरिकों का मानना है कि शहर की ऐतिहासिक पहचान से छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि ‘लोअर बाजार’ नाम पीढ़ियों से लोगों की यादों और संस्कृति से जुड़ा है।
नगर निगम का सख्त रुख
शिमला नगर निगम के महापौर सुरेंद्र चौहान ने बताया कि बिना अनुमति कोई भी विभाग साइन बोर्ड या होर्डिंग नहीं लगा सकता। उन्होंने कहा,
“नगर निगम की मंजूरी के बिना बोर्ड लगाना नियमों के खिलाफ है। इस मामले में लोक निर्माण विभाग को नोटिस जारी कर दिया गया है, और उनसे जवाब मांगा गया है।”
अब नगर निगम इस पूरे मामले की जांच रिपोर्ट तैयार कर रहा है। यदि लोक निर्माण विभाग की गलती साबित होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।
वहीं, शहर के लोगों के बीच यह चर्चा तेज है कि क्या ऐतिहासिक “लोअर बाजार” को “लोअर माल” के नाम से स्वीकार किया जाएगा या नहीं — यह आने वाला समय ही बताएगा।










