विदेशी छात्रों को पीयू की बड़ी राहत

Chandigarh स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए इस वर्ष भी फीस में कोई बढ़ोतरी नहीं करने का फैसला किया है। विश्वविद्यालय का मानना है कि स्थिर फीस संरचना विदेशी छात्रों को आकर्षित करने में मदद करेगी और अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के क्षेत्र में उसकी पहचान को और मजबूत बनाएगी। पिछले कई वर्षों से पंजाब यूनिवर्सिटी विदेशी विद्यार्थियों के लिए शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र बनी हुई है। यहां एशिया, अफ्रीका और अन्य देशों से छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए आते हैं। फीस में वृद्धि न करने का फैसला उन छात्रों के लिए राहत भरा माना जा रहा है, जो विदेश से आकर भारत में पढ़ाई कर रहे हैं। विश्वविद्यालय में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के तहत भी बड़ी संख्या में छात्र अध्ययन करते हैं। इन विद्यार्थियों को भारत सरकार की ओर से छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है, जिससे उन्हें आर्थिक सहायता मिलती है और वे अपनी पढ़ाई पर बेहतर तरीके से ध्यान केंद्रित कर पाते हैं। इसके अलावा सार्क देशों और कम विकसित देशों से आने वाले छात्रों के लिए विशेष रियायतें दी गई हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन छात्रों के लिए फीस में उल्लेखनीय छूट प्रदान की है, ताकि आर्थिक कारणों से उनकी शिक्षा प्रभावित न हो। यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पंजाब यूनिवर्सिटी का मानना है कि ऐसे फैसले अंतरराष्ट्रीय छात्रों के बीच सकारात्मक संदेश पहुंचाते हैं। विश्वविद्यालय को उम्मीद है कि फीस में स्थिरता और विभिन्न सुविधाओं के कारण आने वाले समय में विदेशी छात्रों की संख्या में और वृद्धि होगी, जिससे परिसर की शैक्षणिक और सांस्कृतिक विविधता भी मजबूत होगी।

विदेशी छात्रों के लिए कुल 1135 सीटें

पंजाब यूनिवर्सिटी ने अंतरराष्ट्रीय और एनआरआई छात्रों के लिए अपनी प्रवेश नीति में स्थिरता बनाए रखते हुए इस वर्ष भी फीस में कोई बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इससे विदेशी छात्रों को आर्थिक राहत मिलेगी और अधिक संख्या में छात्र यहां दाखिला लेने के लिए प्रेरित होंगे। विश्वविद्यालय में विदेशी नागरिकों और एनआरआई छात्रों के लिए कुल 1135 सीटें आरक्षित हैं। इन सीटों पर विभिन्न देशों से आने वाले विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाता है। हर साल बड़ी संख्या में छात्र इन सीटों के लिए आवेदन करते हैं। पिछले शैक्षणिक सत्र के लिए निर्धारित फीस ढांचे को ही इस वर्ष भी लागू रखा जाएगा। इससे छात्रों और उनके अभिभावकों को पहले से ही खर्चों की स्पष्ट जानकारी रहेगी और उन्हें अतिरिक्त आर्थिक बोझ का सामना नहीं करना पड़ेगा। डीन इंटरनेशनल स्टूडेंट्स प्रो. कृष्ण मोहन ने बताया कि विश्वविद्यालय ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए फीस को यथावत रखने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि दाखिला प्रक्रिया और अन्य नियम भी पूर्व निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार ही लागू किए जाएंगे। पंजाब यूनिवर्सिटी का उद्देश्य केवल शिक्षा प्रदान करना ही नहीं, बल्कि दुनिया के विभिन्न देशों के छात्रों को एक साझा शैक्षणिक मंच उपलब्ध कराना भी है। विश्वविद्यालय को उम्मीद है कि फीस में स्थिरता बनाए रखने के इस फैसले से आने वाले सत्र में विदेशी और एनआरआई छात्रों की संख्या में और वृद्धि देखने को मिलेगी।

2024 से पीयू ने लिया फैसला

यह उल्लेखनीय है कि सत्र 2024 के लिए पीयू ने विदेशी छात्रों को प्रोत्साहित करने हेतु एंट्रेंस टेस्ट से छूट देने का निर्णय लिया था। इसके साथ ही, सार्क देशों के छात्रों के लिए फीस में कमी भी की गई थी। इस बार फिर से फीस में कोई संशोधन नहीं किया गया है। सत्र 2024 के दौरान लगभग 700 विदेशी छात्रों ने आवेदन किया, जिनमें अमेरिका, कनाडा, नेपाल, ईरान, बोत्सवाना, केन्या, मालावी, जिम्बाब्वे, नाइजीरिया और थाईलैंड के छात्र शामिल थे। विश्वविद्यालय को अपेक्षा है कि फीस को स्थिर रखने का निर्णय इस वर्ष भी विदेशी छात्रों की संख्या में वृद्धि करेगा। पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) ने एक बार फिर विदेशी छात्रों को राहत देते हुए उनकी फीस को बढ़ाने का निर्णय नहीं लिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए भी अंतरराष्ट्रीय और एनआरआई छात्रों के लिए वही फीस संरचना लागू रहेगी जो पिछले सत्र में थी। इस निर्णय का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय छात्रों को आकर्षित करना और विश्वविद्यालय की वैश्विक पहुंच को मजबूत करना है। यूनिवर्सिटी लंबे समय से विभिन्न देशों के छात्रों के लिए शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र रही है। हर वर्ष बड़ी संख्या में विदेशी विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए यहां आते हैं। प्रबंधन मानता है कि फीस को स्थिर रखने से अंतरराष्ट्रीय छात्रों में विश्वास बढ़ेगा और दाखिलों में इजाफा होगा। पंजाब यूनिवर्सिटी में विदेशी छात्रों के लिए विशेष सीटें आरक्षित की गई हैं। इन सीटों पर विदेशी नागरिकों और एनआरआई छात्रों को प्रवेश दिया जाता है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य विभिन्न देशों के विद्यार्थियों को एक ही परिसर में उच्च गुणवत्ता की शिक्षा प्रदान करना है, जिससे सांस्कृतिक और शैक्षणिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिले।
विश्वविद्यालय में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के अंतर्गत कई छात्र अध्ययन कर रहे हैं। ऐसे छात्रों को भारतीय सरकार द्वारा छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। साथी, सार्क देशों और कम विकसित देशों से आने वाले विद्यार्थियों को विशेष रियायतें भी दी जाती हैं, ताकि उच्च शिक्षा उनके लिए अधिक सुलभ हो सके। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, विदेशी छात्रों के लिए निर्धारित सीटों की संख्या 1135 है। इन सीटों के माध्यम से विभिन्न देशों के छात्रों को स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध कार्यक्रमों में प्रवेश दिया जाता है। हर वर्ष इन सीटों पर दाखिले के लिए बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त होते हैं। डीन इंटरनेशनल स्टूडेंट्स कार्यालय ने बताया कि इस वर्ष भी दाखिले पिछले वर्ष की गाइडलाइन और नियमों के अनुसार होंगे। फीस संरचना में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे छात्रों और उनके अभिभावकों पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। यह उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय ने पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए कई सकारात्मक कदम उठाए हैं, जिनमें प्रवेश प्रक्रिया को सरल बनाना, कुछ श्रेणियों के छात्रों को प्रवेश परीक्षा से छूट देना और विभिन्न देशों के छात्रों के लिए विशेष सहायता सेवाएं शामिल हैं। पिछले शैक्षणिक सत्र में अमेरिका, कनाडा, नेपाल, ईरान, केन्या, नाइजीरिया, थाईलैंड और अन्य देशों के सैकड़ों छात्रों ने पंजाब यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए आवदन किया था। इससे स्पष्ट होता है कि विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय पहचान लगातार मजबूत हो रही है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि फीस में स्थिरता बनाए रखने का निर्णय विदेशी छात्रों के लिए फायदेमंद रहेगा। इससे नए छात्रों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी, साथ ही पहले से अध्ययनरत छात्रों के लिए भी आर्थिक योजना बनाना आसान होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन को आशा है कि इस निर्णय के बाद आगामी सत्र में स्थिति बेहतर होगी।
Exit mobile version