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4 days ago
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राहत शिविरों में रहने को मजबूर लोग सड़कों पर उतरे, सरकार से सुरक्षित वापसी की मांग”

मणिपुर में जातीय हिंसा के कारण बेघर लोग सड़कों पर उतरे: राजभवन के पास प्रदर्शन, कहा—हमें घर लौटने दोमणिपुर में जारी जातीय तनाव और पिछले डेढ़ साल से बढ़ती असुरक्षा के बीच राहत शिविरों में रह रहे हजारों प्रभावित लोगों ने रविवार को राजभवन के पास एक बड़ा विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से स्पष्ट मांग की—अगर राज्य में हालात सच में सामान्य हो चुके हैं, जैसा प्रशासन दावा करता है, तो हमें अपने घरों में सुरक्षित वापस लौटने दिया जाए।मई 2023 में मणिपुर में शुरू हुई जातीय हिंसा ने हजारों परिवारों को बेघर कर दिया था। आज भी सैकड़ों परिवार राहत शिविरों में जीवन बिताने को मजबूर हैं, जबकि उनके घर अब भी असुरक्षित या नष्ट हो चुके हैं। प्रदर्शन में शामिल लोग चुराचांदपुर, कांगपोकपी, इंफाल पश्चिम और इंफाल पूर्व जिलों से आए थे, जो हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं।

घर लौटने दोकी मांग के साथ उभरी नई आवाज

रविवार को जुटे प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर नारे लगाए। बैनरों पर लिखा था—विस्थापित जीवन मायने रखता है अधिकार पहले, पर्यटन बाद मेंहमारे मौलिक अधिकार सुनिश्चित करें संगाई उत्सव का बहिष्कार

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार संगाई पर्यटन महोत्सव का आयोजन कर राज्य में शांति और सामान्य स्थिति लौटने का संदेश देना चाहती है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। उनका कहना है कि हजारों लोग अभी भी शिविरों में रहने को मजबूर हैं, जहां न बुनियादी सुविधाएं पर्याप्त हैं और न ही सुरक्षा की गारंटी।

सुरक्षाबलों ने राजभवन पहुँचने से पहले रोका

प्रदर्शनकारियों का जत्था राजभवन की ओर बढ़ रहा था, लेकिन सुरक्षा बलों ने कंगला गेट के पास, राजभवन से लगभग 200 मीटर पहले ही रोक दिया। उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी उरिपोक क्षेत्र की ओर मार्च करते हुए अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाते रहे। सुरक्षा बलों की तैनाती पूरे क्षेत्र में बढ़ाई गई थी, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को रोका जा सके।

विस्थापितों की नाराजगी बढ़ रही है

चुराचांदपुर जिले से विस्थापित ईरोम अबुंग मैतेई ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा—
सरकार कहती है कि स्थिति सामान्य है, लेकिन हम आज भी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। हमारी परेशानियों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसलिए हमें सड़कों पर उतरना पड़ा।

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर सरकार ने उनकी समस्याओं पर जल्द ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि लोग अब शिविरों में वापस नहीं लौटेंगे, बल्कि सरकार से सुरक्षित पुनर्वास की स्पष्ट योजना की मांग करेंगे।

संगाई महोत्सव को लेकर नाराजगी

संगाई पर्यटन महोत्सव मणिपुर का प्रमुख सांस्कृतिक आयोजन है, जो हर साल राज्य की पहचान को प्रदर्शित करता है। लेकिन इस बार विस्थापितों और उनसे जुड़े संगठनों ने इसका बहिष्कार करने की अपील की है। उनका कहना है कि जब हजारों लोग अपने घरों को छोड़कर शिविरों में रह रहे हों, तब उत्सव मनाने का कोई औचित्य नहीं है।
उनके अनुसार, सरकार को पहले विस्थापितों की सुरक्षा और पुनर्वास को प्राथमिकता देनी चाहिए, न कि उत्सवों के माध्यम से सामान्य स्थिति दिखाने की कोशिश करनी चाहिए।

अब भी बड़े सवाल अनसुलझे

मणिपुर में जातीय हिंसा के बाद से शांति बहाली की कोशिशें तो जारी हैं, लेकिन बड़ी संख्या में लोग आज भी अपने घरों में लौटने से डरते हैं। कई परिवारों के घर नष्ट हो चुके हैं और कई क्षेत्रों में अभी भी तनाव की स्थिति बनी हुई है। राहत शिविरों में भोजन, स्वच्छता, रोजगार और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी ने लोगों की जिंदगी को बेहद कठिन बना दिया है।

विस्थापितों का कहना है कि जब तक सरकार स्पष्ट रूप से सुरक्षा की गारंटी नहीं देती, घर वापस लौटना संभव नहीं है। प्रदर्शनकारियों द्वारा उठाए गए सवालों ने एक बार फिर राज्य सरकार और केंद्र के सामने पुनर्वास और सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से ला दिया है।

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