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  दिल्ली में चिंता बढ़ाने वाले आंकड़े: 15 दिन में 509 महिलाएं-लड़कियां लापता

देश की राजधानी दिल्ली को सुरक्षा और सुविधाओं के मामले में सबसे बेहतर माना जाता है, लेकिन हाल के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। नए साल की शुरुआत के साथ ही दिल्ली में लापता होने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है। जनवरी के पहले 15 दिनों में ही 807 लोग दिल्ली से गायब हो गए। यानी औसतन हर दिन करीब 54 लोग लापता हो रहे हैं।

महिलाओं और लड़कियों के मामले सबसे ज्यादा

लापता लोगों के आंकड़ों में सबसे ज्यादा संख्या महिलाओं और लड़कियों की है। कुल 509 मामले महिलाओं और लड़कियों के लापता होने के सामने आए हैं। वहीं 298 पुरुषों के गायब होने की शिकायत दर्ज की गई है।

पुलिस अब तक कुल 807 में से सिर्फ 235 लोगों को ही ढूंढ पाई है, जबकि 572 लोग अब भी लापता हैं। यह आंकड़ा राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

नाबालिग बच्चों के भी कई मामले

लापता लोगों में बड़ी संख्या नाबालिग बच्चों की भी है। आंकड़ों के मुताबिक 191 नाबालिग बच्चे लापता हुए हैं। इनमें किशोर यानी टीनएजर बच्चों की संख्या ज्यादा है।

कुल 169 टीनएजर बच्चों के गायब होने की शिकायत सामने आई है। इनमें

  • 138 लड़कियां
  • 31 लड़के शामिल हैं।

पुलिस कुछ बच्चों को खोजने में सफल रही है, लेकिन अभी भी करीब 71 प्रतिशत टीनएजर बच्चे लापता हैं। इसके अलावा 8 से 12 साल और उससे कम उम्र के बच्चों के भी कई मामले सामने आए हैं, जिनमें से अधिकतर बच्चों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।

अगर वयस्कों की बात करें तो जनवरी के पहले 15 दिनों में 363 महिलाएं और 253 पुरुष लापता हुए हैं। पुलिस कुछ मामलों में सफलता जरूर हासिल कर पाई है, लेकिन अभी भी 435 वयस्कों का कोई सुराग नहीं मिला है।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि लापता लोगों की तलाश लगातार जारी है। कई मामलों में लोगों को सुरक्षित ढूंढ लिया गया है, लेकिन बड़ी संख्या में लोग अब भी गायब हैं। पुलिस अलग-अलग एंगल से जांच कर रही है और सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य तकनीकी माध्यमों की मदद ले रही है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

राजधानी में इतने कम समय में इतनी बड़ी संख्या में लोगों का लापता होना सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता पैदा कर रहा है। खासकर महिलाओं और बच्चों के ज्यादा लापता होने के मामलों ने लोगों में डर का माहौल बना दिया है।विशेषज्ञों का मानना है कि इन मामलों को रोकने के लिए पुलिस के साथ-साथ समाज और परिवारों को भी सतर्क रहने की जरूरत है।

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