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4 days ago
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काशीबुग्गा वेंकटेश्वर मंदिर में रेलिंग टूटने से मची भगदड़, 10 श्रद्धालुओं की मौत, 25 लोग घायल, PM मोदी ने मृतकों के परिजनों को दिया 2 लाख रुपये की सहायता राशि देने का एलान

आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के काशीबुग्गा स्थित प्रसिद्ध वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में शनिवार सुबह एकादशी के अवसर पर बड़ा हादसा हो गया। पूजा-अर्चना के दौरान भारी भीड़ के बीच धक्का-मुक्की और रेलिंग टूटने से भगदड़ मच गई।इस भगदड़ में अब तक 10 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। मृतकों में  2 बच्चे और 8 महिलाएं शामिल हैं, जबकि 25 से अधिक लोग घायल हैं। राज्य सरकार ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं और राहत व बचाव कार्य लगातार जारी हैं।

कैसे हुआ हादसा

शनिवार सुबह एकादशी पर्व होने के कारण मदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने लगी थी।करीब 25,000 श्रद्धालु मंदिर परिसर में पहुंच गए,जबकि प्रशासन ने केवल 3,000 लोगों के दर्शन की व्यवस्था की थी।भीड़ इतनी बढ़ गई कि सीढ़ियों और गलियारों मे लोगों के लिए जगह नही बची।मंदिर की पहली मंजिल पर जाने के लिए 20 सीढ़ियां है।इन्ही पर धक्का-मुक्की के बीच रेलिंग टूट गई और कईं श्रद्धालु नीचे गिर पड़े। इससे अफरा-तफरी मच गई और लोग एक-दूसरे पर चढ़ने लगे।कुछ ही पलों में पूरे परिसर में भगदड़ मच गई।कईं महिलाओं और बच्चों वहीं दब गए।कुछ महिलाएं बेहोश हो गई।

वीडियो में कैद हुई दर्दनाक तस्वीरें

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि मंदिर की सीढ़ियों पर भारी भीड़ उमड़ी हुई थी। महिलाएं और बुजुर्ग फूलों की टोकरी लेकर दर्शन के लिए लाइन में खड़े थे।इसी दौरान अचानक रेलिंग गिरती है और लोग एक-दूसरे पर चढ़कर भागते नज़र आते हैं। कुछ श्रद्धालु दूसरों के ऊपर से चढ़कर बाहर निकलने की कोशिश करते दिखे।कई वीडियो में लोग भीड़ में फंसे श्रद्धालुओं को खींचकर बाहर निकालते हुए दिखाई दे रहे हैं।

सरकार की लापरवाही आई सामने

हादसे के बाद यह बात सामने आई है कि मंदिर में भीड़ नियंत्रण के पर्याप्त इंतज़ाम नहीं थे।मंदिर का प्रवेश और निकास द्वार एक ही है, जिससे भीड़ को संभालना मुश्किल हो गया।अधिकारियों ने माना कि मंदिर प्रशासन ने क्षमता से कई गुना अधिक श्रद्धालुओं को प्रवेश की अनुमति दीइसके अलावा, मंदिर का कुछ हिस्सा अभी निर्माणाधीन था। निर्माण क्षेत्र में भीड़ के पहुंच जाने से हालात और बिगड़ गए।आयोजन के लिए कोई सरकारी अनुमति नहीं ली गई थी और सुरक्षा कर्मियों की संख्या बेहद कम थी।

काशीबुग्गा वेंकटेश्वर मंदिर को अगस्त 2025 में ही श्रद्धालुओं के लिए खोला गया था।मंदिर के निर्माण में 10 साल लगे और यह लगभग 12 एकड़ क्षेत्र में फैला है।मंदिर के निर्माता 95 वर्षीय हरि मुकुंद पांडा हैं, जिन्होंने इसे तिरुमला वेंकटेश्वर मंदिर के मॉडल पर बनवाया।मंदिर को स्थानीय लोग “छोटा तिरुपति” भी कहते हैं।मंदिर की डिजाइन और स्थापत्य कला पारंपरिक दक्षिण भारतीय मंदिरों पर आधारित है।

राज्य के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने हादसे पर गहरा शोक जताया है। उन्होंने एक्स (Twitter) पर लिखा —“काशीबुग्गा वेंकटेश्वर मंदिर में भगदड़ से श्रद्धालुओं की मौत बेहद दुखद है। यह एक त्रासदीपूर्ण घटना है। मृतकों के परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदना है। मैंने अधिकारियों को घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा देने का निर्देश दिया है।”

प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने जताया दुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है।उन्होंने लिखा-“काशीबुग्गा मंदिर में हुई दुर्घटना अत्यंत पीड़ादायक है। शोकाकुल परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।”प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की है।

मंदिर प्रशासन पर उठे सवाल

मंदिर प्रबंधन की लापरवाही अब जांच के घेरे में है।अधिकारियों के अनुसार, मंदिर निजी प्रबंधन के अधीन है और राज्य के एंडोमेंट्स विभाग के नियंत्रण में नहीं आता।स्थानीय प्रशासन अब मंदिर प्रबंधन समिति, सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण अनुमति से जुड़ी फाइलों की जांच कर रहा है।

 

 

 

 

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