Punjab के होशियारपुर जिले के मुकेरियां से जुड़े एक कारोबारी द्वारा लगाए गए आरोपों ने राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। कारोबारी मलकीत सिंह ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दावा किया है कि उन पर कारोबार में हिस्सेदारी देने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। याचिका में कारोबारी ने आरोप लगाया है कि उनसे उनके व्यवसाय में बड़ी हिस्सेदारी मांगी गई थी। उनका कहना है कि जब उन्होंने इस मांग को स्वीकार करने से इनकार किया, तो उन्हें लगातार धमकी भरे फोन कॉल और संदेश मिलने शुरू हो गए। इन घटनाओं के कारण उनके परिवार में भी भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है। मलकीत सिंह का दावा है कि पिछले कुछ समय से उन पर विभिन्न माध्यमों से दबाव बनाया जा रहा था। उन्होंने अदालत को बताया कि उन्हें यह आशंका है कि उनके कारोबार को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा सकती है। कारोबारी के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम ने उनके व्यापारिक और पारिवारिक जीवन को प्रभावित किया है। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा है कि उन्होंने मामले की जानकारी संबंधित पुलिस अधिकारियों को दी थी और शिकायत दर्ज करवाई थी। हालांकि, उनका आरोप है कि शिकायत के बावजूद उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिली और मामले में प्रभावी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। अब यह मामला हाईकोर्ट के समक्ष पहुंच चुका है, जहां अदालत पूरे घटनाक्रम की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की समीक्षा करेगी। आने वाली सुनवाई में सरकार और पुलिस प्रशासन का पक्ष भी सामने आएगा, जिसके बाद मामले की दिशा और आगे की कार्रवाई को लेकर तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है।
कारोबार बंद कराने की दी गई धमकी
याचिकाकर्ता मलकीत सिंह ने अदालत में दावा किया है कि उन्हें पिछले कुछ समय से लगातार धमकी भरे फोन कॉल और संदेश प्राप्त हो रहे हैं। उनका कहना है कि इन संदेशों में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई कि यदि उन्होंने कारोबार में हिस्सेदारी देने से इनकार किया तो उनके व्यवसाय को गंभीर नुकसान पहुंचाया जा सकता है। इन धमकियों के कारण उनके परिवार में भी भय का माहौल बन गया है। धमकियां केवल उनके व्यापार तक सीमित नहीं थीं बल्कि परिवार की सुरक्षा को लेकर भी चिंता पैदा करने वाली थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार मिल रही चेतावनियों के कारण उनके परिवार के सदस्य मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं और सामान्य जीवन प्रभावित हुआ है। मलकीत सिंह ने बताया कि स्थिति गंभीर होने के बाद उन्होंने संबंधित पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने लिखित शिकायत के माध्यम से उन व्यक्तियों के नाम भी साझा किए, जिन पर धमकियां दिलाने या इस पूरे मामले में शामिल होने का संदेह है। उनका मानना है कि समय रहते उचित कार्रवाई की जाती तो मामला इतना आगे नहीं बढ़ता। याचिकाकर्ता का आरोप है कि शिकायत दर्ज करवाने के बावजूद जांच में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई। उनका कहना है कि पुलिस को पर्याप्त जानकारी और संभावित आरोपियों के नाम उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन इसके बाद भी कार्रवाई अपेक्षित स्तर पर नहीं पहुंच सकी। इसी वजह से उन्होंने न्यायालय की शरण लेने का फैसला किया। अब यह मामला अदालत के समक्ष विचाराधीन है और याचिकाकर्ता ने अपने परिवार की सुरक्षा के साथ-साथ निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। मामले ने स्थानीय स्तर पर भी काफी चर्चा बटोरी है और सभी की नजरें आगामी कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं, जहां जांच की दिशा और प्रशासन की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण पहलू सामने आ सकते हैं।

अज्ञात लोगों पर एफआईआर
हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से मांगा जवाब
यह मामला अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की निगरानी में पहुंच गया है, जहां प्रारंभिक सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से जवाब मांगा है। अदालत का यह कदम याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों और जांच को लेकर उठाए गए सवालों के बाद सामने आया है। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं। इनमें गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), होशियारपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी), संबंधित डीएसपी तथा मुकेरियां थाना प्रभारी शामिल हैं। अदालत ने इन सभी अधिकारियों से मामले पर विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है। अदालत के नोटिस के बाद अब संबंधित विभागों पर मामले से जुड़ी सभी जानकारियां और जांच की स्थिति स्पष्ट करने की जिम्मेदारी आ गई है। माना जा रहा है कि आगामी सुनवाई में पुलिस को अब तक की जांच और उठाए गए कदमों का पूरा ब्यौरा अदालत के समक्ष रखना पड़ सकता है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट की ओर से वरिष्ठ अधिकारियों को सीधे नोटिस जारी किया जाना इस बात का संकेत है कि अदालत मामले की निष्पक्ष जांच और तथ्यों की स्पष्टता सुनिश्चित करना चाहती है। इससे जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली भी न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ सकती है। अब इस मामले की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। अदालत में सरकार और पुलिस प्रशासन के जवाब के बाद यह तय होगा कि जांच की दिशा क्या होगी और याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए सुरक्षा तथा निष्पक्ष जांच संबंधी मुद्दों पर आगे कौन से कदम उठाए जाएंगे।