West Bengal की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर तीखा हमला बोला है। फेसबुक लाइव के जरिए कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी के प्रति वफादार कार्यकर्ता ही संगठन की असली ताकत हैं। उन्होंने उन कार्यकर्ताओं का धन्यवाद किया जो हर परिस्थिति में पार्टी के साथ खड़े रहे हैं। अपने संबोधन में ममता बनर्जी ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से पार्टी के कई नेता और प्रवक्ता विभिन्न मुद्दों पर सार्वजनिक बयान दे रहे हैं, लेकिन उन्होंने खुद चुप रहना उचित समझा। उनके अनुसार, कई बार परिस्थितियों का जवाब शब्दों से नहीं बल्कि धैर्य और संयम से दिया जाता है। उन्होंने कहा कि उनकी चुप्पी को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। टीएमसी प्रमुख ने उन नेताओं पर भी सवाल उठाए जिन्होंने पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद संगठन से दूरी बना ली। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को चुनाव लड़ने का अवसर दिया गया, नामांकन प्रक्रिया में समर्थन मिला और पार्टी के चुनाव चिह्न पर जनता ने वोट दिया, वही नेता अब पार्टी की आलोचना कर रहे हैं। ममता ने इसे राजनीतिक नैतिकता के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि यदि किसी नेता को संगठन की कार्यशैली से शिकायत थी तो उसे पार्टी मंच पर अपनी बात रखनी चाहिए थी। चुनाव जीतने के कुछ ही समय बाद पार्टी से अलग रुख अपनाना कार्यकर्ताओं और मतदाताओं दोनों के विश्वास को ठेस पहुंचाता है। उन्होंने संकेत दिया कि ऐसे कदमों से जनता के बीच गलत संदेश जाता है। ममता बनर्जी ने अपने संबोधन के अंत में कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक चुनौतियां आती-जाती रहती हैं, लेकिन संगठन की ताकत उसके समर्पित कार्यकर्ता और समर्थक होते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी आगे भी जनता के मुद्दों पर काम करती रहेगी और हर चुनौती का लोकतांत्रिक तरीके से सामना करेगी।
2026 में चुनाव कैसे लड़ सकते हैं?
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने हाल ही में एक फेसबुक लाइव के दौरान चुनावी प्रक्रिया और पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी होने चाहिए, लेकिन उन्हें हालिया चुनावों में कई ऐसी घटनाएं देखने को मिलीं जिन पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान और मतगणना प्रक्रिया में कई तरह की अनियमितताएं देखने को मिलीं। उनके अनुसार, विपक्षी दल जनता की समस्याओं के समाधान पर ध्यान देने के बजाय राजनीतिक माहौल को तनावपूर्ण बनाने में लगे हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि इससे लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचता है और जनता का विश्वास प्रभावित होता है। टीएमसी प्रमुख ने यह भी कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं पर लगातार दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। उनके मुताबिक, कई कार्यकर्ताओं और समर्थकों के खिलाफ ऐसे मामले दर्ज किए जा रहे हैं जिन्हें वह राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा मानती हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के कदमों से कार्यकर्ताओं के बीच भय का वातावरण पैदा करने की कोशिश की जा रही है। ममता बनर्जी ने उन नेताओं पर भी सवाल उठाए जिन्होंने पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद संगठन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यदि किसी नेता को पार्टी के कामकाज को लेकर आपत्ति थी तो उसे चुनाव से पहले अपनी बात रखनी चाहिए थी। चुनाव जीतने के बाद अचानक पार्टी के खिलाफ बयान देना जनता और कार्यकर्ताओं दोनों के लिए आश्चर्यजनक है। अपने संबोधन में उन्होंने संगठन के प्रति निष्ठा और राजनीतिक जिम्मेदारी पर जोर दिया। ममता ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल की सफलता उसके कार्यकर्ताओं और जनता के भरोसे पर टिकी होती है। उन्होंने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने का आह्वान करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और जनता के हितों के लिए संघर्ष जारी रहना चाहिए।


आप गद्दार कैसे बन गए?
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर कड़ा रुख अपनाया है। एक सार्वजनिक संबोधन के दौरान उन्होंने उन नेताओं को निशाने पर लिया, जिन्होंने हाल के दिनों में पार्टी से दूरी बनाई या विरोधी राजनीतिक दलों के प्रति झुकाव दिखाया है। ममता बनर्जी ने कहा कि जिन नेताओं को पार्टी ने चुनाव लड़ने का अवसर दिया, उन्हें संगठन की ओर से पूरा समर्थन भी मिला था। उन्होंने याद दिलाया कि उम्मीदवारों के चयन से लेकर नामांकन प्रक्रिया तक पार्टी नेतृत्व ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ऐसे में चुनाव जीतने के तुरंत बाद पार्टी के खिलाफ खड़ा होना कई सवाल खड़े करता है। टीएमसी प्रमुख ने बागी नेताओं की राजनीतिक निष्ठा पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि जनता ने उन्हें पार्टी के चुनाव चिन्ह और संगठन के भरोसे पर वोट दिया था। इसलिए चुनाव के कुछ ही समय बाद विचारधारा बदलना और अलग राजनीतिक रास्ता चुनना मतदाताओं की भावनाओं के साथ न्याय नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक विचारधारा और नीतियां लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी के विरोध पर आधारित रही हैं। ऐसे में पार्टी से जुड़े किसी नेता का अचानक विरोधी राजनीतिक खेमे के साथ खड़ा होना संगठन के मूल सिद्धांतों के विपरीत माना जाएगा। ममता ने कहा कि विचारधारा और राजनीतिक प्रतिबद्धता किसी भी दल की पहचान होती है। अपने संदेश में ममता बनर्जी ने पार्टी कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक उतार-चढ़ाव किसी भी दल का हिस्सा होते हैं, लेकिन संगठन की मजबूती उसके समर्पित कार्यकर्ताओं और समर्थकों से ही बनी रहती है। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी आगे भी अपनी विचारधारा और जनहित के मुद्दों के साथ मजबूती से आगे बढ़ती रहेगी।
‘दबाव के आगे नहीं झुकूंगी‘
ममता ने बागी नेताओं को ‘गद्दार’ करार दिया. उन्होंने कहा, ‘वे बीजेपी की मंशा के मुताबिक काम कर रहे हैं।’ मैं उन्हें बताऊंगी कि वे सीधे बीजेपी में शामिल हो जाएं. याद रखें, मैं अब भी जीवित हूं। पार्टी का चुनाव चिह्न कहीं नहीं जाएगा। यदि आप मुझे रुकवाना चाहते हैं, तो आपको मुझे खत्म करना होगा. आपने मुझ पर, महुआ पर, अभिषेक पर और अन्य लोगों पर प्रहार किए हैं। बंगाल में नए कल्चर को देख कर दुख होता है; बच्चों को मिड-डे मील में अंडे नहीं मिल रहे हैं और आप पुलिस की सहायता से इसका गलत प्रयोग कर रहे हैं। मैं उन व्यक्तियों को निराश नहीं करूंगी जो पार्टी से दूर जा रहे हैं। मुझे पता है कि उन पर प्रेशर है, लेकिन मैं बीजेपी के सामने नहीं झुकूंगी और मेरी पार्टी भी किसी प्रेशर के आगे नहीं झुकेगी। टीएमसी के नेता ने चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न उठाए। उनका आरोप है कि चुनावों के दौरान विपक्षी दलों ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश की। उनके अनुसार, मतगणना केंद्रों पर अनियमितताओं की शिकायतें आई हैं और विपक्ष जनता के मुद्दों को छोड़कर राजनीतिक माहौल को तनावपूर्ण बनाने में जुटा है। ममता का कहना है कि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में टीएमसी कार्यकर्ताओं के खिलाफ गलत मामले दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग राजनीतिक दबाव बनाने और कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने के लिए किया जा रहा है। फिर भी, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पार्टी के कार्यकर्ता इन चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हैं। बागी नेताओं पर निशाना साधते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि जिन लोगों को पार्टी ने चुनाव लड़ने का मौका दिया, वही आज संगठन के खिलाफ बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव चिन्ह और नामांकन प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे भी हैं।
उन्होंने कहा कि अगर किसी नेता को पार्टी की कार्यप्रणाली से असहमति थी, तो उसे पहले संगठन में अपनी बात रखनी चाहिए थी। जनता के वोट और पार्टी के समर्थन से जीत प्राप्त करने के बाद अचानक विचारधारा बदल लेना राजनीतिक नैतिकता के खिलाफ है। ममता ने इसे जनता के विश्वास से धोखा बताया। टीएमसी सुप्रीमो ने कहा कि उनकी पार्टी की विचारधारा भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ रही है और इस सिद्धांत पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेता राजनीतिक दबाव या व्यक्तिगत लाभ के कारण पार्टी छोड़ रहे हैं। ऐसे लोगों को उन्होंने खुलकर अपनी नई राजनीतिक राह चुनने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विरोधियों द्वारा लगातार हमले और आलोचनाएं होती रही हैं, लेकिन इससे उनके संकल्प पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से संघर्ष जारी रखने और संगठन को मजबूत बनाए रखने की अपील की। अंत में ममता बनर्जी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की शक्ति उसके कार्यकर्ता और आम जनता हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद पार्टी अपनी विचारधारा और जनसेवा के उद्देश्य पर आगे बढ़ती रहेगी। साथ ही उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने और आगामी राजनीतिक चुनौतियों का मिलकर सामना करने का आग्रह किया।