आवारा कुत्तों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की अहम सुनवाई, सार्वजनिक सुरक्षा पर जताई चिंता

आवारा कुत्तों से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई करते हुए सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि यह समझना आसान नहीं है कि कौन सा कुत्ता आक्रामक हो सकता है और कौन नहीं, ऐसे में आम लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि हर आवारा कुत्ते को पकड़कर शेल्टर में रखना व्यावहारिक समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि यह न केवल आर्थिक रूप से मुश्किल है, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी कारगर नहीं माना जा सकता। सिब्बल ने यह भी कहा कि असल समस्या कानूनों के सही तरीके से लागू न होने की है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समस्या के इलाज से बेहतर उसकी रोकथाम है, लेकिन इसके लिए ठोस और व्यवहारिक व्यवस्था जरूरी है। अदालत ने सवाल उठाया कि क्या किसी भी कुत्ते को यह सिखाया जा सकता है कि वह किसी को नुकसान न पहुंचाए, और आखिर आम नागरिक कैसे पहचान करे कि कौन सा कुत्ता खतरा बन सकता है।

मामले की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता वंदना जैन की दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि पशु कल्याण का समर्थन जरूरी है, लेकिन किसी भी समुदाय पर जबरन कोई व्यवस्था थोपना उचित नहीं है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि गेटेड कम्युनिटी में आवारा कुत्तों की मौजूदगी को लेकर फैसला वहां रहने वाले लोगों को लोकतांत्रिक तरीके से करना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अगर बहुसंख्यक निवासी इसे बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा मानते हैं, तो उनकी राय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

कोर्ट ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर इस तरह की व्यवस्था नहीं बनी, तो कोई भी व्यक्ति अपनी जरूरत बताकर किसी भी जानवर को रखने की मांग कर सकता है।

अधिवक्ता वंदना जैन ने कोर्ट को बताया कि देश में आवारा और पालतू मिलाकर कुत्तों की संख्या लगभग 6.2 करोड़ तक पहुंच चुकी है और कई इलाकों में हालात नियंत्रण से बाहर होते दिख रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि कुत्तों से नफरत नहीं, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो लोग पशु प्रेमी हैं, उन्हें सड़कों पर नहीं बल्कि शेल्टर में मौजूद कुत्तों की देखभाल और भोजन की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

इससे पहले 18 दिसंबर 2025 को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम के नियमों पर उठी आपत्तियों को लेकर कड़ा रुख अपनाया था। अदालत ने कहा था कि अगली सुनवाई में वीडियो के जरिए यह दिखाया जाएगा कि मानवता की वास्तविक परिभाषा क्या है।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।

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