Divya Mittal Political Entry: उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूर्व नौकरशाह दिव्या मित्तल की एंट्री की घोषणा के बाद सियासी हलकों में चर्चा तेज हो गई है। 2013 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने मंगलवार को राजनीति में आने का ऐलान किया। उन्होंने साफ किया कि वह किसी राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगी और लोगों के साथ मिलकर एक स्वतंत्र राजनीतिक मंच बनाने की दिशा में काम करेंगी।
दिव्या मित्तल ने अगस्त 2026 में करीब 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद IAS से इस्तीफा दिया था। अब उन्होंने उत्तर प्रदेश को अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत का केंद्र बताया है।
किसी राजनीतिक दल का नहीं लेंगी सहारा
दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि वह राजनीति करेंगी, लेकिन किसी राजनीतिक पार्टी के साथ नहीं। उन्होंने जनता के साथ मिलकर काम करने और उन लोगों की आवाज उठाने की बात कही, जिनकी समस्याएं सरकारी तंत्र तक नहीं पहुंच पातीं या पहुंचने के बाद भी उनका समाधान नहीं हो पाता।
अपने प्रशासनिक अनुभव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कई बार सरकारी मंजूरी, फंड और व्यवस्थाएं मौजूद होने के बावजूद लोगों की समस्याएं बनी रहती हैं। उन्होंने स्कूलों, सड़क सुरक्षा, शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया।
IAS से राजनीति तक का सफर
दिव्या मित्तल ने 2013 में IAS सेवा ज्वाइन की थी। प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में जिम्मेदारियां संभालीं। मिर्जापुर की जिलाधिकारी के तौर पर एक पहाड़ी गांव में पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाने के काम को लेकर भी उनका नाम चर्चा में रहा।
अगस्त 2026 में इस्तीफा देने के बाद से ही उनके अगले कदम को लेकर राजनीतिक चर्चाएं चल रही थीं। अब उन्होंने खुद राजनीति में प्रवेश की घोषणा कर इन अटकलों को स्पष्ट कर दिया है।
यूपी में पूर्व नौकरशाहों की सियासी सक्रियता
दिव्या मित्तल की एंट्री के साथ ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूर्व IAS और IPS अधिकारियों की भूमिका एक बार फिर चर्चा में है। हाल के दिनों में पूर्व IAS अधिकारी डॉ. राकेश वर्मा भी कांग्रेस में शामिल हुए हैं। उन्होंने सितंबर 2026 में लखनऊ में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की थी।इससे पहले भी उत्तर प्रदेश समेत देश की राजनीति में कई पूर्व नौकरशाह सक्रिय राजनीति का हिस्सा बन चुके हैं। कुछ अधिकारी राजनीतिक दलों के जरिए चुनावी राजनीति में आए, जबकि कुछ ने स्वतंत्र राजनीतिक मंच या अपनी राजनीतिक पार्टी बनाने का रास्ता अपनाया।
राजनीति में आने वाले पूर्व नौकरशाहों की अलग-अलग राह
पूर्व नौकरशाहों का राजनीति में प्रवेश कई अलग-अलग तरीकों से हुआ है। कुछ ने सीधे राजनीतिक दलों की सदस्यता ली और चुनाव लड़ा, तो कुछ ने राज्यसभा या संगठनात्मक राजनीति के जरिए अपनी भूमिका बनाई।
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री असीम अरुण भी राजनीति में आने से पहले भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी रहे हैं। इसी तरह अरविंद कुमार शर्मा गुजरात कैडर के पूर्व IAS अधिकारी रहे हैं और राजनीति में आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बने।
यानी नौकरशाही से राजनीति तक पहुंचने वाले नेताओं के राजनीतिक सफर एक जैसे नहीं रहे हैं। किसी ने चुनावी राजनीति के जरिए शुरुआत की, किसी ने पार्टी संगठन का रास्ता चुना और कुछ ने स्वतंत्र राजनीतिक मंच बनाने की कोशिश की।
अब चुनाव लड़ने पर क्या है स्थिति?
दिव्या मित्तल ने स्वतंत्र राजनीतिक यात्रा की घोषणा की है। हालांकि, वह किस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगी, इसको लेकर अभी आधिकारिक तौर पर कोई सीट घोषित नहीं हुई है। मीडिया रिपोर्टों में मिर्जापुर से चुनाव लड़ने को लेकर अटकलें सामने आई हैं, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।ऐसे में आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि दिव्या मित्तल अपनी राजनीतिक गतिविधियों को किस क्षेत्र से आगे बढ़ाती हैं और क्या वह आगामी विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरती हैं।दिव्या मित्तल की घोषणा ने एक बार फिर यह चर्चा शुरू कर दी है कि प्रशासनिक सेवा का अनुभव राजनीति में आने के बाद किस तरह इस्तेमाल किया जाता है।
पूर्व अधिकारियों के पास प्रशासन और शासन व्यवस्था का अनुभव होता है, लेकिन चुनावी राजनीति में उनकी भूमिका कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करती है। राजनीतिक दल, संगठन, स्थानीय समीकरण, जनसंपर्क और चुनावी क्षेत्र की परिस्थितियां किसी भी उम्मीदवार की राजनीतिक यात्रा को प्रभावित कर सकती हैं।
फिलहाल दिव्या मित्तल ने पार्टी की बजाय जनता के साथ स्वतंत्र राजनीतिक मंच बनाने का रास्ता चुना है। अब उनकी राजनीतिक गतिविधियां किस दिशा में आगे बढ़ती हैं और क्या वह चुनावी मैदान में उतरती हैं, इस पर नजर रहेगी।
पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल की राजनीति में एंट्री ने उत्तर प्रदेश में नौकरशाही से राजनीति तक के सफर को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। उन्होंने किसी राजनीतिक दल में शामिल होने से इनकार करते हुए स्वतंत्र रूप से राजनीतिक यात्रा शुरू करने की बात कही है।










