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SIR पर घमासान: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, 2 अक्टूबर से देशव्यापी प्रदर्शन

नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने देशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान किया है। वहीं, कांग्रेस ने भी कई राज्यों में प्रदर्शन कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में नामों को लेकर सवाल उठाए हैं।

CJP ने 2 अक्टूबर से प्रदर्शन का किया ऐलान

CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सोमवार को कहा कि संगठन अपनी मांग से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से बाहर किए जाने का आरोप लगाया और मुख्य चुनाव आयुक्त से इस पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण देने की मांग की।CJP ने इससे पहले 24 सितंबर को भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी और 48 घंटे की समयसीमा देते हुए देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी थी। अब संगठन ने कहा है कि 2 अक्टूबर से देशव्यापी प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।

13 करोड़ नाम हटाए जाने का क्या है दावा?

CJP का दावा है कि SIR के दौरान 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से ज्यादा नाम बाहर किए गए हैं। संगठन ने इसे मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए ‘Election Commission Thik Karo’ अभियान शुरू किया है।यह आंकड़ा और इससे जुड़े आरोप राजनीतिक बहस का विषय हैं। रिपोर्टों में भी ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर नामों के बाहर होने की बात सामने आई है, लेकिन किसी व्यक्ति का नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर होना अपने आप में अंतिम रूप से मतदाता सूची से हटाया जाना नहीं माना जा सकता। चुनाव आयोग की SIR सेवा में नागरिकों को अपना नाम खोजने और नोटिस मिलने पर दस्तावेज जमा करने की सुविधा उपलब्ध है।

विवाद के बीच चुनाव आयोग ने कहा है कि SIR से जुड़े आदेश तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बाद जारी किए गए थे। आयोग ने यह भी कहा कि नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े Form 6 में किए गए बदलावों को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है।चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, ज्ञानेश कुमार वर्तमान में मुख्य चुनाव आयुक्त हैं।

मध्य प्रदेश के भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर बढ़ रहे थे, जहां पुलिस ने बैरिकेड लगाए थे।पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की के बाद पुलिस ने पानी की बौछार का इस्तेमाल किया। कांग्रेस ने दावा किया कि इस दौरान तीन कार्यकर्ता घायल हुए। प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी शामिल रहे।

असम के गुवाहाटी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मतदाता सूची और SIR को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग से मतदाता अधिकारों और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर जवाब मांगा।कांग्रेस का आरोप है कि SIR के दौरान मतदाता सूची में अनियमितताएं हुई हैं। ये आरोप कांग्रेस के राजनीतिक दावे हैं; चुनाव आयोग ने SIR की प्रक्रिया को लेकर अपना पक्ष रखा है।

महाराष्ट्र कांग्रेस ने भी 28 सितंबर को राज्यभर में प्रदर्शन का ऐलान किया था। पार्टी ने SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।कांग्रेस ने देशभर में SIR के दौरान करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने का दावा किया है। चुनाव आयोग ने इन आरोपों के जवाब में कहा है कि SIR से जुड़े आदेश तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बाद जारी किए गए थे।

मणिपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कई जिलों में प्रदर्शन किया और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नारेबाजी की। इंफाल ईस्ट और थौबल समेत कुछ क्षेत्रों में प्रदर्शन हुए। कांग्रेस नेताओं ने इसे देशभर में चल रहे अपने अभियान का हिस्सा बताया।SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं के नाम दर्ज रखना है। चुनाव आयोग ने इसके लिए नागरिकों को अपना नाम खोजने और जरूरत पड़ने पर संबंधित दस्तावेज जमा करने की ऑनलाइन सुविधा भी उपलब्ध कराई है।SIR को लेकर चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक और सार्वजनिक बहस जारी है। CJP ने 2 अक्टूबर से देशव्यापी प्रदर्शन की घोषणा की है, जबकि कांग्रेस भी विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन कर रही है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग SIR प्रक्रिया और उससे जुड़े आदेशों पर अपना पक्ष स्पष्ट कर चुका है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और कानूनी प्रक्रिया दोनों महत्वपूर्ण रहेंगी।

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