बिहार में महागठबंधन के चुनावी घोषणा पत्र जारी कर दिया है। 28 अक्टूबर को महागठबंधन की तरफ से घोषणा पत्र तो जारी कर दिया गया लेकिन इसमें चेहरा RJD नेता तेजस्वी यादव को बनाया गया। जो महागठबंधन के CM का फेस भी हैं। बड़ी बात तो ये है कि इस घोषणा पत्र के जरिए एक बात तो साफ हो गई बिहार में चुनाव का जोखिम इस बार RJD के सिर माथे पर है।

“तेजस्वी प्रतिज्ञा” और “तेजस्वी प्रण” के नाम से इस साझा घोषणा पत्र को जारी किया गया. घोषणा पत्र के ऊपर तेजस्वी की बड़ी तस्वीर यह संदेश देने के लिए काफी थी कि इस बार महागठबंधन ने न केवल तेजस्वी यादव को CM उम्मीदवार घोषित किया है, बल्कि तेजस्वी के संकल्प पर ही विधानसभा चुनाव में मतदाताओं के बीच जाने की रणनीति बनाई है।बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग के ठीक आठ दिन पहले महागठबंधन अपना साझा चुनावी घोषणा पत्र जारी कर दिया है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन में शामिल अन्य दलों के नेताओं ने साझा घोषणा पत्र जारी किया। इससे पहले 23 अक्टूबर को तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन के चुनावी मैदान में उतरने पर मुहर लगी थी और आज जब साझा घोषणा पत्र जारी किया गया, तब भी तेजस्वी का ही चेहरा सामने नजर आया।
साल 2020 के विधानसभा चुनाव में भी महागठबंधन ने तेजस्वी यादव के नेतृत्व में चुनाव लड़ा था, लेकिन उस वक्त “न्याय और बदलाव” के स्लोगन के साथ तेजस्वी और उनका गठबंधन जनता के बीच गया था।अब “तेजस्वी प्रण” के साथ जनता के बीच जाने की रणनीति आखिर क्या कहती है, यह समझने की जरूरत है।
साल 2020 में तेजस्वी यादव ने “न्याय और बदलाव” के नारे के साथ सबसे प्रमुख एजेंडा रोजगार को बनाया था, लेकिन पांच साल बाद परिस्थितियां बदल चुकी हैं। तेजस्वी बीते पांच साल में विरोधी दल के नेता भी रहे और 17 महीने तक नीतीश कुमार के साथ सत्ता में भी रहे। सत्ता में रहते हुए तेजस्वी ने रोजगार जैसे एजेंडे पर काम भी करके दिखाया।अब बदली हुई परिस्थितियों में तेजस्वी ने रोजगार से दो कदम आगे बढ़ते हुए महिला सशक्तिकरण समेत समाज के अन्य वर्गों के लिए भी अपने और महागठबंधन के चुनावी घोषणा पत्र में वादे किए हैं।तेजस्वी ने अपनी सरकार बनने पर जहां एक तरफ सवा करोड़ रोजगार देने का वादा किया है, वहीं “हर घर नौकरी” का ऐलान वह पहले ही कर चुके हैं। पांच साल पहले तेजस्वी यादव भले ही नीतीश कुमार के साथ खड़ी महिला वोट बैंक की ताकत को न समझ पाए हों, लेकिन अब वे समझ चुके हैं कि महिला वोटर जीत में निर्णायक भूमिका निभाती हैं। यही वजह है कि तेजस्वी ने “MAA” और “BETI” जैसी योजनाओं के ज़रिए यह ऐलान किया है कि महिलाओं को हर महीने आर्थिक मदद दी जाएगी।
तेजस्वी की नजर 2020 में संविदाकर्मियों के वोट बैंक पर नहीं गई थी, लेकिन इस बार उन्होंने उनकी सेवा स्थाई करने का कार्ड खेलकर NDA के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है। महिला वोटर्स को साधने के लिए तेजस्वी चुनाव की घोषणा से पहले से ही “माई बहिन योजना” को लेकर चर्चा कर रहे थे। नीतीश सरकार ने चुनाव की घोषणा से पहले ही “मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना” लागू करते हुए महिला लाभार्थियों के खाते में 10 हजार रुपए की पहली आर्थिक मदद भेज दी। तेजस्वी, NDA सरकार के इस फैसले को महागठबंधन के साझा घोषणा पत्र के ज़रिए काउंटर करते नजर आए हैं। उन्होंने हर महीने महिलाओं को 2500 रुपये की आर्थिक मदद देने की पेशकश की है। इतना ही नहीं, तेजस्वी यादव ने कामगारों को भी साझा घोषणा पत्र में किए गए वादों के ज़रिए आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है।
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि 2020 में तेजस्वी यादव की ओर से “न्याय और बदलाव” के स्लोगन के साथ जो चुनावी वादे और एजेंडा जनता के बीच रखे गए थे, वे उतने परिपक्व नहीं थे।तेजस्वी लालू प्रसाद यादव के सामाजिक न्याय की परछाई से बहुत आगे नहीं बढ़ पाए थे, लेकिन अब उन्होंने अपने चेहरे के साथ नए वादों के ज़रिए समाज के हर वर्ग के वोटरों तक पहुंचने की कोशिश की है।