बांग्लादेश की राजनीति में भूचाल लाने वाले एक ऐतिहासिक फैसले में इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को हत्या करने के आदेश और हत्या के मामलों में मौत की सजा सुनाई है। ट्रिब्यूनल ने उन्हें कुल पाँच आरोपों में से तीन में दोषी माना, जबकि दो मामलों में उम्रकैद की सजा दी गई है।फैसला सुनाए जाने के दौरान कोर्टरूम में मौजूद कई लोगों ने तालियाँ बजाईं जो इस मुकदमे के राजनीतिक और सामाजिक असर का बड़ा संकेत माना जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?
ट्रिब्यूनल ने कहा कि जुलाई–अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में 1,400 लोगों की हत्या, करीब 25,000 लोगों के घायल होने और कई शहरों में आगजनी व दमन के लिए हसीना मुख्य रूप से जिम्मेदार” है।अभियोजन पक्ष के वकील ताजुल इस्लाम ने अदालत को बताया कि हसीना ने छात्रों को रजाकारों की औलाद’ कहकर भड़काया और प्रदर्शन दबाने के लिए ड्रोन, हेलिकॉप्टर और घातक हथियारों के इस्तेमाल का आदेश दिया।कईं जगहों पर फायरिंग, टॉर्चर और दमन को प्रोत्साहन दिया।सरकारी वकील ने मृतकों की पूरी सूची अदालत में सौंपी।
बड़े आरोप जिन पर ट्रिब्यूनल ने फैसला दिया
हत्या और हत्या के प्रयास को उकसाने का आरोप में मौत की सजा सुनाई गई।चार्जशीट के अनुसार हसीना ने पुलिस और अवामी लीग के हथियारबंद समर्थकों को आम नागरिकों पर हमला करने के लिए उकसाया।
हिंसक दमन के लिए आदेश देना।जिसके लिए अदालत ने शेख हसीना को मौत की सजा सुनाई।छात्र विरोध को दबाने के लिए हसीना ने सैन्य-स्तर के संसाधनों के इस्तेमाल का आदेश दिया था।
न्याय में बाधा डालना व सबूत मिटाना के इस्जाम में शेख हसीना को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
छात्र अबू सैयद की हत्या का आदेश में भी शेख हसीना को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
चांखारपुल में 5 प्रदर्शनकारियों की हत्या और शव जलाने का आरोप में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।ट्रिब्यूनल के 453 पेज के जजमेंट में कहा गया है कि हसीना ने “सत्ता का दुरुपयोग करते हुए साजिश रची और हिंसा को बढ़ावा दिया।”
अन्य आरोपी कौन हैं?
इस हिंसा में शेख हसीना को ही नहीं अपितु पूर्व गृहमंत्री असदुज्जमां खान को भी दोषी करार किया गया है। 12 हत्याओं के मामले में उन्हे मौत की सजा सुनाई गई है।पूर्व IGP चौधरी अब्दुल्ला अल-ममून को 5 साल की सजा सुनाई गई है।सरकारी गवाह बनने के कारण पूर्व IGP चौधरी को कम सजा सुनाई गई है।उन्होंने कोर्ट में माना कि “PM निवास पर रोज़ मीटिंग में हिंसा की रणनीति बनती थी।मैं मजबूर था, लेकिन अब कोर्ट से माफी मांगता हूँ।”दोषियों को 30 दिनों में बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट में अपील का अधिकार है, लेकिन एक महत्वपूर्ण शर्त है कि यह अपील केवल बांग्लादेश में मौजूद होकर ही की जा सकती है।इसका मतलब:भारत में शरण लिए हसीना और असदुज्जमां को अपील के लिए बांग्लादेश लौटना होगा जहाँ पहुंचते ही मौत की सजा तुरंत लागू की जा सकती है।

भारत में रह रहीं शेख हसीना ने कहा कि यह फैसला पक्षपाती और राजनीतिक बदले की कार्रवाई है।ट्रिब्यूनल को एक गैर-निर्वाचित सरकार चला रही है जिसके पास जनादेश नहीं।यह अवामी लीग को खत्म करने की साजिश है।अंतरिम यूनुस सरकार ने कहा कि यह ऐतिहासिक फैसला है।सरकार ने जनता से शांत रहने की अपील करते हुए कहा कि कानून का शासन स्थापित हुआ है।किसी भी प्रकार की हिंसा, भड़काऊ हरकत या गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।अवामी लीग ने घोषणा कि है 18 नवंबर को बांग्लादेश बंद का आह्वाहन किया है।










