बांग्लादेश की राजधानी ढाका के मोहाखाली स्थित कराइल स्लम में भीषण आग लग गई। जिसने हजारों लोगों को बेघर कर दिया। घनी आबादी और बेहद संकरी गलियों के कारण आग ने कुछ ही मिनटों में बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। आग पर काबू पाने के लिए फायर सर्विस की 20 गाड़ियाँ कई घंटों तक मशक्कत करती रहीं। घटना के कारणों का अभी तक पता नहीं चल सका है।बताया जा रहा है कि आग शाम 5.22 बजे लगी थी जिसके लिए 11 दमकल की यूनिटों को भेजा गया था। लेकिन आग इतनी तेजी से फैली कि बाद में अतिरिक्त यूनिटें भेजकर कुल संख्या 20 कर दी गई।घटना की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दमकल विभाग को पानी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पाइपों को कराइल झील तक ले जाना पड़ा।

ढाका के फायर अधिकारियों ने बताया कि कराइल स्लम में बेहद संकरी गलियाँ,लकड़ी, टिन और प्लास्टिक की अस्थायी झोपड़ियाँ हैं।जिसमें 80 हजार से अधिक आबादी का घनत्व है।इन सभी कारणों से आग तेजी से फैलती गई और दमकल की गाड़ियों को केंद्र तक पहुँचने में मुश्किल हुई।दमकल विभाग के शीर्ष अधिकारी ने बताया कि “भीड़ इतनी ज्यादा थी कि पुलिस की मदद से तमाशबीनों को हटाने में समय लगा, जिसके कारण आग बुझाने का काम प्रभावित हुआ।”प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आग की लपटें अनियंत्रित थीं।आग कुछ ही मिनटों में दर्जनों घरों में फैल गई।धुएँ का गुबार दूर-दूर तक दिखाई दे रहा था।लोग बच्चों और बुजुर्गों को उठाकर भागते नजर आए।दमकल विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि लगातार प्रयासों के बाद आग पर रात को 10:00–10:35 बजे के बीच “काफी हद तक” काबू पाया गया ।हालाँकि अब भी आग को पूरी तरह बुझाने का काम अभी जारी है।

प्रशासन ने फिलहाल किसी भी आधिकारिक नुकसान के आँकड़े जारी नहीं किए हैं।हालाँकि प्रारंभिक अनुमान है कि सैकड़ों झोपड़ियाँ जलकर खाक हो गईं।हजारों लोग बेघर हो चुके हैं।लोगों के कई जरूरी दस्तावेज, सामान और आजीविका के साधन नष्ट हो गए।राहत और पुनर्वास के लिए अतिरिक्त बल और स्थानीय संस्थाएँ मौके पर पहुंच रही हैं।
करीब 90 एकड़ में फैला कराइल स्लम ढाका का सबसे बड़ा और पुराने स्लमों में शामिल है, जहां लगभग 80,000 से अधिक लोग रहते हैं।अधिकांश घर टिन की चादरों व लकड़ी और प्लास्टिक और अस्थायी सामग्री से बने होते हैं, जिसके कारण आग जैसी दुर्घटनाएँ तेजी से फैल जाती हैं।यह क्षेत्र लंबे समय से अवैध बिजली कनेक्शन, भीड़भाड़ और कमजोर बुनियादी ढांचे की समस्या झेलता आ रहा है।










