अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने शरणार्थी नीति में बड़ा और विवादित बदलाव किया है। ट्रंप प्रशासन ने वित्तीय वर्ष 2026 के लिए शरणार्थियों की प्रवेश संख्या में भारी कटौती की है। नई नीति के तहत अब अमेरिका सिर्फ़ 7,500 शरणार्थियों को ही प्रवेश देगा और इसमें भी सबसे ज़्यादा प्राथमिकता श्वेत दक्षिण अफ्रीकी नागरिकों को दी जाएगी।कार्यभार संभालने के बाद से ही ट्रंप शरणार्थी आगमन पर सख़्त रुख अपनाए हुए हैं। उन्होंने पहले ही शरणार्थी कार्यक्रम को रोक दिया था, लेकिन अब उन्होंने अपवाद बनाते हुए श्वेत दक्षिण अफ्रीकियों को विशेष प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। हालांकि दक्षिण अफ्रीकी सरकार ने दावा किया है कि उनके यहाँ ऐसे किसी उत्पीड़न की स्थिति नहीं है, फिर भी ट्रंप प्रशासन ने यह कदम उठाया है।

नए फैसले के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026 में अमेरिका केवल 7,500 शरणार्थियों को स्वीकार करेगा, जबकि इसके विपरीत डेमोक्रेट राष्ट्रपति जो बाइडेन के समय यह संख्या हर साल 1 लाख से भी अधिक थी। प्रशासन द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि अधिकांश स्थान दक्षिण अफ्रीका के अफ्रीकन समुदाय के बीच वितरित किए जाएंगे, साथ ही उन लोगों को भी प्राथमिकता दी जाएगी जिन्हें अपने देशों में अवैध या अन्यायपूर्ण भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।ट्रंप ने अपने चुनाव अभियान में भी लाखों अवैध प्रवासियों को देश से बाहर निकालने का वादा किया था और जनवरी में उन्होंने शरणार्थी प्रवेश कार्यक्रम को निलंबित करने वाले एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इस नई नीति को उसी कड़े रुख की अगली कड़ी माना जा रहा है।
इसी बीच, अमेरिकी इमिग्रेशन काउंसिल के वरिष्ठ फेलो आरोन रीचलिन–मेलनिक ने टिप्पणी करते हुए कहा कि 1980 से अब तक अमेरिका इस कार्यक्रम के तहत दो मिलियन से ज़्यादा उत्पीड़न झेल रहे लोगों को शरण दे चुका है, लेकिन अब यह कार्यक्रम एक तरह से “श्वेत आप्रवासन के मार्ग” में बदलता दिख रहा है।

ट्रंप प्रशासन के इस फैसले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचनाएँ शुरू हो चुकी हैं, जबकि समर्थक इसे “अमेरिका फर्स्ट” नीति का हिस्सा बता रहे हैं। आने वाले दिनों में यह कदम अमेरिकी आव्रजन नीति को किस दिशा में ले जाएगा—इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।










