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Iran समझौता विवाद में जेडी वेंस पर बढ़ा राजनीतिक जोखिम

अमेरिकी राजनीति में इस समय ईरान समझौते को लेकर बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल रहा है, जिसमें उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को इस पूरे मिशन का प्रमुख चेहरा माना जा रहा है। ट्रंप प्रशासन द्वारा शुरू किए गए इस कूटनीतिक प्रयास में वेंस लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और समझौते के समर्थन में खुलकर सामने आ रहे हैं। जेडी वेंस इस सप्ताह कई इंटरव्यू और सार्वजनिक बयानों के जरिए इस समझौते का बचाव करते नजर आए। उन्होंने मीडिया के सामने इस डील को अमेरिका की विदेश नीति के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है और इसे सफल दिशा में उठाया गया कदम करार दिया है। इस समझौते को लेकर रिपब्लिकन पार्टी के भीतर ही कई तरह की शंकाएं और बहस देखने को मिल रही हैं। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि ईरान के साथ किसी भी तरह का समझौता जोखिम भरा हो सकता है और इसका असर आने वाले चुनावों पर भी पड़ सकता है। शुरुआत में जब ट्रंप प्रशासन ने ईरान विवाद को लेकर सख्त रुख अपनाया था, तब जेडी वेंस इस मुद्दे पर ज्यादा सक्रिय रूप से सामने नहीं आए थे। लेकिन अब हालात बदलने के बाद वह इस पूरे समझौते के सबसे मजबूत समर्थक बनकर उभरे हैं। आने वाले दिनों में वेंस स्विट्जरलैंड भी जा सकते हैं, जहां ईरान के साथ बातचीत के नए दौर की शुरुआत होने की संभावना है। यह बैठक इस पूरे समझौते की दिशा तय करने में अहम मानी जा रही है। इससे पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि जेडी वेंस इस समझौते के औपचारिक हस्ताक्षर समारोह में शामिल होंगे, लेकिन अंतिम समय में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वयं इस पर हस्ताक्षर कर दिए। यह समझौता अगर सफल होता है तो जेडी वेंस की राजनीतिक छवि को बड़ा फायदा मिल सकता है, लेकिन किसी भी तरह की विफलता उनके भविष्य के राजनीतिक लक्ष्य और 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की संभावनाओं को प्रभावित कर सकती है। यह समझौता न केवल अमेरिका-ईरान संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि अमेरिकी राजनीति में भी इसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

समझौते का चेहरा बने वेंस, जोखिम भी बढ़ा

ईरान संघर्ष को खत्म करने के प्रयासों के बीच अब उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का नाम इस पूरे कूटनीतिक समझौते से गहराई से जुड़ता जा रहा है। माना जा रहा है कि यह समझौता उनके राजनीतिक करियर के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है, खासकर तब जब वह 2028 में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में उतरने की योजना बनाते हैं। यदि यह समझौता सफल रहता है और ईरान के साथ तनाव कम होता है, तो वेंस को एक ऐसे नेता के रूप में देखा जा सकता है जिन्होंने एक लंबे और विवादित संघर्ष को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे उनकी छवि को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिल सकती है। दूसरी ओर, अगर यह समझौता विफल होता है या स्थिति फिर से तनावपूर्ण हो जाती है, तो राजनीतिक रूप से इसका सीधा असर जेडी वेंस पर पड़ सकता है। विपक्ष और आलोचक उन्हें इस असफलता के लिए जिम्मेदार ठहराने की कोशिश कर सकते हैं, जिससे उनकी 2028 की संभावनाओं पर भी सवाल उठ सकते हैं। इस बीच पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर हल्के अंदाज में टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर समझौता सफल होता है तो इसका श्रेय वे लेंगे, लेकिन अगर इसमें कोई समस्या आती है तो जेडी वेंस को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। व्हाइट हाउस की ओर से जारी आधिकारिक बयान में जेडी वेंस को राष्ट्रपति का बेहद भरोसेमंद सहयोगी और राष्ट्रीय सुरक्षा टीम का अहम हिस्सा बताया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वेंस को विशेष दूतों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के साथ इन वार्ताओं में प्रमुख भूमिका सौंपी गई है। व्हाइट हाउस प्रवक्ता ओलिविया वेल्स के अनुसार, यह निर्णय इस वजह से लिया गया क्योंकि जेडी वेंस पर राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी टीम का पूरा भरोसा है। उनका मानना है कि वेंस की भागीदारी से बातचीत की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी और संतुलित बन रही है। प्रशासन का यह भी कहना है कि युद्ध के मैदान और कूटनीतिक वार्ताओं दोनों स्तरों पर जो प्रगति हुई है, वह अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा को लंबे समय तक मजबूत करने में मदद करेगी। आने वाले समय में यह समझौता अमेरिका की विदेश नीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

समझौते के ब्योरे पर बढ़ा विरोध

रविवार को अमेरिका द्वारा ईरान के साथ समझौता ज्ञापन पर डिजिटल साइन होने के बाद इस सप्ताह विरोध बढ़ने लगा। इसमें कंजरवेटिव पक्ष की आवाजें भी सम्मिलित रहीं। उपराष्ट्रपति के प्रवक्ता ल्यूक श्रोडर ने कहा कि यह अफसोस का विषय है कि कुछ रिपब्लिकन मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने और ईरान को कभी परमाणु हथियार प्राप्त करने की राष्ट्रपति की कोशिशों को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। समझौते का दस्तावेज कब पेश किया जाएगा, इस सवाल पर अधिकारियों के उत्तर बदलते रहे। इस दौरान ड्राफ्ट की लीक हुई कॉपियों पर डेमोक्रेट और रिपब्लिकन सांसदों के साथ इजरायल और इजरायल समर्थक संगठनों ने नाराजगी और संदेह व्यक्त किया। आलोचकों का कहना है कि 2 महीने की वार्ता का समय खोलने के लिए बने इस समझौते में ईरान को शुरुआत में फायदा होता नजर रहा है, जबकि प्रतिक्रिया में बहुत कम सुरक्षा है। इसी प्रकार, ट्रंप ने जो कारण संघर्ष शुरू करने का बताया था, अर्थात् ईरान को परमाणु हथियार प्राप्त करने से रोकना, वह मुद्दा अब भी अधूरा है। र्वेस बार-बार कह रहे हैं कि ईरान को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होगा। उन्होंने मंगलवार को फॉक्स न्यूज चैनल के शो फॉक्स एंड फ्रेंड्स में बताया, अगर वे सही तरीके से नहीं चलते हैं, तो उन्हें इस समझौते का कोई लाभ नहीं होगा। बढ़ती चिंताओं और आपत्तियों के बीच अमेरिका ने बुधवार को पत्रकारों को समझौते का मसौदा सौंप दिया। इसमें यह बताया गया है कि ईरान के मुख्य समृद्ध यूरेनियम भंडार, जो कि मलबे में दबे होने की आशंका है, को अंतरराष्ट्रीय निगरानी के तहत कम से कम पतला किया जाना आवश्यक है। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि ईरान तो परमाणु हथियार खरीदेगा और ही बनाएगा, हालांकि वह ऐसी प्रतिबद्धता पहले भी दिखा चुका है।

ट्रंप खेमे में दरार, वेंस की सफाई

यह संघर्ष अब चौथे महीने में पहुँच चुका है और इसने ट्रंप के मेक अमेरिका ग्रेट अगेन गठबंधन में फूट पैदा कर दी है। एक तरफ वे लोग हैं जो ईरान के खिलाफ कठोर कदम उठाने की मांग कर रहे थे, और दूसरी तरफ वे लोग हैं जो ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट विदेश नीति और नो न्यू वॉर्स के विचार से जुड़े थे। रिपब्लिकन विरोधी भी अब वेंस के कर्तव्यों पर सवाल उठा रहे हैं. यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह समझौता 2015 में डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय के परमाणु समझौते के समान है, और क्या यह नया समझौता ट्रंप के घोषित युद्ध लक्ष्यों को पूरा करता है। साउथ कैरोलिना के रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम, जिन्हें ट्रंप का समर्थक और ईरान पर कड़ा रुख अपनाने वाला नेता माना जाता है, पहले इस समझौते को लेकर अनिश्चित थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर वेंस को इस सौदे का रचनाकार बताया था। समझौता घोषित होने के बाद ग्राहम ने थोड़ा समर्थन देते हुए कहा कि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अन्य मुद्दों पर कोई मान्य और प्रमाणित समझौता कर सकेगा या नहीं, यह अभी निश्चित नहीं है, लेकिन प्रयास करने में उन्हें कम नुकसान नजर आता है। डेली वायर के राय संपादक बेन डोमेनेक ने फॉक्स न्यूज पर बताया कि इस समझौते के बारे में उनकी जो सुनवाई है, वह अच्छी नहीं है। उन्होंने वेंस की पहली किताब हिलबिली एलेजी का उल्लेख करते हुए व्यंग्य किया और पूछा कि क्या रिपब्लिकन पार्टी किसी प्रकार की हिलबिली ओबामा जैसी पार्टी बनती जा रही है। ट्रंप प्रशासन ने कांग्रेस को समझौता ज्ञापन के विवरण पर आधिकारिक जानकारी नहीं दी है, परंतु वेंस ने कैपिटल हिल पर कुछ रिपब्लिकन सीनेटरों से गुपचुप संपर्क करना शुरू कर दिया है। ओहायो के रिपब्लिकन सीनेटर बर्नी मोरेनो, जो वेंस के निकट मित्र हैं|
नॉर्थ डकोटा के रिपब्लिकन सीनेटर केविन क्रेमर ने कहा कि यह समझौता वेंस की राष्ट्रीय सुरक्षा और भू-राजनीतिक ज्ञान को निश्चित रूप से बढ़ाता है। वेंस ओहायो से 2 वर्षों तक अमेरिकी सीनेटर रहे, फिर वे उपराष्ट्रपति बने। हालांकि क्रेमर ने यह स्वीकार किया कि यदि समझौता विफल होता है तो खतरा बना रहेगा। उन्हें कहना था कि यह एक सकारात्मक पहलू माना जा सकता है कि यदि आप शीर्ष व्यक्ति नहीं हैं, तो आप श्रेय प्राप्त कर सकते हैं और जोखिम या आलोचना से बच सकते हैं, लेकिन शायद यह इतना सरल नहीं है। इस हफ्ते के इंटरव्यू में वेंस ने अपनी पार्टी के सवाल उठाने वालों से सीधे संवाद स्थापित करने का प्रयास किया। मेगिन केली के शो में उन्होंने बताया कि आलोचक इस समझौते को लेकर ईरानी प्रचार पर निर्भर हैं, साथ ही उन्होंने पार्टी के कठोर रुख वाले सदस्यों की कुछ नाराजगी को स्वीकार किया और गैर-हस्तक्षेपवादी लोगों को यकीन दिलाने की कोशिशी कि ईरान का यह संघर्ष इराक युद्ध जैसा नहीं है, जहां वह मरीन के रूप में रह चुके हैं। वेंस ने कहा कि हम कभी उस प्रकार की मुश्किल स्थिति में नहीं पड़ने वाले थे, जिसकी चिंता बहुत से लोग कर रहे हैं, क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप जॉर्ज डब्ल्यू बुश नहीं हैं। डेमोक्रेटिक नेताओं का कहना है कि वेंस ही नहीं, ईरान समझौते का प्रतीक बनने के साथ, इस प्रशासन के हर ऐसे नेता जो राष्ट्रपति पद की इच्छा रखते हैं, इस परिणाम से प्रभावित होंगे। इसमें विदेश मंत्री मार्को रुबियो का उल्लेख भी किया जा रहा है, जो समझौते के अंतिम चरणों में काफी हद तक मौन रहें। इस प्रशासन का कोई भी सदस्य ईरान युद्ध और आर्थिक मामलों के संदर्भ में ही ऊपर जाएगा या नीचे।

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