सरकार ने LNG टैंकर के बारे में क्या बताया था?
बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी थी कि एलएनजी टैंकर “दिशा” के निर्धारित समय के अनुसार दाहेज बंदरगाह पर पहुंचने की संभावना है। उन्होंने बताया कि जहाज अपनी यात्रा के अंतिम चरण में है और सभी आवश्यक प्रक्रियाओं पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। यह माल्टा के ध्वज वाला एलएनजी टैंकर है, जिसने 15 जून को अपनी यात्रा के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार किया था। इस दौरान जहाज ने लगभग 62,370 मीट्रिक टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का परिवहन किया। उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इस जहाज की यात्रा को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। होर्मुज जैसे संवेदनशील समुद्री मार्ग से सुरक्षित गुजरना भारत की ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक सकारात्मक संकेत है। टैंकर के दाहेज बंदरगाह पर पहुंचने के बाद इसे पेट्रोनेट एलएनजी टर्मिनल में उतारा जाएगा। इसके बाद गैस को देश की घरेलू ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली में शामिल किया जाएगा, जिससे मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। ऐसे में एलएनजी की सुरक्षित और समय पर आपूर्ति को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

कतर से LNG खरीदता है भारत
भारत अपनी प्राकृतिक गैस की मांग का करीब आधा हिस्सा एलएनजी के आयात के माध्यम से पूरा करता है, जिसमें से लगभग 65 फीसदी आपूर्ति कतर जैसे खाड़ी देश से की जाती है और ये होर्मुज समुद्री रास्ते के जरिए भेजी जाती है. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले शुरू करने के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए होर्मुज को बंद कर दिया. इस सप्ताह की शुरुआत में जब अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता हुआ तो तेहरान ने 60 दिनों के लिए जहाजों की आवाजाही को बिना किसी फीस के जाने को मंजूरी दी. भारत की ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था को लेकर एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से तनाव और भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण प्रभावित हो रहे वैश्विक ऊर्जा मार्गों के बीच एक एलएनजी (Liquefied Natural Gas) टैंकर सुरक्षित रूप से भारत पहुंचा है। इस टैंकर के आगमन को ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। यह एलएनजी टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते हुए गुजरात के दाहेज बंदरगाह पर पहुंचा। बताया जा रहा है कि यह माल्टा के झंडे वाला जहाज है, जिसमें बड़ी मात्रा में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) लाई गई है। कठिन परिस्थितियों और क्षेत्रीय तनाव के बीच इसका सुरक्षित पहुंचना भारत के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। होर्मुज जलमार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस रास्ते से दुनिया के बड़े हिस्से की ऊर्जा आपूर्ति होती है, खासकर एशियाई देशों को। ऐसे में यहां किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर ऊर्जा बाजार और कीमतों पर पड़ता है। भारत अपनी प्राकृतिक गैस की मांग का लगभग आधा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। इनमें से बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों, विशेषकर कतर से आता है। यह आपूर्ति मुख्य रूप से समुद्री मार्गों के जरिए ही भारत तक पहुंचती है, जिनमें होर्मुज मार्ग सबसे अहम है।
हाल के समय में ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव के कारण इस क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई थी। इसके चलते ऊर्जा आपूर्ति को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता जताई जा रही थी। ऐसे माहौल में किसी भी टैंकर का सुरक्षित रूप से गुजरना काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। संबंधित एलएनजी जहाज तय समय के अनुसार दाहेज पोर्ट पर पहुंचा। यहां इसे आवश्यक प्रक्रियाओं के बाद ऊर्जा ग्रिड में शामिल किया जाएगा ताकि घरेलू मांग को पूरा किया जा सके। इस घटना को भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति के लिए भी अहम माना जा रहा है। देश लगातार ऊर्जा स्रोतों को विविध बनाने और आयात पर निर्भरता को संतुलित करने की दिशा में काम कर रहा है। वैश्विक अस्थिरता के बीच इस तरह की सफल आपूर्ति यह दर्शाती है कि भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला अभी भी मजबूत बनी हुई है। इससे औद्योगिक गतिविधियों और घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना है। ऊर्जा क्षेत्र के जानकार यह भी मानते हैं कि आने वाले समय में भारत को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों पर और अधिक ध्यान देना होगा, ताकि ऐसी भू-राजनीतिक परिस्थितियों का असर कम से कम हो। यह एलएनजी टैंकर का सुरक्षित भारत पहुंचना न केवल एक लॉजिस्टिक सफलता है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर एक सकारात्मक संकेत भी है, जो देश की आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती प्रदान करता है।