बजट बहस में निर्मला सीतारमण का बड़ा बयान, रोजगार सृजन पर सरकार का फोकस
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान सरकार की आर्थिक नीतियों, रोजगार सृजन और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने की योजनाओं को विस्तार से सामने रखा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह बजट केवल घोषणाओं और वादों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें रोजगार, उद्योग और स्टार्टअप्स के लिए ठोस और व्यावहारिक रोडमैप तैयार किया गया है।
लोकसभा को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने इस बजट में श्रम प्रधान क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है, ताकि ज्यादा से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकें। उन्होंने बताया कि बायोफार्मा सेक्टर पर विशेष फोकस किया गया है, जिससे न केवल देश की स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होंगी, बल्कि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार भी सृजित होंगे।
वित्त मंत्री ने स्टार्टअप्स को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि उनके विस्तार के लिए बड़े डोमेन और बेहतर इकोसिस्टम उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार स्टार्टअप्स को तकनीक, फंडिंग और बाजार तक पहुंच देने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। इसके साथ ही मेगा टेक्सटाइल पार्कों के विकास के लिए केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर काम करने को पूरी तरह तैयार है, जिससे कपड़ा उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा।

आर्थिक आंकड़ों का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि इस बजट में सकल कर प्राप्तियां 44.04 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो कि 2025-26 के अनुमानित राजस्व से लगभग 8 प्रतिशत अधिक है। इसका मतलब है कि कर संग्रह में करीब 3.26 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने बताया कि 2026-27 के लिए कुल सरकारी व्यय 53.47 लाख करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है, जो कर प्राप्तियों से कहीं अधिक है। इससे साफ है कि सरकार विकास और कल्याणकारी योजनाओं पर बड़े पैमाने पर खर्च करने के लिए प्रतिबद्ध है।
वित्त मंत्री ने पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि पूंजीगत व्यय 12.22 लाख करोड़ रुपये आंका गया है, जो देश की जीडीपी का 3.1 प्रतिशत है और 2025-26 के अनुमानित राजस्व से 11.5 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि यह निवेश बुनियादी ढांचे, उद्योग, परिवहन और निर्माण क्षेत्रों को मजबूती देगा, जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
राज्यों को मिलने वाली वित्तीय सहायता पर विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि वित्त आयोग ने 2018-19 से 2022-23 तक केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को हस्तांतरित किए गए फंड का गहन अध्ययन किया है और निष्कर्ष निकाला है कि केंद्र ने सभी वर्षों में वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार पूरी राशि राज्यों को दी है।
उन्होंने कहा, “हम यह दावा अकेले नहीं कर रहे हैं, बल्कि वित्त आयोग की रिपोर्ट खुद इस बात की पुष्टि करती है कि राज्यों को उनका पूरा हक दिया गया है। इसमें किसी भी प्रकार के संदेह की कोई गुंजाइश नहीं है।”
कुल मिलाकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट को विकासोन्मुख, रोजगारपरक और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बताया। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य एक मजबूत, आत्मनिर्भर और समावेशी भारत का निर्माण करना है, जिसमें युवाओं को रोजगार, उद्यमियों को अवसर और राज्यों को पूरा सहयोग मिले










