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BANGLADESH की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का 80 वर्ष की उम्र में निधन, लंबी बीमारी से जूझ रही थी,BNP ने की पुष्टि

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की प्रमुख नेता बेगम खालिदा जिया का मंगलवार, 30 दिसंबर को सुबह 6 बजे ढाका के एवरकेयर अस्पताल में निधन हो गया। वह 80 वर्ष की थीं और लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं। BNP ने उनके निधन की आधिकारिक पुष्टि की है।

पार्टी के अनुसार, खालिदा जिया किडनी और हृदय रोग के साथ-साथ निमोनिया से पीड़ित थीं। इसके अलावा उन्हें लिवर सिरोसिस, गठिया, मधुमेह, फेफड़ों और आंखों से जुड़ी जटिल समस्याएं भी थीं। सांस लेने में तकलीफ के चलते उन्हें 23 नवंबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इससे पहले जून 2024 में उनकी हार्ट पेसमेकर सर्जरी भी हुई थी।

दो बार रहीं प्रधानमंत्री, पहली महिला पीएम

खालिदा जिया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं। उन्होंने पहली बार 20 मार्च 1991 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और 1996 तक देश का नेतृत्व किया। इसके बाद 2001 से 2006 तक वह दूसरी बार प्रधानमंत्री रहीं। 2001 के चुनाव में BNP को दो-तिहाई बहुमत हासिल हुआ था।

राजनीति में प्रवेश और संघर्षपूर्ण सफर

15 अगस्त 1945 को तत्कालीन ब्रिटिश भारत के दिनाजपुर जिले (अब बांग्लादेश) में जन्मी खालिदा जिया का शुरुआती जीवन राजनीति से दूर रहा। 1960 में उनकी शादी सैन्य अधिकारी जियाउर रहमान से हुई, जो आगे चलकर बांग्लादेश के राष्ट्रपति बने और BNP की स्थापना की।30 मई 1981 को जियाउर रहमान की हत्या के बाद खालिदा जिया ने राजनीति में कदम रखा। 1984 में उन्होंने BNP की कमान संभाली और 1991 में लोकतंत्र की बहाली के बाद प्रधानमंत्री बनीं।

जेल, आरोप और विवाद

सत्ता से बाहर रहने के दौरान खालिदा जिया को भ्रष्टाचार के मामलों में जेल और नजरबंदी का सामना करना पड़ा। BNP ने इन आरोपों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया, जबकि सरकार ने इसे कानून की प्रक्रिया करार दिया। 2007 में सेना समर्थित केयरटेकर सरकार के दौरान उन्हें जेल भेजा गया था और 2008 में रिहा किया गया।राजनीतिक उथल-पुथल के बीच 6 अगस्त 2024 को उन्हें जेल से रिहा किया गया, जिसके बाद बेहतर इलाज के लिए वह लंदन गईं। चार महीने बाद 6 मई को वह बांग्लादेश लौटी थीं।

‘बैटल ऑफ बेगम्स’ और शेख हसीना से प्रतिद्वंद्विता

खालिदा जिया और अवामी लीग की नेता शेख हसीना के बीच दशकों पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता ने बांग्लादेश की राजनीति को दो ध्रुवों में बांट दिया। मीडिया ने इसे ‘बैटल ऑफ बेगम्स’ नाम दिया। 1990 के बाद हुए लगभग हर चुनाव में सत्ता या तो शेख हसीना के पास रही या खालिदा जिया के पास।

परिवार

खालिदा जिया के बड़े बेटे और BNP के कार्यकारी अध्यक्ष तारीक रहमान लंबे समय तक लंदन में रहे और हाल ही में बांग्लादेश लौटे थे। उनके छोटे बेटे अराफात रहमान का 2015 में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था।

शोक की लहर

खालिदा जिया के निधन के साथ ही बांग्लादेश की राजनीति के एक लंबे, संघर्षपूर्ण और निर्णायक अध्याय का अंत हो गया है। देश और विदेश से नेताओं, समर्थकों और शुभचिंतकों के शोक संदेश लगातार आ रहे हैं।उनका जाना बांग्लादेश की सियासत में एक ऐसे दौर का अंत माना जा रहा है, जिसने देश की राजनीति को दशकों तक दिशा दी।

 

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