उन्नाव दुष्कर्म मामले में दोषी पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को माननीय सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने माननीय दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित करते हुए जमानत दी गई थी। माननीय अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई तक कुलदीप सेंगर जेल में ही रहेगा।

सोमवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की वेकेशन बेंच ने CBI की याचिका पर सुनवाई करते हुए सेंगर को नोटिस जारी किया और जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी।
CBI ने माननीय हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती
CBI की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से माननीय दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। उन्होंने दलील दी कि यह मामला बेहद गंभीर है और इसमें कई अहम कानूनी सवाल जुड़े हुए हैं। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दलीलें सुनने के बाद माननीय हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी।
माननीय दिल्ली हाईकोर्ट ने क्यों दी थी जमानत?
माननीय दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 दिसंबर को अपने आदेश में कहा था कि कुलदीप सेंगर करीब 7 साल 5 महीने जेल में बिता चुका है। उसकी अपील लंबित रहने तक उम्रकैद की सजा को निलंबित किया गया था। सेंगर ने दिसंबर 2019 में माननीय निचली अदालत द्वारा सुनाए गए दोषसिद्धि के फैसले को चुनौती दी थी।
अन्य मामले में भी सजा काट रहा है सेंगर
हालांकि, बलात्कार मामले में जमानत मिलने के बावजूद कुलदीप सेंगर की रिहाई संभव नहीं थी। वह पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में 10 साल की सजा काट रहा है और उस केस में उसे जमानत नहीं मिली है।
लोकसेवक की परिभाषा पर माननीय सुप्रीम कोर्ट में बहस
सुनवाई के दौरान लोकसेवक की परिभाषा को लेकर भी अहम बहस हुई। सॉलिसिटर जनरल ने तर्क दिया कि विधायक जैसी पद पर बैठे व्यक्ति की सामाजिक और प्रशासनिक प्रभुत्व वाली स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।इस पर CJI ने सवाल उठाया कि क्या लोकसेवक की परिभाषा को सिर्फ कानूनी दायरे में देखा जाए या फिर प्रभुत्वशाली सामाजिक स्थिति को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। इस संदर्भ में ए.आर. अंतुले केस का हवाला दिया गया।
2019 में दिल्ली ट्रांसफर हुआ था केस
उन्नाव रेप केस और उससे जुड़े अन्य मामलों को अगस्त 2019 में माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर उत्तर प्रदेश की माननीय निचली अदालत से दिल्ली स्थानांतरित किया गया था।
फिलहाल माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कुलदीप सिंह सेंगर जेल में ही रहेगा और उसकी जमानत पर अंतिम फैसला अगली सुनवाई में होगा।










