सीरिया के तटीय इलाकों में अलावी धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय के प्रदर्शनकारियों और जवाबी प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुईं। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, इन झड़पों में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई, जबकि 60 से अधिक लोग घायल हुए हैं।यह हिंसा होम्स शहर की एक अलावी मस्जिद में हुए बम धमाके के दो दिन बाद भड़की, जिसमें नमाज़ के दौरान 8 लोगों की मौत और 18 अन्य घायल हुए थे।
तटीय शहरों में तनाव
लताकिया, टार्टस और आसपास के इलाकों में हज़ारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में मस्जिद के भीतर विस्फोटक डिवाइस लगाए जाने की पुष्टि हुई है, लेकिन अब तक किसी संदिग्ध की सार्वजनिक पहचान नहीं की गई है।

हिंसा और सुरक्षा घटनाएं
मीडिया रिपोर्टस के अनुसार,टार्टस में एक पुलिस स्टेशन पर हैंड ग्रेनेड फेंका गया, जिसमें दो सुरक्षाकर्मी घायल हुए।लताकिया में सुरक्षा बलों की गाड़ियों को आग के हवाले किया गया। सरकारी एजेंसी SANA ने गोलीबारी में एक सुरक्षाकर्मी की मौत की पुष्टि की।लताकिया के अस्पतालों में चार शव देखे ।तीन के सिर पर पत्थरों से लगी गंभीर चोटें थीं, जबकि एक की मौत गोली लगने से हुई।
आतंकी संगठन ने ली जिम्मेदारी
सराया अंसार अल-सुन्ना नामक एक कम-ज्ञात आतंकी समूह ने अपने टेलीग्राम चैनल पर बयान जारी कर मस्जिद हमले की जिम्मेदारी ली। समूह ने कहा कि हमले का उद्देश्य अलावी समुदाय को निशाना बनाना था, जिन्हें कट्टरपंथी इस्लामिस्ट धर्मद्रोही मानते हैं।
अलावी समुदाय की शिकायतें
अलावी समुदाय का आरोप है कि पुर्व राष्ट्रपति असद के पतन के बाद सरकारी नौकरियों में उनके साथ भेदभाव हो रहा है।बिना आरोप के युवा अलावी पुरुषों को हिरासत में लिया जा रहा है।कर्मचारियों को नौकरियों से निकाला जा रहा है।
जवाबी प्रदर्शनकारियों का बयान
जवाबी प्रदर्शनकारी मोहम्मद इस्माइल ने कहा कि“हम एकजुट सीरिया चाहते हैं। कुछ लोग पुरानी व्यवस्था से फायदा उठाने के लिए देश को फिर अराजकता में धकेलना चाहते हैं।”
सरकार का रुख
सीरियाई सरकार ने मस्जिद हमले की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों को सज़ा दिलाने का वादा किया है, लेकिन अब तक किसी गिरफ्तारी की घोषणा नहीं हुई है।










